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Dehradun News: जौनसार बावर का लहसुन किसानों को कर रहा मालामाल
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I-खेती कर एक से 10 लाख रुपये तक कमा रहे किसान
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I- तारली और कोठा में हो रही सबसे अधिक खेतीI
जौनसार बावर क्षेत्र सांस्कृतिक रूप से बेहद समृद्ध क्षेत्र माना जाता है। क्षेत्र के अन्नदाता नकदी फसलों की खेती से आर्थिक विकास की नई दास्तां लिख रहे हैं। लहसुन लोगों की सेहत भी बना रहा है। किसान हर साल एक से लेकर 10 लाख रुपये तक का लहसुन बेचकर मालामाल हो रहे हैं।
कालसी तहसील क्षेत्र के तारली और कोठा गांव में तो किसान सबसे अधिक लहसुन की खेती कर रहे हैं। अक्तूबर में लहसुन के बीज की बुआई की जाती है। करीब छह महीने बाद अप्रैल में फसल तैयार हो जाती है। किसानों को मंडी में लहसुन के दाम 80 से 110 रुपये प्रति किलोग्राम मिलते हैं। मंडी से 120 से 135 रुपये प्रति किलोग्राम तक लहसुन की खरीद होती है। वहीं, सब्जी विक्रेता 180 से लेकर 250 रुपये प्रति किलोग्राम तक लहसुन बेचते हैं। जौनसार बावर में लहसुन की जैविक खेती की जाती है। इसलिए यहां के लहसुन की मांग भी काफी है।
Iयहां होती है लहसुन की जमकर खेतीI
कोठा, तारली, अलसी, ककाडी, नराया, लोरली, दातनु, बडनु, समाल्टा, पाठन, साहिया छानी, जडवाल, कुरौली, खतासा, सलगा, खमरौली आदि।
Iकिसान हिमाचल प्रदेश तक लगाते हैं दौड़I
लहसुन की फसल से किसानों की अच्छी आय होती है। इसलिए किसान अच्छे बीज की तलाश करते रहते हैं। कई किसान हिमाचल प्रदेश से भी लहसुन का बीज खरीद कर लाते हैं। एक किलो ग्राम लहसुन के बीज से औसतन 40 किलोग्राम लहसुन होता है। किसानों को करीब 120 से 135 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बीज मिलता है।
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Iलहसुन की फसल तैयार होने में छह महीने का समय तो लगता है। इसमें सिंचाई भी काफी जरूरत पड़ती है। अगर सिंचाई गूलों के निर्माण हों और उन्नत तकनीक के प्रयोग के लिए सलाह मिले तो उत्पादन और अधिक बढ़ाया जा सकता है।
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Iमाया राम शर्मा, उपरौली
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Iनकदी फसलों से अच्छा लाभ हो रहा है। लहसुन की खेती में मेहनत तो है पर लाभ भी अच्छा मिलता है। जहां सिंचाई की अच्छी व्यवस्था है वहां बड़े पैमाने पर लहसुन की खेती हो रही है। अगर सभी गांवों सिंचाई की व्यवस्था बेहतर हो तो जौनसार बावर प्रदेशभर में पहले स्थान पर होगा।
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Iदयाराम, कोठाI
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I- तारली और कोठा में हो रही सबसे अधिक खेतीI
जौनसार बावर क्षेत्र सांस्कृतिक रूप से बेहद समृद्ध क्षेत्र माना जाता है। क्षेत्र के अन्नदाता नकदी फसलों की खेती से आर्थिक विकास की नई दास्तां लिख रहे हैं। लहसुन लोगों की सेहत भी बना रहा है। किसान हर साल एक से लेकर 10 लाख रुपये तक का लहसुन बेचकर मालामाल हो रहे हैं।
कालसी तहसील क्षेत्र के तारली और कोठा गांव में तो किसान सबसे अधिक लहसुन की खेती कर रहे हैं। अक्तूबर में लहसुन के बीज की बुआई की जाती है। करीब छह महीने बाद अप्रैल में फसल तैयार हो जाती है। किसानों को मंडी में लहसुन के दाम 80 से 110 रुपये प्रति किलोग्राम मिलते हैं। मंडी से 120 से 135 रुपये प्रति किलोग्राम तक लहसुन की खरीद होती है। वहीं, सब्जी विक्रेता 180 से लेकर 250 रुपये प्रति किलोग्राम तक लहसुन बेचते हैं। जौनसार बावर में लहसुन की जैविक खेती की जाती है। इसलिए यहां के लहसुन की मांग भी काफी है।
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Iयहां होती है लहसुन की जमकर खेतीI
कोठा, तारली, अलसी, ककाडी, नराया, लोरली, दातनु, बडनु, समाल्टा, पाठन, साहिया छानी, जडवाल, कुरौली, खतासा, सलगा, खमरौली आदि।
Iकिसान हिमाचल प्रदेश तक लगाते हैं दौड़I
लहसुन की फसल से किसानों की अच्छी आय होती है। इसलिए किसान अच्छे बीज की तलाश करते रहते हैं। कई किसान हिमाचल प्रदेश से भी लहसुन का बीज खरीद कर लाते हैं। एक किलो ग्राम लहसुन के बीज से औसतन 40 किलोग्राम लहसुन होता है। किसानों को करीब 120 से 135 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से बीज मिलता है।
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Iलहसुन की फसल तैयार होने में छह महीने का समय तो लगता है। इसमें सिंचाई भी काफी जरूरत पड़ती है। अगर सिंचाई गूलों के निर्माण हों और उन्नत तकनीक के प्रयोग के लिए सलाह मिले तो उत्पादन और अधिक बढ़ाया जा सकता है।
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Iमाया राम शर्मा, उपरौली
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Iनकदी फसलों से अच्छा लाभ हो रहा है। लहसुन की खेती में मेहनत तो है पर लाभ भी अच्छा मिलता है। जहां सिंचाई की अच्छी व्यवस्था है वहां बड़े पैमाने पर लहसुन की खेती हो रही है। अगर सभी गांवों सिंचाई की व्यवस्था बेहतर हो तो जौनसार बावर प्रदेशभर में पहले स्थान पर होगा।
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Iदयाराम, कोठाI