सात दिन में देनी थी MLA के सोना खरीद की रिपोर्ट, 8वें दिन पहुंचा आदेश
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नोटबंदी की घोषणा के बाद एक विधायक के सराफ के यहां से कथित रूप से करोड़ों का सोना खरीदने के आरोपों की जांच तो दूर, अभी तक एसआईटी ही अस्तित्व में नहीं आ पाई है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने मामले की जांच के आदेश देकर सात दिन में रिपोर्ट मांगी थी। लेकिन आदेश को डीआईजी ऑफिस तक पहुंचने में ही आठ दिन का वक्त लग गया। ऐसे में जांच किस गति से होगी, यह अंदाजा लगाना भी आसान है।
आठ नवंबर को एक हजार और पांच सौ के नोटों पर चलन से बाहर होने के बाद एक विधायक के करोड़ों का सोना खरीदने का मामला उछला था। तभी से आप, एनएसयूआई और अन्य सामाजिक संगठन के कार्यकर्ता मामले की जांच की मांग करते आ रहे हैं।
बीच-बीच में विधायक की ओर से सराफ के यहां सीसीटीवी कैमरे में छेड़छाड़ कराने की चर्चाएं भी होती रहीं। आप कार्यकर्ताओं की शिकायत पर आठ दिसंबर को मुख्यमंत्री हरीश रावत ने गढ़वाल रेंज के डीआईजी को जांच के आदेश देकर एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के लिए कहा था। जब जांच का आदेश हुआ तो आईजी संजय गुंज्याल पर रेंज का चार्ज था।
डीआईजी की अगुवाई में SIT को करनी है जांच
उनके स्थानांतरण के बाद डीआईजी पुष्पक ज्योति पर कमान आ गई। डीआईजी की अगुवाई में एसआईटी को पुराने नोटों से सोना बदलने के आरोपों की जांच करनी है। एसआईटी में अभिसूचना के एसपी को शामिल किया जाना है। जांच रिपोर्ट तो सात दिन में दी जानी थी, लेकिन आदेश को डीआईजी ऑफिस पहुंचने में ही आठ दिन का वक्त लग गया।
एसआईटी जांच का आदेश शुक्रवार को डीआईजी ऑफिस पहुंचा। शनिवार को भी एसआईटी गठन पर चर्चा नहीं हुई। रविवार को अवकाश होने के कारण अब सोमवार को ही कोई फैसला हो सकता है।
एक विधायक पर नोटबंदी से जुड़े आरोपों की जांच का आदेश शुक्रवार को मिला है। एसआईटी जल्द ही अपनी जांच शुरू कर देगी। सराफ के यहां से फुटेज लेने के साथ संबंधित लोगों के बयान दर्ज कराए जाएंगे।
-पुष्पक ज्योति, डीआईजी