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रावत सरकार को बदमानी से बचाएंगी इंदिरा हृदयेश
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 15 Jul 2014 09:52 AM IST
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खनन को लेकर लगातार ढिलाई के आरोपों में घिरी उत्तराखंड सरकार अब इस मुद्दे पर अपनी बदनामी दूर करना चाहती है।
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प्रदेश में नासूर बन चुके अवैध खनन पर मोर्चा संभाला है हरीश रावत की गैरहाजिरी में सरकार का कामकाज देख रहीं वरिष्ठ मंत्री इंदिरा हृदयेश ने।
कड़े कदम उठाए जाने की सिफारिश
उन्होंने सोमवार को इस बाबत मुख्यमंत्री हरीश रावत से बात की। उन्होंने सीएम से नदियों की सफाई के बहाने हो रहे अवैध खनन की शिकायतों के साथ डीएफओ प्रकरण का हवाला देते हुए इस बाबत कड़े कदम उठाए जाने की सिफारिश की है।
उन्होंने अवैध खनन पर अंकुश के लिए मानीटरिंग का जिम्मा सिंचाई विभाग को दिए जाने का सुझाव भी रखा है। इंदिरा हृदयेश ने कहा कि अवैध कारोबार को रोकना है तो खनन का हिसाब-किताब रखना होगा।
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इसके लिए अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी। मुख्यमंत्री ने भी खनन के खेल पर कड़ा रुख अपनाते हुए सख्ती के निर्देश दिए हैं। अवैध खनन पर रोक लगाने में हरिद्वार जिला प्रशासन व पुलिस पूरी तरह विफल रहे हैं।
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एंटी माइनिंग फोर्स का खौफ भी माफिया में नहीं रहा। सोमवार को इस मसले पर वरिष्ठ मंत्री और सरकार का काम देख रही इंदिरा हृदयेश ने मुख्यमंत्री से बात की और उन्हें स्थिति से अवगत कराया।
इंदिरा हृदयेश ने सीएम से यह भी कहा कि जिला प्र्रशासन, पुलिस व एंटी माइनिंग फोर्स भी अवैध खनन पर अंकुश लगा पाने में नाकाम है।
उन्होंने बेखौफ खनन माफिया के चलते डीएफओ के छुट्टी पर जाने की जानकारी भी सीएम को दी। मुख्यमंत्री ने इंदिरा से कहा है कि अवैध खनन को सख्ती से रोका जाएगा।
नेता जी ने लिया खनन माफिया की सुरक्षा का ठेका
हरिद्वार जिले में खनन माफिया यूं ही बेखौफ नहीं हैं। उनकी सुरक्षा का बाकायदा एक पूर्व विधायक ने ठेका लिया हुआ है। ठेका भी ऐसा-वैसा नहीं। एक रात के पांच लाख रुपए। हिसाब सीधा है। डेढ़ करोड़ रुपए महीना।
जबकि ठेकेदार इससे कई गुना ज्यादा कमा रहा है। अवैध खनन पर प्रति कुंतल आठ रुपये का सिक्योरिटी टैक्स फिक्स है। यह टैक्स कोई और नहीं बल्कि चोरी का माल खरीदने वाले स्टोन क्रशर ही वसूलकर ठेकेदार को देते हैं।
पड़ताल में चौंकाने वाला सच आया सामने
जिले में अवैध खनन का धंधा क्यों बंद नहीं होता है। पुलिस और प्रशासनिक मशीनरी असहाय महसूस क्यों कर रही है।
ऐसे ही सवालों के जवाब तलाशने के लिए अमर उजाला ने अवैध खनन के धंधे की तह तक पड़ताल की। जिसमें चौंकाने वाला सच सामने आया।
अवैध खनन के धंधे के तार ऊपर तक जुड़े हुए हैं। जो लोग इस धंधे में मलाई चाट रहे हैं, उन पर हाथ डालना जिला स्तर के अधिकारियों के लिए भी आसान नहीं हैं। जिले के अवैध खनन का धंधा एक पूर्व विधायक के इर्द-गिर्द सिमटा हुआ है।
सूत्रों का कहना है कि पूर्व विधायक को प्रतिदिन के हिसाब से पांच लाख रुपए जाते हैं। यह काम स्थानीय लोगों का एक समूह करता है। इसके बाद स्थानीय गुर्गे कितना कमाते हैं, इसका कोई हिसाब नहीं हैं।
लोग तो यहां तक बताते हैं कि एक रात में पांच लाख रुपए देकर करीब 60 लाख रुपए का अवैध खनन किया जाता है और ठेकेदार खनन माफिया 20-25 लाख रुपए कमाता है।