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उत्तराखंड बजट 2016: चालीस हजार करोड़ से घोला चुनावी रंग

Sat, 12 Mar 2016 01:47 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 12 Mar 2016 01:47 AM IST
सार

इंदिरा हृदयेश ने पेश क‌िया लगातार पांचवा बजट।
हर वर्ग को छूने की कोशिश की।
बजट में हर वर्ग को छूने की कोश‌िश।
राज्य कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के नाम पर लुभाने की कोशिश।

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indira hridayesh presents 40 thousands budget.
इंद‌िरा हृदयेश - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शुक्रवार को वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश ने 2016-17 के करीब 40 हजार करोड़ के राज्य बजट में होली की धमक के बीच चुनावी रंग घोल दिया। लगातार पांचवा बजट पेश करने वाली इंदिरा हृदयेश ने गांव, गरीब, गुजर-बसर का जिक्र कर हर वर्ग को छूने की कोशिश की।
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महज 25 करोड़ के सरप्लस रेवेन्यू और राज्य की कमाई को बढ़ाने की चिंता से कोसों दूर कोई नया कर प्रस्तावित नहीं किया। अधिकतर मामलों में जारी योजनाओं पर भरोसा जताया और पिछड़े, गरीब, किसान वर्ग के लिए छोटी-छोटी, लेकिन थोक के भाव घोषणाएं कीं। राज्य कर्मचारियों के बड़े वर्ग को सातवें वेतन आयोग के नाम पर तो शिक्षकों को गुरुजी के नाम पर लुभाने की कोशिश की गई है।
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सदन में इंदिरा हृदयेश ने करीब दो घंटे 20 मिनट में अपना बजट भाषण पूरा किया। गरीब, गांव, गन्ना-गुड़, गाय-गौशाला-गौचर, गंगा, गाड़-गदेरे, गहत-गलगल का जिक्र कर इंदिरा ने साफ इशारा कर दिया कि बजट में थोड़ा-थोड़ा ही सही, पर सब कुछ समेटने की चिंता है।
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राजकोषीय घाटा बढ़कर 60.72.97 करोड़ पहुंचा

indira hridayesh presents 40 thousands budget.
बजट में महिलाओं का खास ध्यान रखा गया है। - फोटो : AmarUjala

योजनाओं के बजट में इजाफा करते हुए सरकार ने 15931.60 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। पिछले बजट में इसके लिए 12883 करोड़ रुकी व्यवस्था थी। प्रदेश सरकार का राजकोषीय घाटा 4749.07 करोड़ से बढ़कर 6072.97 करोड़ पहुंच गया है। केंद्र ने इस बार लीक से हटकर ग्रामीण भारत का बजट पेश किया था।

इसी लीक पर चलते हुए इंदिरा हृदयेश ने भी व्यापारी, नौकरी पेशा मध्य वर्ग, कामकाजी महिला को बजट से दूरही रखा। बजट में कोई नया कर प्रस्तावित नहीं किया गया। करों में छूट की उम्मीद कर रहे व्यापारी वर्ग को वित्त मंत्री ने पूरी तरह से मायूस किया।

ग्रामीण उत्तराखंड के लिए थोक के भाव घोषणाएं की गईं। औषध पादपों के पांच उपकेंद्र, प्याज, अदरक के सौ कलस्टर, छह प्रसंस्करण इकाइयों को स्थापित करने, पंचायतों के लिए अलग से आयोग गठित करने सहित कई और योजनाओं के जरिये गांव के मतदाता को संभालने की कोशिश की गई।

बजट में थोड़ा-थोड़ा हर वर्ग को छूने की कोशिश

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सदन में बजट पढ़ती वित्त मंत्री इंदिरा हृदयेश। - फोटो : AmarUjala

बजट में विशेष वर्ग के लिए कई छात्रवृत्तियों, ओल्ड एज पार्क, मलिन बस्तियों को नियमित करना आदि के जरिये समाज के हाशिये के वर्ग की सुध लेने की चिंता की गई तो अवस्थापना विकास के लिए मेक इन इंडिया के तहत उद्योग स्थापित करने, कई शहरों में बस अड्डों का निर्माण, मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना की घोषणा कर आलोचकों को जवाब देने की घोषणा की गई। उद्योगों को 24 घंटे बिजली देने का वादा वित्त मंत्री ने किया। इसके साथ ही युवाओं को ग्रामीण संवर्द्धन योजना, कौशल विकास योजना आदि के जरिये लुभाने की कोशिश की।

महिलाओं के लिए कई येाजनाओं का जिक्र बजट भाषण में किया। राज्य कर्मचारियों को सातवें वेतन आयोग के नाम पर लुभाया और शिक्षकों की भारी फौज को वित्त मंत्री ने गुरुजी बताया। विजटिंग अध्यापकों की नियुक्ति, जारी योजनाओं के लिए बजट प्रावधान करने पर भरोसा किया। पूर्व सैनिकों का एक बड़ा वर्ग इस बजट से मायूस होगा।

दूसरी ओर, रोजगार के मामले और प्रदेश की आय बढ़ाने के मामले में बजट खास नया कुछ करता नहीं दिख रहा। रोजगार का पूरा क्षेत्र सरकारी नौकरियों पर छोड़ दिया। पलायन का जिक्र करते हुए गैर आबाद गांवों को फिर से बसाने की वित्त मंत्री ने बात की। बजट में राजस्व बढ़ाने की कोई बात नहीं है। परंपरा को निभाते हुए इस बार भी इंदिरा हृदयेश ने राजस्व सरप्लस का बजट सामने रखा। हालांकि, लगातार बढ़ रहा सरकारी खर्च प्रदेश सरकार के लिए चिंता का सबब बनेगा।

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