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दो प्रदेशों के बीच तकरार, लागत पहुंची 38 गुना पार
बिशन सिंह बोरा / अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 11 Dec 2016 12:42 PM IST
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उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के बीच गोला नदी के पानी को लेकर तकरार के चलते सालों से अटके पड़े जमरानी बांध के निर्माण की उम्मीद जगी है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बांध के निर्माण के लिए दोनों प्रदेश अब एक कदम आगे बढ़े हैं।
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15 दिसंबर को दोनों प्रदेशों के अधिकारियों की बैठक होने जा रही है। निर्माण कार्य में देरी के कारण अब इसे बनाने पर 38 गुना से ज्यादा करीब 2350.56 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। 1975 में बांध को बनाने की प्रशासनिक अनुमति मिली थी। उस वक्त इसे बनाने के लिए 61.24 करोड़ की तकनीकी स्वीकृति मिली थी।
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काठगोदाम से दस किलोमीटर की दूरी पर गोला नदी में प्रस्तावित जमरानी बांध के निर्माण के लिए उत्तराखंड राज्य गठन से पहले उत्तर प्रदेश ने प्रथम चरण में काठगोदाम में गोला बैराज का निर्माण किया, इसके अलावा 40 किलोमीटर लंबी पोषक नहरों का निर्माण हुआ एवं 244 किलोमीटर नहरों की मरम्मत की गई।
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वर्ष 2001-02 तक इस पर 23 करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन उत्तराखंड अलग राज्य गठन के बाद से द्वितीय चरण में काम नहीं हो पाया। असल में उत्तर प्रदेश न सिर्फ सिंचाई के लिए वर्तमान में मिल रहे पानी के अनुरूप पानी चाहता है, बल्कि वह बांध निर्माण का स्थल उत्तराखंड राज्य की भौगोलिक सीमा के अंतर्गत होने के बावजूद उत्तराखंड के साथ मिलकर संयुक्त रूप से इसका निर्माण चाहता है।
वर्षों से चले आ रहे इस विवाद के चलते बांध निर्माण की लागत बढ़कर जहां बढ़कर अब 38 गुना से अधिक हो चुकी है, वहीं पेयजल और सिंचाई की समस्या के रूप में दोनो प्रदेशों के लोगों को इसमें देरी का खामियाजा उठाना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि बांध के निर्माण से उत्तराखंड को 9458 हेक्टेयर और उत्तर प्रदेश को 47607 हेक्टेयर कुल 57065 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिरिक्त सिंचाई सुविधा मिलेगी।
इससे 14 मेगावाट विद्युत उत्पादन प्रस्तावित है। बांध के जलाशय से 142.72 एमसीएम (मिलियन क्यूबिक मीटर) जल संग्रहित होगा, जिसमें से उत्तराखंड को पेयजल के लिए 52.93 क्यूबिक मीटर पानी मिलेगा। जबकि 89.79 एमसीएम जल सिंचाई के लिए प्रस्तावित है। जो उत्तर प्रदेश एवं उत्तराखंड को 57 एवं 43 प्रतिशत के अनुपात में उत्तर प्रदेश को 51.18 एमसीएम और उत्तराखंड को 38.60 एमसीएम मिलेगा।
यह भी बना है विवाद
बांध एवं बैराज के संचालन के संबंध में उत्तर प्रदेश का मत है कि बांध एवं बैराज का संचालन दोनो राज्यों के द्वारा संयुक्त रूप से किया जाएगा। जबकि उत्तराखंड का मत है कि बांध एवं बैराज का संचालन केवल उत्तराखंड द्वारा किया जाएगा।
यह है प्रस्तावित योजना
जमरानी बांध योजना को 1975 में उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की थी, उस दौरान परियोजना की लागत 61.24 करोड़ की तकनीकी स्वीकृति योजना आयोग भारत सरकार की ओर से प्रदान की गई थी। योजना के तहत काठगोदाम से दस किलोमीटर ऊपर गोला बैराज के अप स्ट्रीम में 130.60 मीटर ऊंचे रोलर कांपेक्टेड कंक्रीट ग्रेविटी बांध बनाया जाना प्रस्तावित है। अलग राज्य गठन के बाद एक मार्च 2001 को केंद्रीय जल आयोग से नई हाइड्रोलॉजी स्वीकृत कराई गई, सात दिसंबर को केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने 14 मेगावाट विद्युत उत्पादन की स्वीकृति दी।
गोला नदी पर 130 मीटर ऊंचे और 480 मीटर चौड़ाई के इस प्रस्तावित बांध के निर्माण में देरी की वजह दोनों प्रदेशों के बीच एमओयू न हो पाना है। उत्तर प्रदेश वर्तमान पानी के अनुरूप सिंचाई की लिए पानी की मांग कर रहा है, इसके लिए उत्तराखंड तैयार हैं, अब 15 दिसंबर को दोनो प्रदेशों के अधिकारियों की बैठक होनी है, मामले को सुलझाने का प्रयास किया जाएगा।
-आर चालिसगांवकर, प्रमुख अभियंता सिंचाई