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देश का पहला एडवांस टैक्नीक युक्त सॉलिड वेस्ट एंड मैनेजमेंट प्लांट तैयार, सीएम करेंगे उद्घाटन

Fri, 01 Dec 2017 08:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 01 Dec 2017 08:50 PM IST
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india first high technique Solid Waste Management Plant ready in dehradun

देश का पहला हाई टैक्नीकयुक्त शीशमबाड़ा सॉलिड वेस्ट एंड मैनेजमेंट प्लांट में शुक्रवार से कूड़ा पहुंचने लगा। मेयर और नगर आयुक्त की मौजूदगी में सुबह 10 बजे छह वाहन प्लांट पहुंचे। शाम तक कारगी और गढ़ी कैंट स्थित ट्रांसफर सेंटर से कूड़ा प्लांट पहुंचाया गया।

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वहीं, रात को केवल कारगी स्थित ट्रांसफर सेंटर से कूड़ा प्लांट भेजा गया। पहले दिन करीब 200 मीट्रिक टन कूड़ा प्लांट में पहुंचाया गया। वहीं, मेयर ने कंपनी अधिकारियों को प्लांट का काम 15 दिसंबर तक हरहाल में पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने बताया कि 14 जनवरी को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत प्लांट का विधिवत उद्घाटन करेंगे।
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शीशमबाड़ा सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट देश का पहला फुली कवर्ड एंड मैकैनाइज विंड्रो एरोबिक सिस्टम से लैस है। जहां कूड़े को प्रोसेस करके जैविक खाद, आरडीएफ, टेवर ब्लॉक बनाया जाएगा। प्रोसेस के बाद बचे शेष कूड़े सांइटिफिक लैंड फिल में डाला जाएगा।
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मेयर विनोद चमोली और नगर आयुक्त विजय कुमार जोगदंडे की मौजूदगी में कूड़े के करीब आधा दर्जन वाहन प्लांट पहुंचे। इस दौरान वहां मौजूद रैमकी इनवायरो कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर मोहित द्विवेदी की अगुवाई में टीम ने कूड़े को प्लांट के चेंबर तक पहुंचाया।

ऐसा प्रोसेस होगा कूड़ा

india first high technique Solid Waste Management Plant ready in dehradun

मेयर ने कहा कि प्लांट का काम 15 दिसंबर तक किसी भी सूरत में पूरा होना चाहिए। बताया कि 14 जनवरी को मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत प्लांट का उद्घाटन करेंगे। नगर आयुक्त ने अफसरों को व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए। इस मौके पर वरिष्ठ नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके सिंह, पार्षद भूपेंद्र कठैत, शारदा गुप्ता, सुशील गुप्ता आदि मौजूद रहे।

ऐसा प्रोसेस होगा कूड़ा
पहले प्लांट में मौजूद वेब्रिज में कूड़े को तौला जाएगा। इसके बाद उसे टिपिंग फ्लोर में तीन दिन तक रखा जाएगा। जहां से उसे चैंबर में डाला जाएगा। जिसमें नीचे से 28 दिन तक गर्म हवा दी जाएगी। लीचेड को कलेक्ट कर ट्रीटमेंट प्लांट में भेजा जाएगा। फिर कूड़े को 75 एमएम के  ट्रॉमल पर प्रोसेस के लिए भेज दिया जाएगा।

75 एमएम (मिलीमीटर) के ऊपर का मैटेरियल आरडीएफ बनाने के लिए भेजा जाएगा। 75 एमएम का कूड़ा 25 एमएम के ट्रॉमल में आगे के प्रोसेस के लिए भेज दिया जाएगा। 25 एमएम से अधिक का कूड़ा आरडीएफ और सांइटिफिक लैंड फिल में चला जाएगा। वहीं, 25 एमएम से नीचे का कूड़ा चार एमएम के ट्रॉमल में जाएगा। इससे कम का कूड़ा खाद बन जाएगी। चार एमएम से ऊपर का कूड़ा साइंटिफिक लैंड फिल में जाएगा।

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