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वन विभाग के मुआवजे में बड़ा खेल, जांच शुरू
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 17 Oct 2017 10:54 AM IST
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वित्त एवं नियोजन अनुभाग को गड़बड़ी होने का संदेह
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मानव-वन्यजीव संघर्ष में मिलने वाले मुआवजे के मामले एकाएक बढ़ गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा बढ़ोत्तरी पशु और फसल क्षति को लेकर है।
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इसे लेकर वन मुख्यालय के वित्त एवं नियोजन अनुभाग को गड़बड़ी होने का संदेह है। इसके बाद वन संरक्षकों से मामले की रिपोर्ट मांगी गई है। इसके अलावा गढ़वाल और कुमाऊं मुख्य वन संरक्षकों को भी मामलों का परीक्षण करने का निर्देश दिया गया है। बात अगर 2015-16 की करें तो बाघ, तेंदुओं के हमले से 3234 भैंस, गाय, बकरी मारे जाने के मामले, हाथी, सूअर आदि द्वारा 307 हेक्टेयर में फसल नुकसान और 45 मकानों के क्षतिग्रस्त होने का मुआवजा मांगा गया। 2016-17 में पशु क्षति के मामलों में अचानक बढ़ोत्तरी हो गई।
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12 महीने में ही 4943 केस बढ़ गए और 8187 मामलों में मुआवजा मांगा गया। इसके अलावा फसल क्षति के मामलों में भी 186 हेक्टेयर की वृद्धि हुई और 486.34 हेक्टेयर में फसल का नुकसान होने के बाद मुआवजा देने की गुहार लगाई। इस साल 66 मकान क्षति के प्रकरणों में राहत राशि देने की मांग की गई। असली खेल 2017-अप्रैल से अगस्त के बीच हुआ है, जिसके बाद वन विभाग के अधिकारियों के होश उड़ गए हैं।
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इन चार महीनों में ही पशु क्षति के अचानक एक-दो नहीं बल्कि 4843 के मामले बढ़ गए। वन विभाग से 9945 मामलों में मुआवजे की मांग की है। यही हाल फसल नुकसान को लेकर है। चार महीने में 1334 हेक्टेयर में वन्यजीवों ने फसलों को नुकसान पहुंचाया है। हाथियों द्वारा मकानों के क्षतिग्रस्त होने के मामले भी बढ़ गए। इन चार महीनों में ही हाथियों ने 74 मकान को ध्वस्त कर दिया है।
अचानक मुआवजे के बढ़े मामलों को लेकर वन विभाग के होश उड़ गए हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में वन विभाग ने करीब साढ़े पांच करोड़ मुआवजा दिया था। इस बार चार महीने में ही 93 लाख दे चुका है, करीब आठ करोड़ तक और देना पड़ सकता है। वन मुख्यालय को संदेह है कि कई मामले संदिग्ध हैं। इसके बाद मुख्यालय ने वन संरक्षकों के अधीन बनने वाली समितियों को मुआवजे के मामलों की जांच करने को कहा है।
इसके अलावा जांच रिपोर्ट और सुझावों को भी मुख्यालय जल्द भेजने का निर्देश दिया है। वन संरक्षकों के अधीन बनने वाली टीम सही काम कर रही है, उस पर भी नजर रखने की व्यवस्था की गई है। मुख्य वन संरक्षकों को वन संरक्षकों के अधीन बनी समिति के कामकाज पर नजर रखने और रिपोर्ट भेजने को कहा गया है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार अगर मामले की जांच सही तरीके से हुई तो कई फर्जी मामलों का खुलासा हो सकता है।
अचानक फसल क्षति, पशु क्षति और मकान ध्वस्त होने के मामले काफी बढ़ गए हैं। प्रथमदृष्टया यह बढ़ोत्तरी स्वभाविक नहीं लग रही है। डीएफओ स्तर से मुआवजे की मांग की जाती है, उसकी गहनता से जांच करने को वन संरक्षकों के निर्देशन में बनी कमेटी को कहा गया है, अब उनकी संस्तुति पर आगे कोई फैसला होगा। मुख्य वन संरक्षकों को भी नजर रखने को कहा गया है। अगर जांच में गड़बड़ी सामने आई, तो कड़ी कार्रवाई होगी। इन रिपोर्ट के आधार पर शासन स्तर आगे की कार्रवाई के लिए बात की जाएगी।
- गंभीर सिंह, प्रमुख वन संरक्षक वित्त एवं नियोजन