फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   justice in dehradun nari niketan samvasini rape and abortion case

नारी निकेतन प्रकरण: कोर्ट ने दिया मूक-बधिर रेप पीड़िता को इंसाफ, कहा 25 लाख मिले मुआवजा

Thu, 24 May 2018 01:22 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल/देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल/देहरादून Updated Thu, 24 May 2018 01:22 PM IST
विज्ञापन
justice in dehradun nari niketan samvasini rape and abortion case
nari niketan

देहरादून के केदारपुरम स्थित नारी निकेतन में वर्ष 2015 में मूक-बधिर महिला से बलात्कार और गर्भपात मामले में हाईकोर्ट ने पीड़िता को 25 लाख रुपये का मुआवजा अथवा 11 हजार रुपये प्रतिमाह आजीवन पेंशन देने का आदेश प्रदेश सरकार को दिया है। 

विज्ञापन


यह वही मामला है, जिसमें ‘अमर उजाला’ की पहल पर बड़ी जद्दोजहद के बाद एफआईआर दर्ज हो सकी थी। तफ्तीश शुरू हुई तो सच्चाई सामने आई। कोर्ट ने इसी जनहित याचिका के निस्तारण में सरकार को छह माह में जुवेनाइल जस्टिस रूल्स बनाने को भी कहा है
विज्ञापन


 हाईकोर्ट की अधिवक्ता शिवानी गंगवार ने जनहित याचिका दाखिल की थी। इसमें नारी निकेतन, देहरादून और राष्ट्रीय दृष्टि बाधित संस्थान जैसी संस्थाओं में महिलाओं और दिव्यांगों के साथ हो रहे शोषण पर सख्त कार्रवाई की मांग की गई थी। बुधवार को जनहित याचिका पर वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और जस्टिस शरद शर्मा की खंडपीठ ने सुनवाई की। 
विज्ञापन
विज्ञापन


‘ये संस्थान मंदिर हैं पर यहां बाड़ ही खेत को खा रही है’
हाईकोर्ट ने राज्य में नारी निकेतनों, बाल आश्रय गृहों जैसे संस्थानों में रह रहे आश्रितों की दुर्दशा पर तल्ख टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि निराश्रित बच्चों व महिलाओं को आश्रय देने वाले संस्थान दरअसल मंदिर के समान हैं लेकिन दुखद है कि इन मजबूर लोगों का उत्पीड़न हो रहा है। जो बाड़ के खेत को खाने का उदाहरण है।

दबाने की हुई थी पुरजोर कोशिश

justice in dehradun nari niketan samvasini rape and abortion case
nari niketan
अमर उजाला ने 17 नवंबर, 2015 को गोपनीय पत्र के आधार पर संवासिनी के साथ रेप और गर्भपात का मुद्दा उठाया था। उस समय सरकार ने मामले को न केवल बेहद हल्के  में लिया था, बल्कि इसे दबाने की भी कोशिश हुई। अगले दिन नारी निकेतन के अंदर की काली करतूत को छिपाने के लिए मीडियाकर्मियों पर पत्थरबाजी तक करा दी गई थी। 

अमर उजाला टीम ने हिम्मत नहीं हारी। प्रबोशन अधिकारी मीना बिष्ट ने तो मामले को सिरे से नकार दिया था। महिला कांग्रेस ने भी भ्रमण कर नारी निकेतन में कुछ ना होने की एक तरफा  रिपोर्ट जारी कर दी थी। अमर उजाला ने नारी निकेतन में तीन मूक-बधिर संवासिनियों की वीडियो रिकार्डिंग को लेकर मूक-बधिर सांकेतिक भाषा के विशेषज्ञों की राय की रिपोर्ट को प्रमुखता से प्रकाशित किया। इसमें नारी निकेतन में अपराध होने के साफ संकेत मिले, तब जाकर कहीं मामले को दबाने में लगे लोग बैकफुट पर आए। 

शोर-शराबा हुआ तो डीएम ने एडीएम झरना कामठान की अगुवाई वाली जांच टीम गठित की। टीम ने तथ्यों के आधार रिपोर्ट दी कि नारी निकेतन में कुछ ना कुछ गड़बड़ है। शासन के आदेश पर पुलिस अधीक्षक नगर अजय सिंह की अगुवाई में एसआईटी गठित हुई तो मूक बधिर पीड़ित संवासिनी तक पहुंचने में 48 घंटे से अधिक का समय नहीं लगा। मेडिकल आधार पर संवासिनी के गर्भपात की पुष्टि हुई तो अमर उजाला की मुहिम को पंख लग गए। एसआईटी ने अगले दिन दूधली के जंगल से भ्रूण बरामद किया तो पूरी खबर पर मोहर लग गई। इसके बाद शुरू हुआ कार्रवाई का सिलसिला। नारी निकेतन अधीक्षिका समेत कई लोगों को जेल जाना पड़ा।

नारी निकेतन के चौकीदार ने ही संवासिनी को अपनी हवस का शिकार बनाया था। डीएनए रिपोर्ट से इस पर मोहर भी लग गई। एसआईटी की जांच में आया कि दुराचार की घटना पर पर्दा डालने के लिए यह गर्भपात किया गया था।  इस खुलासे के बाद शासन की निंद्रा टूटी तो सुधार की प्रकिया शुरू हुई। मानसिक रोगी संवासिनी और मूक-बधिर को अलग-अलग करने के साथ मेडिकल व्यवस्था में सुधार हुआ। मूक-बधिर की भाषा समझने के लिए अलग से एक्सपर्ट रखे गए हैं। यही नहीं संवासिनी को नियमित योग कराने के साथ उन्हें धूप बत्ती, कैंडल आदि बनाने का प्रशिक्षण दिया गया। मूक-बधिर संवासनियों को वोट तक अधिकार देने के लिए पहचान-पत्र बनाए गए। दो दर्जन के करीब संवासिनी को उनके घर तक पहुंचाने में भी अमर उजाला की सार्थक पहल परवान चढ़ी।
 

यह था, घटनाक्रम

justice in dehradun nari niketan samvasini rape and abortion case
नारी निकेतन देहरादून - फोटो : AmarUjala
16 नवंबर-अमर उजाला ने फैक्स के जरिए मिले पत्र के आधार पर संवासिनी का शारीरिक शोषण का मुद्दा उठाया था।
17 नवंबर-अमर उजाला की खबर का संज्ञान लेकर जांच करने पहुंची बाल संरक्षण आयोग की उपाध्यक्ष विजय लक्ष्मी गुंसाई। उन्हें भी लगा कि कुछ ना कुछ गड़बड़ है।
 19 नंवबर-अमर उजाला को मिले वीडियो के जरिए साइन लेंग्वेज एक्सपर्ट से बात कर खुलासा किया कि संवासिनी कह रही है कि हो रहा यौन शोषण।
20 नंबवर-डीएम के निर्देश पर जांच करने पहुंची एडीएम की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय टीम के सामने पत्थरबाजी और हंगामा
21-नवंबर-वीडियो में दशाई गई तीन संवासिनियों के मेडिकल को लेकर अमर उजाला ने  नारी निकेतन की जांच का मुद्दा उठाया।
22 नवंबर-जांच समीति ने नारी निकेतन पहुंचकर दर्ज किए बयान। पुलिस ने अपने स्तर से शुरू की जांच पड़ताल।
23 नवंबर-टीम की जांच में रजिस्टर में मिली छेड़छाड़। जांच रिपोर्ट से पहले महिला कांग्रेस की क्लीन चिट पर अमर उजाला ने उठाए सवाल।
24 नवंबर-सीएम हरीश रावत ने एसआईटी गठित करने के दिए आदेश।
25 नवंबर-एसपी सिटी अजय सिंह की अगुवाई वाली टीम ने उस मूक बधिर को ढूंढ लिया, जिसका गर्भपात कराया गया था।
26 नवंबर-एसआईटी ने दुराचारी को ढूंढने में झोंकी ताकत, कई संदिग्ध उठाए।
27 नवंबर को दर्ज किया गया रेप और गर्भपात का मुकदमा, गिरफ्तारी का सिलसिला चला।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed