देहरादून: बालिका निकेतन में फैला संक्रमण, नारी निकेतन में फिर खुली व्यवस्थाओं की पोल
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नारी निकेतन में संवासिनियों के बीमार होने के बाद अब बालिका निकेतन में संक्रमण फैल गया है। एक बालिका को कोरोनेशन अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 13 अन्य बालिकाएं भी संक्रमण की जद में हैं। मामले की जानकारी मिलने के बाद बुधवार को राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने बालिका निकेतन का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने बालिका निकेतन और शिशु निकेतन में बड़े स्तर पर अनियमितताएं पकड़ीं। गंदगी पर कर्मचारियों को जमकर फटकार भी लगाई। अब बृहस्पतिवार को बाल आयोग की टीम बालिका के स्वास्थ्य की जानकारी के लिए कोरोनेशन अस्पताल का दौरा करेगी।
बुधवार को आयोग की अध्यक्ष ऊषा नेगी ने शिशु निकेतन व बालिका निकेतन का निरीक्षण किया। उन्होंने बालिका निकेतन की अधीक्षिका मीना सिंह व जिला प्रोबेशन अधिकारी मीना बिष्ट से व्यवस्थाओं की जानकारी ली। बालिका निकेतन में गंदगी देख अध्यक्ष भड़क गईं। उन्होंने सफाई व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए। साथ ही नारी निकेतन में रह रही मानसिक रूप से अस्वस्थ चार बालिकाओं को तत्काल बालिका निकेतन में वापस शिफ्ट करने के निर्देश दिए। उनका इलाज भी यहीं कराने को कहा।
उधर, शिशु निकेतन में निराश्रित पांच से आठ साल के 13 बच्चों को दत्तक ग्रहण एजेंसी (कारा) के माध्यम से गोद दिलवाने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश भी दिए। दो बालक जो पोलियो ग्रस्त हैं, उनकी आयोग को पूर्ण जानकारी मुहैया कराने को कहा, ताकि आयोग उनका इलाज करा सके। आयोग ने अभी तक गोद दिए गए 25 बालक-बालिकाओं की भी जानकारी मांगी है। आयोग की अध्यक्ष बृहस्पतिवार को कोरोनेशन अस्पताल में बालिका से मुलाकात करेंगी। उन्होंने कहा कि अगर इसमें अधिकारियों की लापरवाही सामने आई तो कार्रवाई की संस्तुति की जाएगी।
26 जुलाई को बाल कल्याण समिति ने किया था निरीक्षण
बाल कल्याण समिति ने 26 जुलाई को निरीक्षण किया था। जिसमें केदारपुरम स्थित शिशु निकेतन में सभी बच्चे संक्रमण के शिकार पाए गए थे। इस सदन में 33 बच्चे हैं। बच्चों के सिर से लेकर पूरे शरीर में दाने निकले हुए हैं। इन बच्चों का मुंडन करवा रखा है। एक बच्चे के पैर और एक बच्ची के होठ में चोट से सूजन थी। इस पर समिति ने व्यवस्थाओं को सुधारने के भी निर्देश दिए थे लेकिन व्यवस्था ज्यों की त्यों रही। इसकी का नतीजा है कि ज्यादा संक्रमण के चलते रविवार को कोरोनेशन अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती कराया गया था।
नारी निकेतन में फिर खुली व्यवस्थाओं की पोल
नारी निकेतन के बाहर लगा कूड़ेदान बीमारियों की सबसे बड़ी वजह बन गया हैं। पिछले दिनों 28 संवासिनियों की तबीयत खराब के बाद भी निकेतन के अफसर चेते नहीं है। बुधवार को नारी निकेतन का निरीक्षण करने पहुंचीं बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष कविता शर्मा ने कहा कि कूड़ेदान के कारण निकेतन में संक्रामक बीमारियां फेल रही हैं। निरीक्षण में कई और खामियां भी सामने आई हैं। इस संबंध में रिपोर्ट डीएम को सौंपी जाएगी।
नारी निकेतन की जिम्मेदारी संभाल रहा जिला प्रोबेशन विभाग व्यवस्थाओं में सुधार लाने के तमाम दावे करता लेकिन कुछ समय बाद कोई न कोई लापरवाही उजागर हो जाती है। नारी निकेतन में बीमार हुईं 28 संवासिनियों ने फिर से लापरवाही को उजागर कर दिया है। बता दें कि नारी निकेतन की देखभाल और व्यवस्थाओं की जिम्मेदारी महिला आयोग पर होती है, लेकिन आयोग में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष का पद लंबे समय से खाली है। ऐसे में आयोग में महिलाओं से जुड़े मामले लंबित हैं। उधर बृहस्पतिवार को बाल संरक्षण आयोग की सचिव कामिनी गुप्ता नारी निके तन का निरीक्षण करने जाएंगी।
अध्यक्ष की अनुमति के बिना गोद दिए जा रहे
बाल कल्याण विभाग के अध्यक्ष और अधिकारियों में आपसी तालमेल नहीं है। विभागीय सूत्रों का कहना है कि विभाग से जब किसी को बच्चा गोद दिया जाता है तो अधिकांश मामलों में अध्यक्ष को विश्वास में नहीं लिया जाता है। वहीं बालश्रम करते पकड़े गए बच्चों को रिलीज करते वक्त भी कई बार सदस्य उनकी अनुमति नहीं लेते हैं।
स्वास्थ्य विभाग से भी ठनी
बाल कल्याण विभाग और स्वास्थ्य विभाग में ठनी हुई है। विभाग की ओर से अध्यक्ष के निर्देश पर बच्चों को मेडिकल जांच के लिए भेजा जाता है। बताया गया है कि सीएमओ कार्यालय से इस पर भी संज्ञान नहीं लिया जाता है।
बाल कल्याण समिति ने भी उठाए थे सवाल
बालिका एवं शिशु निकेतन की व्यवस्थाओं पर बाल कल्याण समिति ने भी कुछ समय पूर्व सवाल उठाए थे। समिति की ओर से नेहरू कॉलोनी थाने को भेजी गई रिपोर्ट में गोपनीय जांच करने को कहा था। इसमें समिति ने कहा था कि इन बिंदुओं पर जांच करना जरूरी है कि निकेतन से विद्यालय आते जाते हुए ये लड़कियां किन किन लोगों के संपर्क में आती हैं? क्या कोई मानव तस्करी का गिरोह तो बालिका निकेतन में सक्रिय नहीं है?
पहले भी उजागर हुए लापरवाही के मामले
नारी निकेतन में लापरवाही का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी संवासिनी के साथ दुष्कर्म व गर्भपात, पांच संवासिनियों का नारी निकेतन से भागने का प्रकरण, नारी एवं बाल गृह में बच्चों के साथ उत्पीड़न जैसे मामले सामने आ चुके हैं। हमेशा ही यहां की व्यवस्थाओं पर सवाल उठते रहे हैं। हर बार प्रशासन और सरकार व्यवस्थाओं में सुधार के दावे करते हैं, लेकिन कुछ समय बाद फिर से कोई न कोई खामी उजागर हो जाती है।
लड़कियों का होता है शोषण
पांच लड़कियों के फरार होने के बाद बाल आयोग की सदस्य शारदा त्रिपाठी ने बालिका निकेतन का निरीक्षण किया था। निरीक्षण के बाद उन्होंने बताया था कि बालिका निकेतन में लड़कियों का शोषण होता है। उनके साथ अभद्र व्यवहार किया जाता है। साथ ही लड़कियों को जो भी संस्था या समितियों की ओर से दान में सामान मिलता है उसे भी छीन लिया जाता है।
संवासिनियों की हालत में सुधार
दून अस्पताल में भर्ती नारी निकेतन की संवासिनियों की हालत में सुधार बताया गया है। अस्पताल में एक वरिष्ठ फिजिशियन की देखरेख में उनका उपचार चल रहा है। नारी निकेतन में चार संवासिनियों की हालत बिगड़ने पर शनिवार को दून अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मंगलवार को उनकी पैथोलॉजी जांचें कराईं गईं थीं। जिनमें दो को टाइफाइड और दो को वायरल बुखार होने की पुष्टि हुई थी। अस्पताल के सीएमएस डॉ. केके टम्टा ने बताया कि फिजिशियन डॉ जैनेंद्र की देखरेख में संवासिनियों का इलाज चल रहा है। अब उनकी हालत में सुधार है। संवासिनियों की मेडिकल रिपोर्ट रोजाना सीएमओ को भेजी जा रही है।