IS ने अखलाक को दी थी मिशन हिंदुस्तान की कमान
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दुनिया के सबसे खूंखार आतंकवादी संगठन आईएसआईएस ने अखलाख को मिशन हिंदुस्तान की कमान सौंपी थी। अर्द्धकुंभ मेले को दहला देने के बाद भले ही कोई अगला टॉरगेट फिक्स नहीं था पर देश भर में आईएसआईएस की जड़ें मजबूत करना अखलाख का मकसद था। उसने अपने तीन दोस्तों को जोड़कर सफलता की पहली सीढ़ी चढ़ ली थी।
पॉलीटेक्निक के छात्र रहे अखलाख के इरादे बेहद खतरनाक थे। वह हर हाल में अर्द्धकुंभ में खून की होली खेलने का मन बना चुका था। इराक में बैठे उसके आका यूसुफ से उसे आदेश मिल गया था। वह हिंदुस्तान में आईएसआईएस का मुख्य चेहरा बनकर उभरेगा। अर्द्धकुंभ से उसे मिशन का आगाज करना है फिर अगला मिशन जल्द सौंपा जाएगा।
मिशन में लड़ाकों की कमी को दूर करने की मुख्य जिम्मेदारी उसे दी गई थी। उत्तराखंड पुलिस के एक अफसर की मानें तो अखलाख से ही यूसुफ का संवाद होता था। इसके बाद अखलाख दोस्तों से जानकारी सांझा करता था। अब पुलिस उस व्यक्ति तक पहुंचने में जुट गई है जो इन्हें धन देता था।
अर्द्धकुंभ में रेकी से लगा डर लेकिन नहीं डिगा हौसला
मिशन अर्द्धकुंभ को लेकर आईएसआईएस के इन नए चेहरों ने हरकी पैड़ी की रैकी भी कर ली थी। कड़े सुरक्षा प्रबंध से एक बारगी वे डर गए थे। लेकिन अखलाख ने उनका हौसला डिगने नहीं दिया बल्कि मजहब का हवाला देकर मिशन फतेह करने के लिए दोगुना जोश उनके रग रग में भर डाला। यही कारण था कि ये युवक अब अर्द्धकुंभ में विस्फोट करने की ठान ही चुके थे। वे किसी भी कीमत पर मिशन को पूरा करना चाहते थे।
दिल्ली स्पेशल स्पेश, आईबी एवं उत्तराखंड पुलिस की गिरफ्त में आए आईएसआईएस के इन चेहरों ने जब अर्द्धकुंभ को लेकर खुलासा किया तब हर किसी के पांव तले जमीन ही खिसक गई। बिना हिचकिचाहट के अखलाख ने कबूला कि ओसामा व मोहम्मद अजीमुस्सान ने हरकी पैड़ी की रैकी कर ली थी। लेकिन वे जब वापस लौटे, तब थोड़ा घबरा गए थे क्योंकि सुरक्षा के इंतजाम देखकर उनका हौसला टूट गया था। लेकिन फिर मैंने (अखलाख) ने उनका हौसला बढ़ाया।
धर्म का हवाला देते हुए कहा कि उन्हें हर हाल में मिशन को अंजाम देकर ही रहना है। जेहन में डर को खत्म कर देने के बाद ही सभी युवक आतंक फैलाने की बात पर हामी भर ही दी थी। लेकिन अर्द्धकुंभ में कौन सा दिन या कोई स्नान उन्होंने तय नहीं किया था। वे कभी भी विस्फोट कर सकते थे, बस विस्फोट का साजो सामान जुटाने में लगे हुए थे।
तकनीक से आया पकड़ में अखलाख
आईएसआईएस से हाथ मिला चुके छात्र अखलाख यूं ही पकड़ में नहीं आया बल्कि कुछ समय से यह गोपनीय ऑपरेशन चल रहा था। दरअसल, आतंकी गतिविधियों को लेकर जांच में जुटी रहने वाली दिल्ली स्पेशल सेल एवं आईबी की टीम को तकनीक के जरिये ही अखलाख का क्लू मिला था। तब से स्थानीय पुलिस की मदद से अखलाख की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी।
तकनीक की ही मदद से अखलाख के साथ जुड़ चुके उसके साथी बेनकाब होते गए। दिल्ली से ही हाईलेबल पर यह ऑपरेशन चल रहा था इसलिए छात्र अखलाख पर दिन रात निगाह रखी गई।
तकनीक से उसकी हर हरकत को जान रही पुलिस ने तब उसके गिरेबां पर हाथ डाला तब वे विस्फोट का मन बना ही चुके थे। अभी दिल्ली से लेकर उत्तराखंड की पुलिस इन सभी के मोबाइल फोन को बारी बारी से खंगालने में जुटी है।
मजहब के नाम पर पकड़ी आतंक की राह
मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, ये पक्तियां हर देशवासी को एक सूत्र में पिरोकर रखती हैं, लेकिन आतंक की पाठशाला के इन नए छात्रों ने मजहब पर हो रहे कथित अत्याचार के बहकावे में आकर ही आतंक की राह पकड़ ली। गैंग लीडर अखलाख के धर्म को लेकर फेसबुक पर बगावती तेवर को देखकर ही यूसुफ ने उस पर हाथ रखा।
फेसबुक पर ही यूसुफ ने उससे दोस्ती गांठ ली। फिर धीरे धीरे वे करीब आते चले गए। उत्तराखंड पुलिस सूत्रों की माने तो इराकी यूसुफ ने मुस्लिमों पर हिंदुस्तान में हो रहे अत्याचारों के कई कथित वीडियो शेयर किए। कहा कि यह सभी वीडियो हिंदुस्तान के ही हैं और हिंदुस्तान में इस्लाम खतरे में है।
वह धीरे धीरे अखलाख में धर्म को लेकर कटटरपंथ के बीज बोता रहा। उसका नतीजा यह निकला कि अखलाख ने आखिरकार आतंक के रास्ते पर चलने की ठान ली। फिर यूसुफ ने ही आतंक फैलाने के किसी भी हद तक गुजर जाने को ही सच्चा धर्म का सिपाही बताया।
धर्म के बुने जाल में ही फंसकर अखलाख ने अपने दोस्तों को भी आतंक फैलाने के लिए राजी कर लिया। मध्यम वर्गीय परिवारों से ताल्लुक रखने वाले इन युवकों को केवल धर्म के नाम पर ही भटकाया गया और हर ऐशो आराम से भी नवाजने का लालच दिया गया था।