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3 साल पहले आए भूकंप से नेपाल को उबारने के लिए भारत करेगा यह अनूठी पहल

Thu, 22 Feb 2018 11:59 AM IST
अरविंद सिंह/ अमर उजाला, हरिद्वार
अरविंद सिंह/ अमर उजाला, हरिद्वार Updated Thu, 22 Feb 2018 11:59 AM IST
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india help nepal to come out from massive earthquake
nepal earthquake file photo - फोटो : BBC

तीन साल पहले नेपाल में आए भूकंप से सात जिलों में जमींदोज हुए स्कूल भवनों की जगह भारत सरकार 70 नए भूकंपरोधी भवन बनाएगी। काठमांडू में भी दो लाइब्रेरी भवनों का निर्माण किया जाएगा। दोनों योजनाओं के प्रस्ताव तैयार करने व निर्माण की जिम्मेदारी रुड़की स्थित केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) को सौंपी गई है। सीबीआरआई ने प्रस्ताव तैयार कर विदेश मंत्रालय को भेज दिया है।

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नेपाल में वर्ष 2015 में आए भूकंप से पोखरा, ढांडिंग, डोलखा, कवरनेपालन चौक, नुआकोट, सिंधुपाल व रामचेत जैसे जिलों में तबाही हुई थी। उस दौरान भारत सरकार ने भूकंप पीड़ितों को काफी मदद पहुंचाई थी। केंद्र ने प्रभावित सात जिलों में 70 नए भूकंपरोधी स्कूल भवन और काठमांडू में दो अत्याधुनिक लाइब्रेरी भवनों के निर्माण का फैसला लिया था।
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विदेश मंत्रालय ने निर्माण से जुड़े तमाम पहलुओं का अध्ययन करने और उसे धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी रुड़की स्थित सीबीआरआई के वैज्ञानिकों को सौंपी गई थी। संस्थान के प्रिंसिपल वैज्ञानिक डा. अजय चौरसिया की अगुवाई में विशेषज्ञों की टीम ने भूकंप प्रभावित जिलों का दौरा कर रिपोर्ट तैयार कर विदेश मंत्रालय को भेज दी है।

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350 करोड़ रुपये का आएगा खर्च

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भयानक भूकंप यादकर लोगों की आंखें भर आईं - फोटो : Reuters

स्कूल और लाइब्रेरी भवनों के निर्माण में 350 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। स्कूल और लाइब्रेरी भवन का डिजायन तैयार करने और निर्माण कार्यों की मॉनीटरिंग सीबीआरआई के वैज्ञानिक करेंगे, जबकि निर्माण कार्य नेपाल सरकार कराएगी।

वर्ष-2015 में आए विनाशकारी भूकंप को ‘गोरखा अर्थक्वेक’ के नाम से भी जाना जाता है। रिक्टर पैमाने पर 7.8 क्षमता वाले इस भूकंप से 9000 लोगों की मौत हो गई थी और 22000 से अधिक लोग घायल हो गए थे। आज तक भी नेपाल सरकार प्रभावित इलाकों में बिजली, पानी, सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं पटरी पर नहीं ला पाई है।

विदेश मंत्रालय के निर्देश पर संस्थान नेपाल के सात जिलों में भूकंप से तबाह हुए स्कूलों की जगह 70 नए स्कूल और दो लाइब्रेरी भवनों का निर्माण करेगा। भूकंपरोधी तकनीक पर बनाए जाने वाले भवनों से जुड़ा प्रस्ताव विदेश मंत्रालय को भेज दिया गया है। मंत्रालय के अगले आदेश का इंतजार किया जा रहा है।
- डा. गोपाल कृष्णन, निदेशक , केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान रुड़की

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