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पौधों को सेहतमंद बना रहे गुड़ और दालें, डेढ़ साल से वन विभाग पौधों पर कर रहा इस्तेमाल
Wed, 11 Sep 2019 02:55 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला, हल्द्वानी
विजेंद्र श्रीवास्तव, अमर उजाला, हल्द्वानी
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Wed, 11 Sep 2019 02:55 PM IST
सार
- वन अनुसंधान ने गुड़, दाल, गोमूत्र और गोबर से तैयार किया जीवामृत
- परिणाम आए सकारात्मक
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
गुड़ और दालें इंसानों की सेहत ही नहीं बल्कि पौधों की सेहत को भी बेहतर रखने में मददगार साबित हो रहे हैं। वन अनुसंधान ने गुड़, दाल, गोमूत्र और गोबर से जीवामृत (घोल) तैयार कर नर्सरी से लेकर जंगल में लगाए गए पौधों पर इस्तेमाल किया है। वनाधिकारियों के अनुसार परिणाम सकारात्मक आए हैं। पौधों की ग्रोथ बेहतर हुई है।
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जापान की मियावाकी तकनीक से पौधों की जड़ों को जीवामृत के घोल में डूबो कर लगाया गया। नर्सरी में तैयार किए जाने वाले पौधों पर भी इसी तकनीक का इस्तेमाल किया गया। वन क्षेत्राधिकारी मदन बिष्ट के अनुसार करीब डेढ़ साल से जीवामृत का इस्तेमाल नर्सरी और जंगल दोनों जगहों पर किया जा रहा है। इसके शुरुआती परिणाम सकारात्मक आए हैं। उनका दावा है कि पौधों की ग्रोथ तुलनात्मक तौर पर बेहतर हुई है। जीवामृत कीटनाशक के तौर पर भी काम करता है। इससे पौधों का बीमारी से बचाव होता है।
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किसानों के लिए भी मददगार
वन अनुसंधान के अधिकारियों के अनुसार जीवामृत किसानों के लिए भी काफी लाभदायक है। अगर खेती में जीवामृत का इस्तेमाल किया जाए तो लाभ होगा। जीवामृत कैसे तैयार किया जाता है या इसे कैसे इस्तेमाल किया जाता है, यदि इसकी जानकारी कोई व्यक्ति या संस्था जानना चाहेगी तो विभाग उसे उपलब्ध कराएगा।
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जीवामृत को गुड़, दाल, गोमूत्र और गोबर के साथ थोड़ा ह्यूमस (सड़े पत्तों की खाद) आदि का इस्तेमाल कर तैयार किया जाता है। जीवामृत में आयरन, नाइट्रोजन समेत कई पोषक तत्व होते हैं। वन अनुसंधान में मियावाकी तकनीक से जंगल को तैयार करने का काम हो रहा है। इसमें जीवामृत का इस्तेमाल किया गया है, जिसके परिणाम काफी अच्छे आए हैं।
-संजीव चतुर्वेदी, वन संरक्षक (अनुसंधान)