नंदा देवी पर्वत से शवों को लाने में मौसम बन रहा बाधा, वापस लौटे वायु सेना के चीता हेलीकॉप्टर
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नंदा देवी में पर्वतारोहण के दौरान हिमस्खलन की चपेट में आकर जान गंवाने वाले सात पर्वतारोहियों के शवों को बेस कैंप द्वितीय में बनाए गए हेलीपैड तक लाने का काम जारी है। वायु सेना के चीता हेलीकॉप्टरों ने रविवार को भी नंदा देवी क्षेत्र में उड़ान भरी।
सेना के दो चीता हेलीकॉप्टरों ने शवों को लाने के लिए उड़ान भरी थी, लेकिन अधिक ऊंचाई, खराब मौसम और उपयुक्त स्थान नहीं होने के कारण अस्थायी हेलीपैड पर उतर नहीं सके थे। अब सातों शवों को 15 हजार फीट की हाइट तक लाया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार शवों को लेकर आ रही आईटीबीपी की टीम अभी चिह्नित हेलीपैड से तीन किलोमीटर दूर है। सभी शवों को यहां को यहां पहुंचाने के बाद हेलीकाप्टर से लिफ्ट कर पिथौरागढ़ लाया जाएगा।
यह है मामला
13 मई को मुनस्यारी से नंदा देवी ईस्ट के लिए गए ब्रिटेन निवासी मार्टिन मोरिन, जोन चार्लिस मैकलर्न, रिचर्ड प्याने, रूपर्ट वेवैल, अमेरिका के एंथोनी सुडेकम, रोनाल्ड बीमेल, आस्ट्रेलिया की महिला पर्वतारोही रूथ मैकन्स और इंडियन माउंटेनियरिंग फेडरेशन के जनसंपर्क अधिकारी चेतन पांडेय पर्वतारोहण के दौरान हिमस्खलन की चपेट में आने से लापता हो गए थे।
आईटीबीपी के द्वितीय कमान अधिकारी और एवरेस्ट विजेता रतन सिंह सोनाल के नेतृत्व में गई 18 सदस्यीय हिमवीरों की टीम ने 23 जून को सात पर्वतारोहियों के शवों को निकालकर 17800 फीट की ऊंचाई पर अस्थायी कैंप में रखा था। मौसम खराब होने से आठवां शव नहीं मिल पाया। इसके बाद सात पर्वतारोहियों के शवों को हिमवीरों ने तमाम बाधाओं को पार करते हुए 600 मीटर नीचे पहुंचा दिया था। आईटीबीपी के जवानों ने यहां पर एक हेलीपैड तैयार किया था।
अधिक ऊंचाई और खराब मौसम के कारण हेलीकॉप्टर स्टेबल नहीं हो पा रहे हैं। पर्वतारोहियों के शवों को 15 हजार फीट की ऊंचाई तक लाया जा रहा है। हेलीपैड तक पहुंचने में आईटीबीपी की टीम को अभी तीन किलोमीटर की दूरी तय करनी है। इसमें अभी दो दिन का समय लग सकता है।
- एपीएस निंबाडिया, डीआईजी आईटीबीपी।