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अच्छे-अच्छों का दम निकाल देते हैं ऐसे प्रत्याशी
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 17 Apr 2014 01:58 PM IST
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जैसे ही कोई निर्दलीय प्रत्याशी नामांकन फार्म लेता है राजनीतिक दलों का दिल धड़क जाता है।
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चुनावी समीकरण बिगड़ने का अंदेशा
वोट कटवा प्रत्याशी किसका वोट बैंक नोंच लेगा, किसी को पता नहीं है। खासतौर पर भाजपा और कांग्रेस वोट कटवों के चक्कर में चुनावी समीकरण बिगड़ने के अंदेशा से परेशान हैं।
कुछ राजनीतिक दल ‘वोट कटवों’ को खरीदने के चक्कर में जुट गए हैं। टिहरी लोकसभा क्षेत्र में कांग्रेस और भाजपा ने अपनी-अपनी चुनावी बिसात बिछा रखी है। इसमें वोट कटवा ‘वायरस’ की तरह घुस रहे हैं।
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अभी 14 निर्दलीय प्रत्याशियों ने नामांकन फार्म खरीदें है। तीन प्रत्याशी मुसलिम हैं, उनमें देवबंद दारुल उलूम के पूर्व शिक्षक मौलाना सैयद माबूद भी हैं। ये कांग्रेस के लिए उलझन हैं। मुसलिम वोट बैंक पर कांग्रेसी अपना दावा करते हैं।
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तो जिताऊ प्रत्याशी धड़ाम हो जाएगा
कुछ निर्दलीय विभिन्न समाजों और जातियों के हैं। भाजपा और बसपा इन्हें लेकर गुणा-भाग में लगी हुई है। राजनीतिक दलों के रणनीतिकारों का कहना है कि हर निर्दलीय प्रत्याशी हजार से 10 हजार वोट ले गया तो जिताऊ प्रत्याशी धड़ाम हो जाएगा।
भाजपा प्रत्याशी माला राज्य लक्ष्मी शाह के चुनाव संयोजक ज्योति प्रसाद गैरोला का कहना है कि ऐसे प्रत्याशी 25 से 30 हजार वोट डिस्टर्ब करेंगे।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महामंत्री (प्रशासनिक) विजय सारस्वत का कहना है कि हर निर्दलीय प्रत्याशी के कुछ समर्थक होते हैं। इनकी जितनी अधिक संख्या होगी उतना वोट खराब करेंगे।
‘बिकने’ के लिए खड़े होते हैं प्रत्याशी
चुनावी रणनीतिकारों का कहना है कि कुछ प्रत्याशी ‘बिकने’ के लिए खड़े होते हैं। मौके का फायदा उठाते हैं और जो पैसा देता है उसके पक्ष में बैठ जाते हैं।
नेताओं का कहना है कि सारे नामांकन हो जाने के बाद ‘वोट कटवों’ को सेट करने का मामला शुरू होगा।
अपना खर्च लेकर बैठेंगे तो ठीक है, ज्यादा मुंह फैलाएंगे तो फिर चुनाव लड़ें। कुल राजनीतिक दलों ने इस मद में अपना फंड भी तैयार कर रखा है।