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Independence Day 2021: फाइलों में गुम होकर रह गया उत्तराखंड के इस स्वतंत्रता सेनानी का सपना

Wed, 11 Aug 2021 02:57 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal अजय कुमार , अमर उजाला, उत्तरकाशी
अजय कुमार , अमर उजाला, उत्तरकाशी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Wed, 11 Aug 2021 02:57 PM IST
सार

टिहरी राजशाही के खिलाफ हुए विद्रोह में शामिल रहे 96 साल के चिंद्रियालाल डुंडा तहसील की भंडारस्यूं पट्टी के जुणगा गांव के निवासी हैं।

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Independence Day 2021: dream of this freedom fighter of Uttarakhand lost in files
स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चिंद्रियालाल - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

उत्तरकाशी जिले के एक मात्र जीवित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चिंद्रियालाल का अपनी जमीन पर सामुदायिक भवन बनाने का सपना पूरा नहीं हो पाया है। जब तक वे चल फिर सकते थे, उन्होंने सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे। कई बार अर्जियां दीं लेकिन, अर्जी सिस्टम की फाइलों में ऐसी दबी कि आज तक इस पर कोई सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई।  

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टिहरी राजशाही के खिलाफ हुए विद्रोह में शामिल रहे 96 साल के चिंद्रियालाल डुंडा तहसील की भंडारस्यूं पट्टी के जुणगा गांव के निवासी हैं। वर्तमान में वे अपने सबसे छोटे पुत्र चिरंजीलाल के साथ मातली बंदरकोट में रहते हैं। चिरंजी बताते हैं कि उनके पिता टिहरी रियासत के खिलाफ आंदोलन से लेकर सर्वोदय और उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन में सक्रिय रहे। वे टिहरी रियासत के खिलाफ विद्रोह में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी नत्था सिंह कश्यप, परिपूर्णानंद पैन्यूली आदि के साथ गुप्तचर के रूप में काम करते थे।
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आजादी के लिए जुनून इस कदर था कि मात्र कक्षा चार तक ही पढ़ाई की। आंदोलन में उन्हें एक बार राजा की फौज ने गिरफ्तार भी किया था। उनके पिता का अरमान है कि ब्रह्मखाल स्थित उनकी जमीन पर सामुदायिक भवन या वृद्धाश्रम बनाया जाए। इसके लिए उन्होंने बहुत प्रयास किया, लेकिन उनकी इच्छा अब तक अधूरी है।  

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सड़क और कॉलेज का भी नहीं बदला गया नाम 

चिरंजीलाल ने बताया कि उन्होंने ब्रह्मखाल-कुमारकोट सड़क के साथ पीजी कॉलेज का नाम उनके पिता के नाम पर रखने की मांग की थी, लेकिन वो भी पूरी नहीं हुई। उन्हें देहरादून में जमीन देने की कार्रवाई भी शुरू हुई थी, लेकिन परवान नहीं चढ़ पाई।

सामुदायिक भवन के निर्माण के लिए ग्रामीण निर्माण विभाग ने 15.21 लाख का आगणन तैयार किया था। तत्कालीन सीएम हरीश रावत ने इसे अपनी घोषणा में शामिल किया था, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई।

यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं आया है। न ही इसके लिए मुझसे संपर्क किया गया। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी इसके लिए अपनी जमीन दे रहे हैं तो किसी योजना के तहत भवन बनवा दिया जाएगा।
-मयूर दीक्षित, डीएम उत्तरकाशी

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