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जल संस्थान भी बनाएगा बायो-गैस से बिजली
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 02 Mar 2016 11:09 AM IST
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एनजीटी की नाराजगी के बाद सीवर से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए अब जल संस्थान ने नया रास्ता ढूंढ निकाला है।
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विभाग की ओर से सीवर से बायो गैस बनाए जाने की योजना है। इस बायो गैस को फिर बिजली और अन्य उपयोग में लाया जाएगा। इसके साथ ही सैप्टिक टैंकों के जहां-तहां सीवर फेंके जाने पर भी रोक लगने वाली है।
एनजीटी की ओर से सीवर से होने वाले प्रदूषण पर नाराजगी जताई गई थी और इसके लिए बायो-डाइजेस्टर बनाए जानेे के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद जल संस्थान की ओर से दून को सीवर के प्रदूषण से मुक्त कराए जाने की योजना तैयार की जा रही है। दरअसल अब तक सैप्टिक टैंक सीवर चैंबरों से उठाए गए सीवर को नदी-नालों में छोड़ देता है।
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ऐसे में नदी-नालों में गंदगी फैल रही है। अब जल संस्थान ने इस ओर गंभीरता दिखाते हुए यह सीवर नदी-नालों की जगह सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में फेंकने को कहा है। जो ग्रामीण क्षेत्र एसटीपी से दूर हैं और जहां पर्याप्त जगह है, वहां बायो-गैस योजना पर काम किया जाएगा। ऐसी जगहों पर बायो-डाइजेस्टर के माध्यम से सीवर को बायो गैस में बदला जाएगा। इसके साथ ही बायो गैस से बिजली आदि बनाए जाने की योजना है।
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जल संस्थान की ओर से पहली बार इस तरह की योजना तैयार की गई है। अब तक सीवर से फैलने वाले प्रदूषण की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा था, लेकिन अब इसके लिए योजना बना ली गई है। बायो-डाइजेस्टर के माध्यम से बायो-गैस बनाई जाएगी। इस योजना को शासन में भेजा जा रहा है।
- एसके गुप्ता, मुख्य महाप्रबंधक, जल संस्थान
एनजीटी ने जताई थी नाराजगी
एनजीटी की ओर से सीवर से होने वाले प्रदूषण पर नाराजगी जताई गई थी। इसके साथ ही बॉयो-डाइजेस्टर बनाकर इससे बनने वाली खाद को फ्री में किसानों को देने को कहा गया था। इसके बाद ही विभाग की ओर से यह योजना तैयार की गई। बायो-डाइजेस्टर से खाद, बायो-गैस आदि बनाए जाने की योजना तैयार की गई है।