खुलासाः चीन सीमा पर सेना के पास संसाधन नहीं!

ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 01 Dec 2014 03:14 PM IST
india have no firing range on china border.
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केंद्र सरकार बार-बार चीन से मुकाबले का दावा करती है वहीं, उत्तराखंड में 350 किलोमीटर लंबी चीन (तिब्बत) सीमा पर ड्रैगन से मुकाबले के लिए हमारे पास संसाधन ही नहीं है।
उत्तराखंड में चीन बीते पांच वर्ष में 37 और इस साल दो बार हवाई घुसपैठ कर चुका है। लगातार मिल रही इन चुनौतियों के बावजूद भारतीय सेना के पास उत्तराखंड में सीमा के करीब तोपों और अन्य बड़े हथियारों के अभ्यास के लिए फील्ड फायरिंग रेंज तक नहीं है।

सेना लंबे समय से फायरिंग रेंज के लिए जमीन तलाश रही है लेकिन कभी इको सेंसिटिव जोन तो कभी वन विभाग का अड़ंगा लग गया। जबकि चीन के सीमा पार पांच हवाई अड्डे, ल्हासा तक रेलवे लाइन है जिसका बॉर्डर तक निर्माण लगभग पूरा हो चुका है।

इसके अलावा चीन सड़कों का जाल पूरे तिब्बत में सीमा तक फैला चुका है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक चीन के पांच सैन्य माउंटेन डिवीजन सीमा के उस पार तैनात हैं। ऐसे में सीमा पार से बड़ी चुनौती मिलती है तो बिना फायरिंग रेंज के ड्रैगन से कैसे मुकाबला कर सकेंगे?
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क्यों है फायरिंग रेंज की जरूरत?

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