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केंद्र और राज्य सरकार के पाले में लालढांग से चिल्लरखाल के बीच कंडी मार्ग का मामला

Tue, 30 Jul 2019 09:49 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: अलका त्यागी Updated Tue, 30 Jul 2019 09:49 AM IST
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kandi road construction will done soon in uttarakhand
वन मंत्री हरक सिंह रावत - फोटो : फाइल फोटो

लालढांग-चिल्लरखाल सड़क का मामला अब केंद्र और राज्य सरकार के पाले में है। प्रदेश के वन मंत्री हरक सिंह अब इस सड़क के मामले को लेकर प्रधानमंत्री के दरबार में भी पहुंच गए हैं। हरक अब इस क्षेत्र में कंडी मार्ग के निर्माण की तैयारी में भी जुट गए हैं।

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राजाजी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में सड़क निर्माण को लेकर बुरी तरह फंसे हरक सिंह को सोमवार को राहत भी मिल गई। वन क्षेत्र में करीब 11 किलोमीटर के इस हिस्से के कारण हरक का कंडी मार्ग का प्रोजेक्ट तक प्रभावित होने की स्थिति में था। इसी स्थिति को देखते हुए उन्होंने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कंडी मार्ग की विस्तार से जानकारी दे दी।

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हरक ने पीएम को सौंपे पत्र में लालढांग-चिल्लरखाल मार्ग का उल्लेख किया और कहा कि इस मार्ग का निर्माण न होने से गढ़वाल और कुमाऊं के बीच 85 किलोमीटर की दूरी कम करने वाले ऐतिहासिक कंडी मार्ग का निर्माण भी प्रभावित हो रहा है। हरक ने पीएम को कंडी मार्ग की महत्वता के सारे प्रमाण उपलब्ध कराए हैं और कहा है कि इस मार्ग का उपयोग पिछले 150 साल से होता रहा है।

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इधर, सुप्रीम कोर्ट में लालढांग-चिल्लरखाल मार्ग से संबंधित मामले के सुप्रीम कोर्ट से निस्तारित होने के बाद पूरी कहानी ही बदल गई। अभी तक प्रदेश सरकार ने लालढांग से लेकर चिल्लरखाल के बीच सड़क का निर्माण रोका हुआ था। सड़क का यह हिस्सा राजाजी टाइगर पार्क के बफर जोन में है। इस पर वन विभाग ने सात मीटर के पुल के साथ ही सात मीटर चौड़ी सड़क बनाई थी। इस पर आपत्ति जताई गई थी और क हा गया था कि वन अधिनियम में वन क्षेत्र में सिर्फ तीन मीटर चौड़ी सड़क ही बनाई जा सकती है। कोर्ट ने यह भी पूछा था कि राज्य और केंद्रीय वन्य जीव बोर्ड और एनटीएसए से अनुमति क्यों नहीं ली गई। 


लालढांग से चिल्लरखाल के बीच कंडी मार्ग का निर्माण कराया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन किया जाएगा। मैंने अनुमति केे लिए भारतीय वन्य जीव संस्थान सहित अन्य संबद्ध एजेंसियों से बात भी कर ली है। हमने सुप्रीम कोर्ट में मजबूत पैरवी की और अपना पक्ष पूरी तरह से सामने रखा।
-हरक सिंह, वन मंत्री उत्तराखंड   

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