Uttarakhand: जमरानी बांध बनने से पेयजल और सिंचाई की जरूरतें होंगी पूरी, बिजली उत्पादन से होगी करोड़ों की कमाई
जमरानी बांध परियोजना का मुख्य मकसद यूपी और उत्तराखंड की सिंचाई और पेयजल की जरूरतों को पूरा करना है। इसके निर्माण के लिए केंद्र सरकार से बजट दिया जाना है। यूपी और उत्तराखंड सरकार भी इसके निर्माण में अपना अंश खर्च करेंगी।
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बहु प्रतीक्षित जमरानी बांध बनने से पेयजल और सिंचाई की जरूरतें पूरी होने के साथ ही बिजली उत्पादन भी होगा। इसका जिम्मा उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) को सौंपा गया है। यूजेवीएनएल 120 करोड़ की लागत से 14 मेगावाट का विद्युत उत्पादन प्लांट लगाएगा।
इसके तहत चार टरबाइन और पावर हाउस बनाना प्रस्तावित है। जमरानी बांध परियोजना का मुख्य मकसद यूपी और उत्तराखंड की सिंचाई और पेयजल की जरूरतों को पूरा करना है। इसके निर्माण के लिए केंद्र सरकार से बजट दिया जाना है। यूपी और उत्तराखंड सरकार भी इसके निर्माण में अपना अंश खर्च करेंगी।
बांध बनने से उत्तर प्रदेश में सिंचाई के लिए 61 मिलियन क्यूबिक मीटर और उत्तराखंड की सिंचाई के लिए 38.6 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी मिलेगा। हल्द्वानी शहर की 2050 की आबादी को ध्यान में रखते हुए 117 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। इस बांध से 14 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी होना है। इसके लिए राज्य सरकार यूजेवीएनएल को बजट उपलब्ध कराएगी।
विद्युत उत्पादन से सालाना 30 करोड़ आय का अनुमान
हल्द्वानी। जमरानी जल विद्युत परियोजना से सालाना 63.4 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन होगा। एक अनुमान के मुताबिक इससे सालाना आय करीब 30 करोड़ तक हो सकती है। ये बिजली नेशनल ग्रिड को जाएगी। उत्तराखंड को इस ऊर्जा का 12 प्रतिशत अंश रॉयल्टी के रूप में प्राप्त होगा। इससे राज्य को मुफ्त बिजली मिलने के साथ ही बिजली की निर्बाध आपूर्ति भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
ऐसे काम करती है जल टरबाइन
हल्द्वानी। पानी को बड़े पाइपों के जरिए पावर हाउस तक लाया जाता है। पावर हाउस में जल की शक्ति टरबाइनों को गोल-गोल घुमाती है। इस निरंतर गति से एक बल उत्पन्न होता है जिससे विद्युत शक्ति का निर्माण किया जाता है। टरबाइनों की सहायता से जेनेरेटरों को चलाया जाता है। इसमें एक आर्मेचर तार एक शक्तिशाली चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है। इससे टरबाइन की यांत्रिक ऊर्जा विद्युत में परिवर्तित होती है। ट्रांसफार्मर से जेनेरेटरों में उत्पन्न प्रत्यावर्ती करंट को उच्च वोल्टेज करंट में परिवर्तित किया जाता है जो दूरस्थ पारगमन के लिए उचित होता है।
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जमरानी बांध परियोजना से 14 मेगावाट विद्युत उत्पादन किया जाना प्रस्तावित है। इसकी जिम्मेदारी यूजेवीएनएल के पास है। 120 करोड़ की लागत से पावर प्लांट का निर्माण किया जाएगा। - बीबी पांडे, उपमहाप्रबंधक, जमरानी बांध परियोजना इकाई