{"_id":"601d9c8d8ebc3e4c885400ee","slug":"initiative-done-by-doon-to-save-sea-cow-dehradun-news-drn369908115","type":"story","status":"publish","title_hn":"समुद्री गाय को बचाने के लिए दून से हुई पहल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
समुद्री गाय को बचाने के लिए दून से हुई पहल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देहरादून। शिकार और पर्यावरण में आ रहे बदलाव के चलते विलुप्त हो रही समुद्री गाय (डुगोंग) को बचाने को देहरादून से मुहिम की शुरुआत हुई है। डुगोंग के संरक्षण के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों की कई टीमें जुट गई हैं। केंद्रीय वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की पहल पर भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों की टीमें डुगोंग के संरक्षण के लिए तमाम योजनाएं बना रही हैं। साथ ही भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के साथ ही मछुआरों की भी मदद ली जा रही है।
भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक देश दुनिया में समुद्री गायों के अत्यधिक शिकार के चलते इनके विलुप्त होने का खतरा खड़ा हो गया। आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में अब सिर्फ 250 समुद्री गाय ही बची हैं। यह गुजरात, तमिलनाडु और अंडमान निकोबार के समुद्री क्षेत्र में पाई जाती हैं। समुद्री गायों का शिकार रोकने के लिए तटीय इलाकों के लोगों और मछुआरों को जागरूक भी किया जा रहा है।
चार में से अब सिर्फ एक प्रजाति बची
भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक समुद्री गाय की चार प्रजातियां पाई जाती थीं। समुद्री गाय चार करोड़ 20 लाख साल से समुद्र में रह रही थी। इनमें से तीन प्रजातियां 18वीं शताब्दी से पहले ही विलुप्त हो गईं। अब एक ही प्रजाति बची हुई है। समुद्री गाय का वजन औसतन 400 किलोग्राम होता है और इसकी लंबाई औसतन ढाई मीटर होती है। इसकी औसत आयु 70 साल होती है। इनका शरीर बेलनाकार होता है। इसके आगे के फिन पेडल की तरह काम करते हैं और पंख डॉल्फिन की तरह होते हैं। समुद्री गाय पूरी तरह शाकाहारी होती है और समुद्र में पाई जाने वाली समुद्री घास पर ही आश्रित रहती है। इसके संरक्षण के लिए हर साल 29 मई को वर्ल्ड डुगोंग डे मनाया जाता है।
विज्ञापन
-------------------
देश दुनिया में तेजी से विलुप्त होकर ही समुद्री गायों डुगोंग को संरक्षित करने को लेकर योजना बनाई गई है। डुगोंग को चिह्नित करने के लिए भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के साथ ही मछुआरों की मदद ली जा रही है। डुगोंग का शिकार ना हो इसके लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। फिलहाल गुजरात, तमिलनाडु और अंडमान निकोबार में ही 250 समुद्री गाय बची हुई हैं। अगले 10 साल में इनकी संख्या 500 तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
-डा. के शिवकुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक, भारतीय वन्यजीव संस्थान।
विज्ञापन
भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक देश दुनिया में समुद्री गायों के अत्यधिक शिकार के चलते इनके विलुप्त होने का खतरा खड़ा हो गया। आंकड़ों पर नजर डालें तो भारत में अब सिर्फ 250 समुद्री गाय ही बची हैं। यह गुजरात, तमिलनाडु और अंडमान निकोबार के समुद्री क्षेत्र में पाई जाती हैं। समुद्री गायों का शिकार रोकने के लिए तटीय इलाकों के लोगों और मछुआरों को जागरूक भी किया जा रहा है।
विज्ञापन
चार में से अब सिर्फ एक प्रजाति बची
भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिकों के मुताबिक समुद्री गाय की चार प्रजातियां पाई जाती थीं। समुद्री गाय चार करोड़ 20 लाख साल से समुद्र में रह रही थी। इनमें से तीन प्रजातियां 18वीं शताब्दी से पहले ही विलुप्त हो गईं। अब एक ही प्रजाति बची हुई है। समुद्री गाय का वजन औसतन 400 किलोग्राम होता है और इसकी लंबाई औसतन ढाई मीटर होती है। इसकी औसत आयु 70 साल होती है। इनका शरीर बेलनाकार होता है। इसके आगे के फिन पेडल की तरह काम करते हैं और पंख डॉल्फिन की तरह होते हैं। समुद्री गाय पूरी तरह शाकाहारी होती है और समुद्र में पाई जाने वाली समुद्री घास पर ही आश्रित रहती है। इसके संरक्षण के लिए हर साल 29 मई को वर्ल्ड डुगोंग डे मनाया जाता है।
विज्ञापन
-------------------
देश दुनिया में तेजी से विलुप्त होकर ही समुद्री गायों डुगोंग को संरक्षित करने को लेकर योजना बनाई गई है। डुगोंग को चिह्नित करने के लिए भारतीय नौसेना और तटरक्षक बल के साथ ही मछुआरों की मदद ली जा रही है। डुगोंग का शिकार ना हो इसके लिए व्यापक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। फिलहाल गुजरात, तमिलनाडु और अंडमान निकोबार में ही 250 समुद्री गाय बची हुई हैं। अगले 10 साल में इनकी संख्या 500 तक पहुंचाने का लक्ष्य है।
-डा. के शिवकुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक, भारतीय वन्यजीव संस्थान।