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उत्तराखंड से पलायन कर रहे हैं उद्योग

Sun, 20 Dec 2015 01:54 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 20 Dec 2015 01:54 PM IST
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industry migrating from uttarakhand.

नए पूंजी निवेश को पाने की दौड़ में जुटे उत्तराखंड के लिए अब खतरे की घंटी भी बज रही है।

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कुछ मामलों में पिछड़ने के चलते प्रदेश के कुछ उद्योग राज्य से पलायन करने की तैयारी कर रहे हैं। यह स्थिति एमएसएमई सेक्टर में अधिक है। यह साफ है कि अगर हालात नहीं बदले तो प्रदेश से पलायन करने वाले उद्योगों की संख्या में इजाफा होगा।

राष्ट्रीय स्तर पर ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में उत्तराखंड का नंबर 23वां था। इस रेटिंग के छह माह बाद भी स्थिति में बहुत सुधार नहीं आया है। उद्यमियों की मानें तो वाणिज्य कर, उद्योग विभाग ने बेहतर काम किया पर श्रम, ऊर्जा, शहरी विकास जैसे विभाग हैं जो नकारात्मक रवैया छोड़ने को तैयार नहीं हैं।
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श्रम विभाग को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के तहत करीब 136 सुधार करने हैं। हाल यह है कि विभाग ने अभी तक एक भी सुधार को अमली जामा नहीं पहनाया है। इसी तरह कटौती मुक्त बिजली की सप्लाई उद्योगों के लिए सपना बनी हुई है। सेलाकुई के एक ऐसे ही उद्योगपति के मुताबिक उनके उद्योग में अगर एक सेकेंड के लिए भी बिजली ट्रिप होती है तो पांच घंटे की प्रोसेस को दोबारा शुरू करना होता है।
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हाल यह है कि सेलाकुई को अलग से विद्युत लाइन दी गई है पर फिर भी बिजली बार-बार ट्रिप होती है। ऐसी स्थिति में उद्योग के सामने अब किसी दूसरे राज्य की ओर रुख करने के अलावा और कोई विकल्प नहीं बचा है।

पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स के मुताबिक यह परेशानी प्रोसेस इंडस्ट्री के सामने अधिक है। सरकार को चाहिए कि जो वादा किया है, उसे पूरा जरूर करें। परेशानी की दूसरी वजह भी है। विशेष औद्योगिक पैकेज 2010 में समाप्त हो गया था। इस पैकेज के तहत रियायत अधिकतम उद्योगों को 2020 तक मिल सकती है।

फार्मा इसका सबसे बड़ा सेक्टर है। ऐसे में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में अगर सुधार नहीं होता तो ये उद्योग भी बाहर की ओर रुख कर सकते हैं। हिमाचल इनके आकर्षण का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है।

क्या कर रही है सरकार
मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने अभी हाल ही में बैठक कर नियमित रूप से समीक्षा करने की हिदायत दी। मुख्य सचिव ने श्रम विभाग को सुधार में तेजी लाने को कहा। सिंगल विंडो सिस्टम में काम को तेज किए जाने की कोशिश है। जिला उद्योग मित्र की बैठकें हो रही हैं पर राज्य उद्योग मित्र की बैठक लंबे समय से नहीं हुईं।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस में 23वें नंबर पर आना जाहिर कर रहा है कि राज्य की स्थिति क्या है। कई उद्योग यह कह रहे हैं कि इससे बेहतर राज्य से बाहर का रूख करना ही ठीक है। समस्याएं हर जगह हैं पर समस्याओं का समय से निस्तारण होना जरूरी है। हमारे राज्य में यह समस्या तो है ही।

- अनिल तनेजा, पीएचडी चैंबर ऑफ कामर्स, उत्तराखंड

हालात इतने भी बुरे नहीं हैं। समस्याओं का समाधान भी हो रहा है। पर, कुछ विभागों के नकारा रवैया सब को नुकसान पहुंचा रहा है। श्रम विभाग सुधार करने को तैयार नहीं है। शहरी विकास विभाग कई तरह की अड़चन खड़ी करता है। बिजली विभाग मानता है कि उद्यमी उसके पास आएं। आज जब एसएमएस से पल-पल की जानकारी दी जा सकती है तो ये विभाग स्मार्ट क्यों नहीं बनते।
- पंकज गुप्ता, अध्यक्ष, इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड

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