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बदलेगा जागेश्वर मंदिर समूह का स्वरूप
प्रवेश कुमारी/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 10 Sep 2014 03:17 PM IST
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जागेश्वर मंदिर समूह कुमाऊं का सिरमौर है। हर साल लाखों की संख्या में सैलानी और श्रद्धालु यहां का रुख करते हैं।
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मृत्युंजय मंदिर का रूप बदलने की तैयारी
मंदिर समूह में स्थित सबसे पुराने मृत्युंजय मंदिर का रूप बदलने की तैयारी है। न केवल मंदिर के शिखर का आकार बदला जाएगा, बल्कि इस पर लगी लकड़ी को हटाकर भी तांबा लगाया जाएगा।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) दून सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद् अतुल भार्गव के अनुसार शिखर पर तकरीबन 20 साल पहले काष्ठ यानी लकड़ी मंडित की गई थी, जो अब तकरीबन गल गई है। इसके स्थान पर अब तांबे का प्रयोग इसलिए किया जाएगा, क्योंकि यह बहुत समय तक खराब नहीं होता।
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मंडप को भी नया रूप दिया जाएगा, जिस पर कार्य शुरू हो गया है। पूरे कार्य में कुल 30 लाख रुपए लगने हैं। 25 लाख रुपए मृत्युंजय मंदिर पर लगाए जाएंगे।
124 मंदिर स्थित हैं समूह में
जागेश्वर मंदिर समूह में 124 मंदिर स्थित हैं। यह मंदिर 9वीं-13वीं सदी के माने जाते हैं। इनमें सबसे पुराने मृत्युंजय मंदिर में लिंग पूजा जाता है। शुक्ल यजुर्वेद संहिता में भी इसका जिक्र है।
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1952 का रूप देने की तैयारी
मृत्युंजय मंदिर को कुछ-कुछ 1952 के रूप में बदलने की तैयारी है। शिखर का आकार इसीलिए बदला जाएगा। एएसआई ने मंदिर के इस काल केफोटो भी निकलवाए हैं।