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भारत-चीन सीमा पर उत्तराखंड सबसे फिसड्डी

Thu, 11 Dec 2014 09:45 AM IST
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून
अरुणेश पठानिया/अमर उजाला, देहरादून Updated Thu, 11 Dec 2014 09:45 AM IST
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india china border in uttarakhand.

चीन सीमा पर सामरिक महत्व की सड़कों के निर्माण में उत्तराखंड में सबसे धीमी गति से निर्माण हो रहा है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अधीन सैन्य जरूरतों को देखते हुए 14 सड़कें उत्तराखंड में बन रही हैं, जिसमें केवल एक पूरी तरह निर्मित हुई है।

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चीन से सटी सीमाओं वाले अन्य राज्यों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में स्थिति बेहतर है। बीआरओ का तर्क है उत्तराखंड में कुछ वर्षों से सीमांत जनपदों में लगातार आ रही आपदा निर्माण बड़ी बाधा है।
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बीआरओ की ओर से राज्यसभा सांसद राजीव चंद्रशेखर के सवाल पर रक्षा मंत्रालय के लिए मुहैया कराई जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड के साथ सटी भारत-चीन की साढ़े तीन सौ किमी लंबी सीमा तक सैन्य पहुंच आसान बनाने के लिए बीआरओ के अधीन 14 सड़कें बनाई जानी हैं। जबकि पांच अन्य एजेंसियों के माध्यम से बनाई जा रही हैं।
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चीन सीमा पर बीआरओ की गति

india china border in uttarakhand.

2006-07 से अब तक 190 किमी तक बीआरओ खुदाई और कटान कर पाया है। 60 किमी पक्की की गई है। क्षमता बढ़ाने के लिए आउटसोर्सिंग की अनुमति दी गई है। बीआरओ के प्रशासकों को बढ़ी हुई वित्तीय और प्रशासनिक शक्तियां दी भी गई हैं।

गौरतलब है कि बीआरओ को 3410 किमी लंबी 61 भारत-चीन सीमा सड़कों के निर्माण का जिम्मा सौंपा  गया है। इसमें अभी 950 किमी लंबी 17 सड़कें पूरी हुई हैं, जबकि 44 पर काम चल रहा है।

राज्य---------निर्माणाधीन सड़कें-----------पूर्ण हुई
उत्तराखंड-----------14----------------------1
जम्मू कश्मीर-------9----------------------3
हिमाचल प्रदेश------2----------------------3
सिक्किम-----------2----------------------1
अरुणाचल प्रदेश----18----------------------9

देरी की मुख्य वजह
- वन्यजीव विभाग से अनुमति में विलंब
- कठोर चट्टानों का फैलाव
- सीमित ऋतुओं में कार्य संभव
- निर्माण सामग्रियों की उपलब्धता में कठिनाई
- भूमि अर्जन में विलंब
- प्राकृतिक आपदाओं से कार्य प्रभावित
-आपदा में संसाधनों को दूसरे काम में लगाया गया

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