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खुशखबर: 43 साल इंतजार के बाद जमरानी बांध परियोजना मंजूर, यूपी-उत्तराखंड को होगा बड़ा फायदा

Tue, 12 Feb 2019 08:45 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हल्द्वानी
न्यूज डेस्क/अमर उजाला, हल्द्वानी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Tue, 12 Feb 2019 08:45 AM IST
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Jamrani Dam project approved After 43 years 
जमरानी डैम - फोटो : अमर उजाला फाइल फोटो

भाबर की लाइफ लाइन जमरानी बांध परियोजना को वर्षों की जद्दोजेहद के बाद अंतत: मंजूरी मिल गई है। सोमवार को दिल्ली में हुई केंद्रीय जलायोग की तकनीकी सलाहकार समिति ने बांध परियोजना को मंजूरी दे दी है। अब परियोजना निर्माण के लिए वित्त का इंतजार है। जमरानी के लिए केंद्र सरकार से धनराशि की मांग की गई है।

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एसई संजय शुक्ल ने बताया कि केंद्रीय जलायोग के अधिकारियों ने 11 फरवरी को हुई टीएसी में बांध के सभी बिंदुओं और तकनीकी पहलुओं की गहन जानकारी अध्ययन के बाद तकनीकी मंजूरी दे दी है। अब बांध निर्माण की सभी बाधाएं दूर हो गई हैं। बांध के लिए वित्तीय व्यवस्था होते ही बांध निर्माण का काम शुरू हो जाएगा।
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बता दें कि वर्ष 1975 में इस परियोजना को सैद्धांतिक सहमति मिली थी। परियोजना के लिए तत्कालीन लागत 61.25 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। इस परियोजना के तहत गौला बैराज, 244 किमी नहरों, जमरानी कॉलोनी का निर्माण किया गया। इसमें करीब 25.24 करोड़ रुपये खर्च हुए। तब से लगातार परियोजना पर कई आपत्तियां लगती रहीं। आपत्तियों का निस्तारण कराने में सिंचाई विभाग को 43 साल बीत गए।
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जमरानी बांध परियोजना को टीएसी की मंजूरी मिलने के बाद अब बांध निर्माण की सभी बाधाएं दूर हो गई हैं। परियोजना को अब वित्त का इंतजार है। केंद्रीय जलायोग द्वारा केंद्र सरकार और राज्य सरकार को बांध की मंजूरी के साथ ही बांध निर्माण के लिए धन की व्यवस्था कराने के लिए पत्र भेज दिया गया है। बांध परियोजना के लिए वित्तीय व्यवस्था की कसरत तेज हो गई है।
- मोहन चंद्र पांडेय, मुख्य अभियंता सिंचाई विभाग

मोदी रुद्रपुर में घोषित कर सकते हैं केंद्रीय परियोजना

जमरानी बांध परियोजना को मंजूरी मिलने के तुरंत बाद केंद्र और राज्य सरकारें हरकत में आ गई हैं। सोमवार को देर शाम देहरादून मुख्यमंत्री कार्यालय से जमरानी को केंद्रीय परियोजना घोषित कराए जाने के संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय को पत्र भेजे जाने की सूचना है। कयास लगाए जा रहे हैं कि 14 फरवरी को रुद्रपुर दौरे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जमरानी परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित कर सकते हैं।

परियोजना पर अब तक हुई कसरत
- जमरानी बांध परियोजना को 1975 में सैद्धांतिक स्वीकृति मिलने के बाद 61.25 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए।
- सिंचाई विभाग ने 1981 में गौला बैराज का निर्माण किया। बैराज, 440 किमी नहरों, जमरानी कॉलोनी आदि के निर्माण में 25.24 करोड़ रुपये खर्च किए।
- 1989 में 144.84 करोड़ रुपये की डीपीआर भेजी भेजी गई। इस बीच बांध परियोजना की स्वीकृति में वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की तमाम आपत्तियां लगती रहीं।
- 2015 में परियोजना की लागत 2350 करोड़ रुपये पहुंच गई।
- 20 जुलाई 2018 में 2850 करोड़ रुपये की डीपीआर संशोधित कर  2573.10 करोड़ की डीपीआर केंद्रीय जलायोग को सौंपी गई।
- फिर 2800 करोड़ की नई डीपीआर केंद्रीय जलायोग को सौंपी।
- 21 जनवरी 2019 में 2954.45 करोड़ रुपये की डीपीआर सौंपी।
- चार फरवरी 2019 को 2584.10 करोड़ रुपये की अंतिम डीपीआर पर लगी मंजूरी की मुहर।

जमरानी बांध की विशेषता

- 9 किमी लंबा, 130 मीटर चौड़ा और 485 मीटर ऊंचा बनेगा बांध
- 368 हेक्टेयर वन क्षेत्र में फैला है
- 142.3 मिलियन क्यूबिक लीटर पानी मिलेगा बांध से
- 42.7 एमसीएम पानी शुद्ध पेयजल के लिए मिलेगा
- 61 एमसीएम उत्तरप्रदेश को, 38.6 एमसीएम पानी उत्तराखंड को सिंचाई के लिए मिलेगा
- 14 मेगावाट बिजली का होगा उत्पादन
- 129 परिवारों की 688 की आबादी का होना है विस्थापन, सिंचाई विभाग विस्थापितों को भूमि उपलब्ध नहीं करा पाने की स्थिति में मौजूदा बाजार दर पर मुआवजा देगा।

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