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आतंकवाद के शिकार बच्चों को डॉक्टर बनाएगी मोदी सरकार

Mon, 19 Sep 2016 02:40 PM IST
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून
आफताब अजमत/ अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 19 Sep 2016 02:40 PM IST
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indian government will make terrorism victim children  doctor
पीएम मोदी - फोटो : pti

देश में कहीं भी आतंक का शिकार हुए परिवार के बच्चे भी अब डॉक्टर बन सकेंगे। केंद्र सरकार ने हाल ही में आदेश जारी करते हुए तीन राज्यों के चार मेडिकल कॉलेजों में आतंक पीड़ित परिवारों के बच्चों के लिए चार एमबीबीएस सीटें आरक्षित कर दी हैं।

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उत्तराखंड में इन बच्चों के लिए दो सीटें आरक्षित हुई हैं। इसके लिए काउंसिलिंग प्रक्रिया केंद्र सरकार से होगी, जबकि राज्य की जिम्मेदारी दाखिले की होगी।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंतरिक सुरक्षा प्रभाग की ओर से दिए गए निर्देशों के तहत हाल ही में उत्तराखंड सरकार को इस बारे में निर्देश मिले हैं।

तीन राज्यों में आ‌रक्षित की गई MBBS सीट

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इसके तहत आतंक पीड़ित परिवारों या उनके बच्चों के लिए तीन राज्यों में एमबीबीएस की सीट आरक्षित की गई है। इनमें से दो सीटें उत्तराखंड, एक सीट बिहार और एक सीट केरल में आरक्षित हुई है।

पीड़ित परिवारों में से एक पीड़ित को एक सीट एएन मगध मेडिकल कॉलेज, गया बिहार, एक सीट मेडिकल कॉलेज त्रिसूर केरल, एक सीट राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी उत्तराखंड और एक सीट वीर चंद्र सिंह गढ़वाली राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर गढ़वाल में दी जाएगी।

मंत्रालय के मुताबिक पहली प्राथमिकता उन बच्चों को दी जाएगी, जिनके माता और पिता किसी आतंकवादी घटना में मारे गए हों।

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इसी साल से दिए जाएंगे दाखिले

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दूसरी प्राथमिकता उन बच्चों को दी जाएगी, जिनके माता या पिता में से कोई एक आतंकी हादसे का शिकार हो गया हो। 

तीसरी प्राथमिकता उन बच्चों को मिलेगी, जिनके परिजन आतंकी हादसे में हमेशा के लिए गंभीर अपंग हो गए हों। दाखिलों के सभी नियम नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट(नीट) के ही फॉलो किए जाएंगे।

देश में कहीं भी हुई आतंकी घटना में अगर किसी बच्चे के मां या बाप या दोनों ही मारे गए हैं, उनके लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय ने यह दो सीटें उत्तराखंड में रिजर्व की हैं। इनके दाखिले इसी साल दिए जाएंगे।
- डॉ. आशुतोष सयाना, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा, उत्तराखंड

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