चीन और नेपाल सीमा पर हाई अलर्ट, 24 घंटे पल-पल की गतिविधियों पर नजर रख रहे भारतीय जवान
- सुरक्षा बलों ने चीन सीमा पर भी बढ़ाई निगरानी, लिपुपास बढ़ाई गश्त
- नेपाल की एकतरफा कार्रवाई स्वीकार्य योग्य नहीं : नृप सिंह नपलच्याल
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भारतीय क्षेत्र को अपना बताकर उसे नेपाली नक्शे में शामिल करने के बाद भारत ने नेपाल और चीन सीमा पर चौकसी बढ़ा दी है। बॉर्डर पर हाई अलर्ट जारी किया गया है। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी सीमा पर होने वाली हर गतिविधि की पल-पल की जानकारी ले रहे हैं।
भारत के तमाम विरोध के बावजूद नेपाल ने कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा को अपने नक्शे में शामिल किया है। नेपाल के राष्ट्रपति द्वारा नेपाल के नक्शे में हस्ताक्षर के बाद भारत ने नेपाल के साथ ही चीन सीमा पर कड़ी चौकसी कर दी है।
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नेपाल सीमा की सुरक्षा का जिम्मा एसएसबी के पास है जहां चप्पे-चप्पे पर एसएसबी ने अपने जवानों की तैनाती बढ़ा दी है। अंतरराष्ट्रीय झूला पुलों की निगरानी के साथ ही महाकाली नदी के किनारे भी गश्त बढ़ा दी हे।
उधर, चीन की ओर से की गई गतिविधियों के बाद चीन सीमा में आईटीबीपी के अलावा सेना के जवानों की तैनाती भी कर दी गई है। सुरक्षा बलों के अधिकारी सीमा पर होने वाली हर गतिविधि की पल-पल की जानकारी ले रहे हैं।
चीन के द्वारा कुछ समय पूर्व लिपुपास में बने भारतीय टिन शेडों को हटाने को लेकर विवादित बैनर बॉर्डर के समीप लहराए थे। उसके बाद से नाभीढांग से लिपुपास तक भारतीय सुरक्षा एजेंसियां संयुक्त रूप से लिपुपास तक 24 घंटे गश्त कर रहे हैं।
नेपाल की एकतरफा कार्रवाई स्वीकार्य योग्य नहीं: नृप सिंह नपलच्याल
नेपाल की ओर से भारतीय क्षेत्र कालापानी, लिपुलेख, लिंपियाधूरा को अपने देश का हिस्सा बताने के बाद सीमांत के लोगों में नेपाल के प्रति आक्रोश है। अमर उजाला ने इस संबंध में पूर्व मुख्य सचिव उत्तराखंड एवं मुख्य केंद्रीय संरक्षक नृप सिंह नपलच्याल से वार्ता की। उन्होंने कहा कि नेपाल की एकतरफा कार्रवाई कतई स्वीकार्य योग्य नहीं है। दोनों राष्ट्रों को मैत्रीपूर्ण वातावरण में बातचीत से इस विवाद का समाधान निकालना चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमारे क्षेत्रीय इतिहास और भूगोल में महाकाली नदी का उद्गम स्थल सदैव कालापानी ही रहा है और रहेगा। जिस नदी को नेपाल अब काली नदी बताने की कोशिश कर रहा है वह हमेशा ही ‘कुटीयंग्ती’ रहा है और रहेगा। कुटीयंग्ती का नेपाल से कभी संबंध नहीं रहा है। वह भारत की आंतरिक नदी है, जो गुंजी-नपलच्यो गांवों के छोर पर महाकाली नदी में मिल जाती है। लिपुलेख व लिम्पियाधूरा में भी किसी तरह का सीमा विवाद नहीं है।
यह हमारी चीन के साथ निर्विवाद सीमा को निर्धारित करती है, जिसका नेपाल से दूर- दूर का भी संबंध नहीं है। लिपुलेख कैलाश मानसरोवर यात्रियों और भारत-चीन सीमा व्यापार का मुख्य सीमा प्रवेशद्वार रहा है, जो हजारो वर्षों से भारत-तिब्बत (चीन) की सीमा रही है। भारत और नेपाल के मध्य सदियों से सांस्कृतिक, धार्मिक, आर्थिक, पारिवारिक और अच्छे पड़ोसी के संबंध रहे हैं।
दोनों देशों के मध्य 1800 किमी से अधिक खुली और शांतिपूर्ण सीमा इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। अत: दोनों देशों को आपसी विवादों का शांति के वातावरण में बातचीत द्वारा समाधान निकालना चाहिए। ऐसे मसलों का कभी एक पक्षीय समाधान नहीं हो सकता है।
नृप सिंह नपलच्यू ने सीमांत के सभी भारतीय और नेपाली बंधुओं से अपील की है कि वे अनावश्यक व भड़काऊ बयानबाजी न करें। सीमा पर अब तक कायम शांति के माहौल को बनाए रखें। यह दोनों देशों के नेतृत्व के द्वारा हल किया जाने वाला मुद्दा है। स्थानीय समाधान का मुद्दा नहीं है। अत: सोशल मीडिया पर भी अनर्गल चर्चा न करें व संयम बनाए रखें। उन्होंने कहा कि दोनों राष्ट्र अच्छे मित्र व घनिष्ठ पड़ोसी रहे हैं और हमेशा रहेंगे।