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नॉन ग्लेशियर हो रही नदियों को बचाने का प्रयास

Fri, 06 Jan 2017 11:20 AM IST
कैलाश पाठक / अमर उजाला, हल्द्वानी
कैलाश पाठक / अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Fri, 06 Jan 2017 11:20 AM IST
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initiative for save non glacier rivers
glaciers - फोटो : Getty Images

हिमालयी क्षेत्र से निकलने वाली कई नदियां नॉन ग्लेशियर होने से इनका जलस्तर कम होता जा रहा है। नदियों के गिरते जलस्तर पर पर्यावरणविदें के चिंता जताने के बाद सिंचाई विभाग के आला अफसरों की देहरादून में विशेषज्ञों के साथ बैठक में नदियों को रिचार्ज करने की वृहद योजना तैयार की गई है। इसके तहत कई स्थानों पर काम भी शुरू हो गया है।

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सिंचाई विभाग के मुख्य अभियंता डीसी सिंह के मुताबिक ग्लोबल वार्मिंग के कारण कुमाऊं के सरयू और रामगंगा वेस्ट आदि नदियां नॉन ग्लेशियर हो चुकी हैं। चौखुटिया से निकलने वाली रामगंगा ईस्ट भी नॉन ग्लेशियर होने की स्थिति में है। पर्यावरणविदें ने नॉन ग्लेशियर होती नदियों के जलस्तर पर चिंता जताई है।
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नॉन ग्लेशियर होती नदियों को रिचार्ज करने के उद्देश्य से हाल के दिनों में देहरादून में सिंचाई महकमे के उच्चाधिकारियों और विशेषज्ञों की कार्यशाला हुई। निर्णय लिया गया कि नॉन ग्लेशियर होती नदियों को रिचार्ज करने के लिए वृहद योजना तैयार की जाए। इसके तहत विभाग ने नदियों को रिचार्ज करने की नई योजना तैयार की, जिसमें चेकडैम बनाने, कैचमेंट एरिया में छोटे-छोटे तालाब बनाने, नए चाल-खाल विकसित करने, तालाबों का रिनोवेशन करने की योजना है।
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इसके तहत कुमाऊं के विभिन्न इलाकों में सिंचाई विभाग ने काम भी शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि कई नदियों का पानी इतना कम हो गया है कि वह नाले सी बन चुकी हैं। अब नॉन ग्लेशियर होती नदियों के स्रोत पर जाकर काम करने की योजना है। इसके तहत चेक डैम बनाने का काम शुरू किया गया है। छोटी-छोटी खाई खोदकर उनमें पानी भरा जा रहा है।

नदियों के आसपास बड़े होल बनाए जा रहे हैं। चाल-खाल बनाए जा रहे हैं। छोटे-छोटे गधेरों में ट्रंच चेकडैम बनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस तरह से पहाड़ों में पानी भरता रहेगा तो नदियां रिचार्ज हो सकेंगी। हाल में अल्मोड़ा में कोसी नदी पर चेकडैम बनाया गया है।


ओखलकांडा में हरीशताल का रिनोवेशन कर बड़ी झील बनाई जा रही है। पिथौरागढ़ में रई झील, लोहाघाट में कोलीढेक झील, बागेश्वर में बैजनाथ झील का निर्माण कर उन्हें भी बड़े तालाबों में तब्दील करने की योजना है। नदियों के स्रोत पर भी काम करने की योजना है।

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