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उत्तराखंड पुलिस एप पर लगा ईमानदारी का ‘मेला’
राकेश शर्मा / अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 09 Mar 2017 11:51 AM IST
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पुलिस थानों की बदरंग छवि के विपरीत उत्तराखंड पुलिस का मोबाइल एप नई पहचान बना रहा है। बीते एक वर्ष में एप के माध्यम से प्रदेश में 258 लोगों ने ईमानदारी की नई मिसाल पेश की है। इस दौरान ड्राइविंग लाइसेंस, सोने की चेन, अंगूठी और ब्रेसलेट जैसे कीमती सामान को मोबाइल एप पर पोस्ट कर उनके मालिकों तक पहुंचाने की कोशिश की गई। एप पर पुलिस सत्यापन के करीब डेढ़ लाख आवेदन भी आ चुके हैं।
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आईजी संजय गुंज्याल ने नेतृत्व में तैयार उत्तराखंड पुलिस का मोबाइल एप वैसे तो 31 अक्तूबर 2015 में लांच हो गया था, लेकिन जनवरी 2016 में एप का विधिवत शुभारंभ हुआ। पहले इसका प्रयोग गढ़वाल मंडल में किया गया। लेकिन चार माह पहले कुमाऊं मंडल को भी मोबाइल एप से जोड़ा गया। प्रदेश में करीब 36 हजार लोगों ने एप को डाउनलोड किया है। मित्रता, सेवा और सुरक्षा के पुलिस संकल्प के बीच भी लोगाें की नजरों में थानों की छवि अपेक्षाकृत सुधर नहीं पाई है। यही वजह है कि लोगों को मोबाइल एप की सुविधा खूब रास आ रही है।
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आंकड़े बताते हैं कि उत्तराखंड पुलिस के मोबाइल एप पर करीब एक लाख 55 हजार लोगों ने अपने किरायेदार और नौकराें के सत्यापन के लिए आवेदन किया है। इसके अलावा 6034 लोगों ने मोबाइल, शैक्षिक प्रमाणपत्र, ड्राइविंग लाइसेंस और परिचय कार्ड गुम होने की रिक्वेस्ट डाली गई। इनमें से 2733 सामान मोबाइल एप के माध्यम से बरामद हो गए। इनमें करीब 65 मोबाइल फोन भी शामिल हैं। क्राइम रिपोर्टिंग से जुड़ी करीब 275 शिकायतें एप पर आईं, जिनमें से 224 पर त्वरित कार्रवाई का दावा किया गया है।
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उत्तराखंड पुलिस मोबाइल एप के माध्यम से होने वाले वेरिफिकेशन का पूरा डाटा है, जिसमें संबंधित किरायेदार और नौकर के मोबाइल नंबर और उनके लिंक नंबरों के अलावा ईएमईआई नंबर, आधार कार्ड नंबर आदि रिकॉर्ड है। किसी अपराध की स्थिति में उन्हें खोजने में यह डाटा बेहद मददगार साबित होगा। साथ ही लावारिस सामान बरामद होने के मामले में लोग मोबाइल एप पर आकर ईमानदारी का परिचय देने में पीछे नहीं हैं। प्ले स्टोर से एंड्रायड मोबाइल में इसे डाउनलोड किया जा सकता है।
- मोहम्मद यासीन, प्रभारी, उत्तराखंड पुलिस मोबाइल एप