उत्तराखंडः सूचना आयोग का आदेश, प्रमुख सचिव हाजिर हों
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विजिलेंस की सूचना देने से इनकार करने के मामले में राज्य सूचना आयोग ने प्रमुख सचिव, सुराज, भ्रष्टाचार उन्मूलन एवं जनसेवा (सतर्कता) को व्यक्तिगत रूप से प्रस्तुत होकर विभागीय पक्ष रखने को कहा है। आयोग ने ये आदेश अपीलकर्ता की गुहार पर जारी किए हैं। अपील की अगली सुनवाई आठ अगस्त को रखी गई है।
अपीलकर्ता चंद्रशेखर करगेती ने 22 जनवरी 2017 को सुराज, भ्रष्टाचार उन्मूलन एवं जनसेवा (सतर्कता) के लोक सूचना अधिकारी से छह बिंदुओं पर सूचना मांगी थी, लेकिन विभाग ने सूचना देने से यह कहकर इनकार कर दिया कि विजिलेंस विभाग सूचना का अधिकार अधिनियम के दायरे में नहीं आता।
इस संबंध में प्रमुख सचिव द्वारा जारी एक शासनादेश का हवाला दिया गया। बाद में आवेदक की अपील पर राज्य सूचना आयोग ने लोक सूचना अधिकारी को सूचना देने के आदेश दिए थे।
साथ ही आयोग के तर्क को यह कहकर खारिज किया था कि सूचना का अधिकार अधिनियम की भावना भ्रष्टाचार मुक्त और पारदर्शी शासकीय व्यवस्था को कायम रखने की है, इसलिए विजिलेंस की सूचना उसके दायरे में आती है।
दूसरी अपील पर अपीलकर्ता ने मामले को अत्यंत महत्वपूर्ण बताते हुए प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से आयोग में आहूत करने का अनुरोध किया। राज्य सूचना आयुक्त राजेंद्र कोटियाल ने प्रमुख सचिव को व्यक्तिगत रूप से आयोग में आकर वस्तु विशेष के संबंध में अवगत कराने को कहा। साथ ही उन्होंने दोनों पक्षों की सहमति पर अपील की पत्रावली राज्य सूचना आयुक्त एसएस रावत की पीठ को अंतरित कर दी।
यह सूचना मांगी थी
आवेदक ने सुराज भ्रष्टाचार उन्मूलन एवं जनसेवा विभाग से वर्ष 2013 में विभाग के तत्कालीन सचिव द्वारा जारी पत्र और उस पर शासन की कार्रवाई से जुड़ी पत्रावली मांगी। इस पत्र के संदर्भ समाज कल्याण विभाग की कार्रवाई के बाद विजिलेंस विभाग के एक्शन का ब्योरा मांगा। साथ ही विभाग के लोक सूचना अधिकारी व अपील अधिकारी नाम, पते व फोन नंबर मांगे थे।