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पदक जीता तो नौकरी पक्की!
अमर उजाला, अंशुल डांगी, देहरादून
Updated Fri, 30 Aug 2013 08:28 AM IST
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उत्तराख्ांड के खेल फलक पर छाया सरकारी बेरुखी का कुहासा अब छटता नजर आ रहा है। राष्ट्रीय खेल दिवस पर राज्य सरकार ने प्रदेश के खिलाड़ियों और खेल प्रशिक्षकों की न सिर्फ सुध ली, बल्कि तोहफों की बरसात कर डाली।
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अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धि हासिल करने वाले राज्य के खिलाड़ियों को अब उत्तराखंड खेल रत्न पुरस्कार से नवाजा जाएगा, प्रशिक्षकों को भी देवभूमि उत्तराखंड द्रोणाचार्य पुरस्कार दिया जाएगा।
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खिलाड़ियो को मिलेगी पेंशन
दोनों पुरस्कारों की शुरुआत नौ नवंबर को राज्य स्थापना दिवस से होगी। सरकार को पूर्व खिलाड़ियों की भी याद आई है। 40 साल से अधिक आयु के पूर्व खिलाड़ियों को अब पेंशन मिलेगी।
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गुरुवार को विधानसभा भवन स्थित कार्यालय में बैठक के बाद खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल ने बताया कि उत्तराखंड खेल रत्न पुरस्कार के तहत खिलाड़ी को पांच लाख रुपये नकद, जबकि देवभूमि उत्तराखंड द्रोणाचार्य पुरस्कार के तहत तीन लाख रुपये नकद दिए जाएंगे।
कितनी मिलेगी पेंशन
बताया कि अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का नाम रोशन कर चुके पूर्व खिलाड़ियों को भी सरकार पेंशन देगी। हालांकि, पेंशन कितनी मिलेगी यह अभी तय नहीं है।
यही नहीं, अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले राज्य के खिलाड़ियों को रोडवेज बसों में निशुल्क यात्रा की सुविधा दी जाएगी। विकलांग और वेटरन खिलाड़ियों को भी नकद पुरस्कार दिए जाएंगे।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एकल वर्ग की तरह टीम वर्ग में पदक विजेता खिलाड़ियों को भी नगद पुरस्कार मिलेगा। बैठक में खेल सचिव अजय प्रद्योत, उप निदेशक अजय अग्रवाल मौजूद रहे।
मल्ल को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड
खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल ने बताया कि इस साल पूर्व अंतर्राष्ट्रीय बाक्सर पद्म बहादुर मल्ल को लाइफटाइम अवार्ड दिया जा रहा है। नौ नवंबर को राज्य स्थापना दिवस के मौके पर मल्ल को स्मृति चिह्न और पांच लाख रुपये देकर सम्मानित किया जाएगा।
2011 में भी हुई थी घोषणा
भाजपा शासनकाल में वर्ष 2011 में भी उत्तराखंड खेल रत्न पुरस्कार दिए जाने की घोषणा की गई थी। तत्कालीन खेल मंत्री खजानदास ने इसे बड़ी उपलब्धि बताया था। लेकिन सरकार की यह घोषणा इसके बाद फाइलों में ही दबी रह गई थी।