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भारत और चीन के साथ अब इस तीसरे देश से भी होकर गुजरेंगे कैलाश यात्री, यह है वजह

Tue, 06 Mar 2018 07:20 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Tue, 06 Mar 2018 07:20 AM IST
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Kailash yatri Will pass now this third country along with India and China
indo china - फोटो : google

कैलाश यात्री अब भारत और चीन के साथ इस तीसरे देश से भी गुजरेंगे। जानिए वजह...

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इस बार कैलाश मानसरोवर यात्रा भारत-चीन के साथ ही तीसरे देश नेपाल होकर भी गुजरेगी। इसके लिए भारत-नेपाल सीमा की सरहद महाकाली नदी पर दो पैदल पुल बनाए जाएंगे। पुल बनने के बाद यात्रा मार्ग की दूरी 400 मीटर बढ़ जाएगी।

पुल निर्माण की डेडलाइन 15 अप्रैल रखी गई है। दोनों देशों की समन्वय समिति की बैठक में मानसरोवर यात्रा पैदल मार्ग पर लखनपुर से नजंग तक 6 किमी हिस्सा  टूटने के चलते नेपाल के रास्ते यात्रा गुजारने के इस विकल्प पर सहमति बनी।

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आवाजाही की जरूरतों को देखते हुए भारत दो पैदल पुल बनाएगा

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कैलाश मानसरोवर यात्रा - फोटो : अमर उजाला

सोमवार को पिथौरागढ़ मुख्यालय में भारत-नेपाल समन्वय समिति की बैठक में पुल निर्माण पर सहमति बन गई। तय हुआ कि लखनपुर से नजंग के बीच आवाजाही की जरूरतों को देखते हुए भारत दो पैदल पुल बनाएगा। लखनपुर पैदल पुल की अनुमानित लंबाई 400 मीटर जबकि नजंग पुल की लंबाई 50 मीटर होगी।

इस तरह यात्री लखनपुर पैदल पुल होते हुए नेपाल सीमा में दाखिल होंगे। इसके बाद नजंग पर बने दूसरे पुल से वापस भारत सीमा में प्रवेश करेंगे। इस बार सिरखा और बूंदी के बीच गाला पड़ाव नहीं होगा। लखनपुर-नजंग के बीच सीमा के दूसरी ओर नेपाल 400 मीटर लंबा मार्ग भी बनाएगा। इसी मार्ग के जरिये यात्री लखनपुर से नजंग पहुंचेंगे।

भारत-चीन सीमा पर तवाघाट से लिपुलेख तक सड़क बना रहा है। धारचूला में लखनपुर से नजंग के बीच चल रहे सड़ निर्माण कार्य की गति को देखते हुए समय से निर्माण पूरा होना मुश्किल है। इन हालातों में जरूरत पड़ने पर इसी पैदल पुल से होते हुए कैलास यात्रियों को ले जाया जाएगा।

दोनों देशों के प्रवासी सात गांवों को होगा फायदा

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india nepal

पैदल पुल बनने के बाद लखनपुर से नजंग की दूरी चार सौ मीटर बढ़कर दो किमी हो जाएगी।  बैठक में पिथौरागढ़ डीएम सी रविशंकर, एसपी अजय जोशी, नेपाल के दार्चूला जिले के प्रमुख जिल्ला अधिकारी जनार्दन गौतम, आयोजना प्रमुख सुशील चंद्र, प्रमुख संरक्षण अधिकृत भूमिराज उपाध्याय समेत एसएसबी, आईटीबीपी, सैन्य अधिकारी थे।

भारत-नेपाल के बीच दो पैदल पुल बनने से दोनों देशों के प्रवासी सात गांवों को फायदा होगा। भारतीय गांवों में गुंजी, गर्ब्यांग, नपलचू, नाभी, बूंदी शामिल हैं, जबकि नेपाल के सिनकर, छांगरु गांव शामिल हैं। इन गांवों के बाशिंदे गर्मी शुरू होने के बाद उच्च हिमालयी क्षेत्रों से लौटते हैं।

अप्रैल में उच्च हिमालयी क्षेत्र से लौटने वाले प्रवासियों की आवागमन भी शुरू हो जाएगा। पैदल पुल बनने के बाद प्रवासियों की राह आसान होगी। प्रवासियों को महाकाली नदी को टायर ट्यूब के जरिये तैर कर पार करना पड़ता है।

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