{"_id":"68a38fcea9f02f2d7500830d","slug":"indramani-badoni-remembered-vikas-nagar-news-c-5-1-drn1013-767022-2025-08-19","type":"story","status":"publish","title_hn":"Dehradun News: उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रणेता इंद्रमणि बडोनी को किया याद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Dehradun News: उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रणेता इंद्रमणि बडोनी को किया याद
विज्ञापन
इंद्रमणि बडोनी की पुण्यतिथि के अवसर पर उत्तराखंड स्वाभिमान मोर्चा के पदाधिकारीयों उनकी प्रतिमा
- फोटो : samvad
उत्तराखंड क्रांति दल की पछवादून इकाई की ओर से डाकपत्थर रोड स्थित कार्यालय में उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रणेता इंद्रमणि बडोनी की 25वीं पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। इस दौरान उक्रांद के नेताओं ने बड़ोनी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए उनके व्यक्तित्व से प्रेरणा लेने की बात कही।
श्रद्धांजलि सभा में उक्रांद के केंद्रीय संरक्षक सुरेंद्र कुकरेती ने कहा कि इंद्रमणि बडोनी का जीवन आंदोलनों के नाम रहा। उन्होंने राज्य आंदोलन की शुरुआत की। इसके पहले भी वह आम जनमानस की आवाज बुलंद करते रहे। उन्होंने 1970 से जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और अस्मिता की रक्षा को जीवन साधना बना लिया था। उन्होंने उत्तराखंड की अस्मिता को बचाने के लिए शराब विरोध, वन आंदोलन, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और जन-नाट्य मंचों के माध्यम से आम जनता में चेतना का संचार किया। वह केवल एक आंदोलनकारी नहीं बल्कि उत्तराखंड की आत्मा की आवाज थे। कार्यक्रम के दौरान उक्रांद कार्यकर्ताओं को राज्य के जल, जंगल, जमीन व मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन करने का संकल्प दिलाया गया। सभा में उक्रांद के जिलाध्यक्ष गणेश प्रसाद काला, भूपेंद्र सिंह नेगी, नरेंद्र कुकरेती, बीना पंवार, अमजद अली, पूर्ण प्रसाद भट्ट, भूपेंद्र बिष्ट, अमर देव जोशी, सुनीता चमोली, शांति डंगवाल, कमला घिल्डियाल, चंद्र मोहन भट्ट, मदनलाल पाल आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन
श्रद्धांजलि सभा में उक्रांद के केंद्रीय संरक्षक सुरेंद्र कुकरेती ने कहा कि इंद्रमणि बडोनी का जीवन आंदोलनों के नाम रहा। उन्होंने राज्य आंदोलन की शुरुआत की। इसके पहले भी वह आम जनमानस की आवाज बुलंद करते रहे। उन्होंने 1970 से जल, जंगल, जमीन, संस्कृति और अस्मिता की रक्षा को जीवन साधना बना लिया था। उन्होंने उत्तराखंड की अस्मिता को बचाने के लिए शराब विरोध, वन आंदोलन, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और जन-नाट्य मंचों के माध्यम से आम जनता में चेतना का संचार किया। वह केवल एक आंदोलनकारी नहीं बल्कि उत्तराखंड की आत्मा की आवाज थे। कार्यक्रम के दौरान उक्रांद कार्यकर्ताओं को राज्य के जल, जंगल, जमीन व मूल निवासियों के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन करने का संकल्प दिलाया गया। सभा में उक्रांद के जिलाध्यक्ष गणेश प्रसाद काला, भूपेंद्र सिंह नेगी, नरेंद्र कुकरेती, बीना पंवार, अमजद अली, पूर्ण प्रसाद भट्ट, भूपेंद्र बिष्ट, अमर देव जोशी, सुनीता चमोली, शांति डंगवाल, कमला घिल्डियाल, चंद्र मोहन भट्ट, मदनलाल पाल आदि उपस्थित रहे।
विज्ञापन