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इन कारगुजारियों पर जरा गौर फरमाइए CM साहब

Thu, 21 Aug 2014 03:11 PM IST
रजा शास्त्री, मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
रजा शास्त्री, मनीष चंद्र भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 21 Aug 2014 03:11 PM IST
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inspection of harish rawat in dehradun

उत्तरांखड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अंतरराज्यीय बस अड्डे का छापामार निरीक्षण कर वहां की गड़बड़ियां पकड़ीं, बदइंतजामी देखी और जिम्मेदार अफसरों व एजेंसियों को फटकार लगाई।

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शायद सीएम को यह अहसास न हो कि सिस्टम कितना ढीठ हो चुका है और उनके दौरे व औचक निरीक्षण अक्सर कम ही असर डालते हैं, अमर उजाला अपने पाठकों को कुछ खबरों के जरिए सीएम के ऐसे ही सख्त दौरों की एक सैर करा रहा है।
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अमर उजाला टीम के छापों से आप खुद ही अंदाजा लगा सकेंगे कि शासन-प्रशासन की सुस्ती दूर कर सिस्टम चुस्त करने की मुख्यमंत्री की कोशिशें कितनी परवान चढ़ रही हैं।

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हादसे ने पैर तोड़े, सिस्टम ने उम्मीद

inspection of harish rawat in dehradun

‘तेरे वादे पर जिये हम तो ये जान झूठ जाना-खुशी से मर न जाते अगर एतबार होता।’ इस वक्त गांधी नगर के 70 वर्षीय आबिद खान के जेहन में ऐसे ही ख्यालात हैं।

मुख्यमंत्री पद की फरवरी में शपथ लेने के बाद जब हरीश रावत मोहल्ले में आए थे तो अफसरों ने आबिद से भी विकलांग पेंशन का फार्म भरवाया था।

उन्हें उम्मीद थी कि मुख्यमंत्री के आदेश हैं तो उसे इस बार पेंशन मिल ही जाएगी लेकिन मामला वही ढाक के तीन पात रहा। पता नहीं फार्म कहां गया और पेंशन नहीं मिल पाई।

ऐसा सिर्फ आबिद के साथ ही नहीं हैं। मुख्यमंत्री के इस क्षेत्र में आने और पेंशन योजना को प्राथमिकता देने से गांधीनगर में उस दिन 50 लोगों की उम्मीदों को पर लग गए थे।

विभागों के बीच गुम हो गया फार्म

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मुख्यमंत्री खुद दिगंबरी देवी के घर गए थे लेकिन अफसरों को उसी वक्त आदेश दिया था कि क्षेत्र के सभी पात्रों को पेंशन पट्टे दिए जाएं। अफसरों ने घर-घर जाकर पात्रों को चिन्हित भी किया था और फार्म भरवाये थे।

यह वादा किया था कि बहुत जल्दी पेंशन पट्टा मिल जाएगा। बुधवार को यह संवाददाता आबिद के घर पहुंचा तो उन्होंने सिस्टम से मायूसी जाहिर की।

बोले-आधे धड़ से अपाहिज हुए चार साल हो गए। इस बार लगता था कि शायद पेंशन मिल जाएगी।

आबिद के अलावा इस क्षेत्र के गजराज, श्रीराम, लक्ष्मण पांडेय, धन सिंह, कमला देवी, सारा देवी, त्रिलोक चंद्र, अली हुसैन, चमेली देवी, महेश वर्मा आदि के फार्म भरवाये गए थे।

इनके फार्म तहसील और समाज कल्याण विभाग के बीच कहां गुम हो गए। पता नहीं है। समाज कल्याण विभाग के अफसर कहते हैं कि जो फार्म तहसील से आए उन्हें पट्टे दे दिए गए।

गांधीनगर से फार्म इकट्ठे करने वाले संग्रह अमीन विनोद शर्मा कहते हैं कि फार्म समाज कल्याण विभाग भेज दिए गए थे। प्रमख सचिव समाज कल्याण एस. राजू का कहना है कि जो पात्र थे उन्हें पेंशन दे दी गई।

दून अस्पताल में सफाई की बारी नहीं आई

inspection of harish rawat in dehradun

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कुर्सी संभालने के कुछ दिन बाद नौ फरवरी की रात दून अस्पताल और रेलवे स्टेशन का भी औचक निरीक्षण किया था। अव्यवस्थाओं से हैरान मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को हिदायत दी थी, लेकिन समय बीतने पर अधिकारियों ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए।

तब दून अस्पताल का यह था हाल
इमरजेंसी से सटे शौचालयों में न तो बिजली थी और न ही सफाई व्यवस्था। मुख्यमंत्री ने इस पर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों को सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए थे।

बुधवार को कुछ यूं दिखे हालात
मेडिकल कॉलेज के लिए बिल्डिंग की मरम्मत का काम चलने की वजह से इन शौचालयों को नए तरीके से बनाया जा रहा है।
फिलहाल इनकी जगह दूसरे शौचालयों का इस्तेमाल हो रहा है। हालांकि अस्पताल के इन शौचालयों में दोपहर के वक्त सफाई व्यवस्था औसत दर्जे की मिली। बच्चा वार्ड के समीप वाले शौचालय की दीवार पर बाहर की तरफ से सीलन और काई जमी पड़ी है।

बच्चा वार्ड के बाहर लगे कूलर से पानी खुले में फैला मिला। पानी में मच्छर पनपने और डेंगू जैसी बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। पानी की निकासी व्यवस्था करने के बजाय अस्पताल प्रशासन ने यहां पर डेंगू से बचाव की जानकारी देता बोर्ड लगा दिया है।

‘इमरजेंसी के समीप वाले शौचालय नए तरीके से बने हैं। मेडिकल कालेज की बिल्डिंग का काम चलने की वजह से अभी इनका इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है।’
- डॉ. आरएस असवाल, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक

सफाई-खुदाई तो हुई नहीं, गड्ढे हो गए

inspection of harish rawat in dehradun

मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कार्यभार ग्रहण करने के बाद 4 फरवरी को डालनवाला क्षेत्र में रिस्पना की स्थिति देखकर गंदगी हटाने और नदी की मुख्यधारा दुरुस्त रखने के लिए नदी के बीच जेसीबी लगाकर खुदाई करने के निर्देश दिए थे।

इसके साथ ही नदी किनारे पुश्ते लगवाने के लिए कहा था। इसके बाद प्रशासन ने नदियों को 14 किमी साफ करने की योजना बनाई। लेकिन बिंदाल में सिर्फ डेढ़ किमी काम हो पाया। रिस्पना में खुदाई के नाम पर गड्ढे करके रेत-बजरी निकाली जाने लगी। इसकी विधायक राजकुमार ने लिखित शिकायत भी की थी।

नदी में कचरा उसी तरह पड़ा रहा। बाद में अवैध रूप से रेत-बजरी निकाले जाने के मद्देनजर प्रशासन ने रिस्पना में काम बंद करवा दिया। नए स्थानों पर पुश्ते बनवाने का काम शुरू नहीं हो पाया।

जहां पहले पुस्ते बन गए थे, गिर गए। अभी भी नदियों में कचरा उसी तरह पड़ा हुआ है। नदियों का बेड उसी तरह उथला है।

रेलवे स्टेशन: गाड़ी आगे नहीं बढ़ी
मुख्यमंत्री बनने के कुछ समय बाद रावत ने अपने निरीक्षण में रेलवे स्टेशन पर फर्श पर बैठे यात्रियों के लिए बैठने की व्यवस्था करने और स्टेशन पर पार्किंग व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के निर्देश दिए थे। लेकिन ये दोनों काम अभी तक अधूरे हैं।

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