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चुनावी सीजन में लापता सियासी संकट के सूत्रधार

Thu, 26 Jan 2017 11:30 AM IST
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 26 Jan 2017 11:30 AM IST
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kailash vijayvargiya missing from uttarakhand election
कैलाश विजयवर्गीय - फोटो : ANI

उत्तराखंड की सियासत में तूफान लाने वाले भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजवर्गीय चुनावी परिदृश्य में लापता हैं। वे प्रदेश में सियासी संकट के सूत्रधार रहे हैं, लेकिन अब जब चुनावी समर गरमाया है तो नजर नहीं आ रहे।

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विजयवर्गीय की इस गैर मौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में बहस पैदा कर दी है। माना जा रहा है कि सियासी संकट में विजयवर्गीय का हर दांव उल्टा पड़ गया था। इसी वजह से हाईकमान उन्हें सामने लाकर कांग्रेस को गड़े मुर्दे उखाड़ने का मौका नहीं देना चाहता। यह बात अमर उजाला नहीं, बल्कि भाजपा के ही एक तबके से निकलकर भाजपाइयों के बीच चर्चा का विषय है।
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बीते वर्ष मार्च महीने में राज्य की सियासत एकदम गरमा गई थी। कांग्रेस के नौ विधायकों की बगावत ने रावत सरकार को अल्पमत में ला दिया। सियासी संकट के इस पूरे खेल के पीछे कैलाश विजयवर्गीय को मास्टर माइंड माना गया। इस दौरान उनका चेहरा बार-बार सबके सामने आया।
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बागियों के हर विरोध और दांव पर राजनीतिक लोगों को विजयवर्गीय का अक्श नजर आया। उस दौरान विजयवर्गीय आए दिन देहरादून में ही मिलते थे। कांग्रेस ने तो उन्हें भाजपा का शॉर्प शूटर तक करार दिया था। यह पूरा एपीसोड देश भर के सियासी हल्कों में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहा। सियासी उठापटक के बीच मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां फ्लोर टेस्ट से बहुमत साबित करने के आदेश दिए गए। बाजी मुख्यमंत्री हरीश रावत के हाथ में रही।

विजयवर्गीय का हर दांव उल्टा पड़ा और कोशिशें परवान नहीं चढ़ सकीं। फिर कांग्रेस ने भाजपा पर सरकार को अस्थिर करने और तोड़फोड़ की राजनीति का आरोप भी मढ़ा। विपक्ष इसका कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। इस असफल प्रयास से हुई फजीहत के बाद से कैलाश विजयवर्गीय उत्तराखंड से एकदम नदारद हो गए।

माना जा रहा था कि चुनाव नजदीक आते ही वे फिर यहां डेरा डाल देंगे। लेकिन अब जब चुनावी बेला आ गई है, तो उनकी अनुपस्थिति पर भाजपा में ही कई सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेसी भी उन्हें याद कर रहे हैं। स्टार प्रचारकों के लिस्ट से भी उनका नाम गायब है। भाजपा के रणनीतिकारों की मानें तो उन्हें केंद्रीय आलाकमान ने खुद उत्तराखंड के चुनावों से दूर किया है। इसके पीछे अहम वजह उनकी नाकाम कोशिशों से हुई किरकिरी बताई जाती है। पार्टी सूत्र बताते हैं कि यदि विजयवर्गीय यहां रहेंगे तो कांग्रेस को गड़े मुर्दे उखाड़ने के लिए फिर से मौका मिलेगा।


ऐसा बिल्कुल नहीं है कि मुझे चुनाव से दूर रखा गया है। मैं दिल्ली से उत्तराखंड के चुनाव पर पूरी नजर रख रहा हूं। इन दिनों पश्चिम बंगाल में पार्टी के कामकाज को व्यवस्थित करने में व्यस्त हूं। जल्द ही उत्तराखंड के दौरे पर आऊंगा।
- कैलाश विजयवर्गीय, राष्ट्रीय महासचिव (भाजपा)

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