{"_id":"5b97de8a867a55013270eb0d","slug":"jilla-panchayat-adhyaksh-caste-certificate-abrogated-in-kichha","type":"story","status":"publish","title_hn":"उत्तराखंड: जिला पंचायत सदस्य का जाति प्रमाण पत्र निरस्त, सदस्यता पर मंडराया खतरा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
उत्तराखंड: जिला पंचायत सदस्य का जाति प्रमाण पत्र निरस्त, सदस्यता पर मंडराया खतरा
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, किच्छा
Updated Wed, 12 Sep 2018 07:04 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड के किच्छा में नजीमाबाद की जिला पंचायत सदस्य सावित्री देवी का अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र तहसीलदार ने निरस्त कर दिया है। प्रमाण पत्र निरस्त होने से उनकी सदस्यता पर खतरा मंडराने लगा है। वहीं, जिला पंचायत सदस्य के पति नंदकिशोर ने बताया कि वह तहसीलदार के निर्णय के खिलाफ हाईकोर्ट जाएंगे।
विज्ञापन
तहसीलदार महेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि ग्राम बखपुर निवासी सावित्री देवी ने 6 अगस्त 2008 को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र बनवाया था। उन्होंने अपना मायका ग्राम शाहपुर डोडी तहसील बहेड़ी जिला बरेली का उल्लेख करते हुए खुद को जाटव होने का दावा किया था।
विज्ञापन
इसके बाद जिला पंचायत क्षेत्र नजीमाबाद की आरक्षित सीट से चुनाव लड़कर जीत हासिल कर ली। शिकायत मिलने पर राजस्व उप निरीक्षक से जांच कराई गई तो पता चला कि तथ्यों को छुपाकर जाति प्रमाण पत्र हासिल कर लिया है, जबकि सावित्री देवी बंगाली समुदाय की हैं और देवीग्राम पिरफिरा पोस्ट चंद्रपांडा जिला मिदनापुर कलकत्ता की रहने वाली हैं।
विज्ञापन
सावित्री देवी ने जिस स्थान को अपना मायका बताया वह उनकी देवरानी महेंद्रवती का मायका है। तहसीलदार ने बताया कि प्रमाण पत्र निरस्त कर रिपोर्ट डीएम को भेजी जा रही है।