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IMA POP: 94 साल में पहली बार; ड्रिल स्क्वायर पर नारी शक्ति ने पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर भरा अंतिम पग

Sun, 14 Jun 2026 01:19 PM IST
Alka Tyagi माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून
माई सिटी रिपोर्टर, देहरादून Published by: Alka Tyagi Updated Sun, 14 Jun 2026 01:19 PM IST
सार

भारतीय सैन्य अकादमी से पहली बार नौ महिला सैन्य अफसर पासआउट हुई हैं। महिला शक्ति ने पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कदमताल किया तो हर कोई गर्व से भर गया।

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IMA POP June 2026 first in 94 years Women Officers Pass Out From Indian Military Academy
आईएमएस से पासआउट हुईं महिला अफसर - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के चैटवुड भवन का मैदान (ड्रिल स्क्वायर) शनिवार को ऐतिहासिक पलों का साक्षी बना। यहां 94 साल में पहली बार नारी शक्ति ने पुरुषों के साथ कंधे से कंधा और कदम से कदम मिला मार्च पास्ट किया।

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इसी के साथ करीब 35 साल पुराना महिलाओं का संघर्ष समानता के रूप में हकीकत बनकर सामने आया। पहली बार नौ महिला अफसर सेना में पूर्णकालिक अफसर बनीं और उन्होंने अपने 472 पुरुष साथियों के साथ देश सेवा की शपथ ली।आईएमए में इस ऐतिहासिक पल की साक्षी तीनों सेनाओं की कमांडर राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू बनीं। उन्होंने भी इसे मील का पत्थर बताया। समाज में दशकों से महिलाओं और पुरुषों की बराबरी की दलीलें दी जाती रही हैं। जहां बराबरी मिली वह किसी की उदार सोच नहीं बल्कि इसके पीछे खुद महिलाओं ने ही लड़ाई लड़ी है।
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सेना में पूर्ण कालिक अफसर बनने के पीछे भी महिलाओं का तीन दशक से ज्यादा का संघर्ष छिपा है। दरअसल, महिलाओं के लिए पहली बार सेना में 1992 में शॉर्ट सर्विस कमीशन (एसएससी) के माध्यम से अफसर बनने की राह खुली थी।
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यह सेवा अल्प काल के लिए होती थी जिसकी उस वक्त अधिकतम अवधि 10 साल की थी। महिलाओं ने इसके प्रति आवाज उठाई तो इस सेवा को चार साल के लिए और बढ़ा दिया गया। बावजूद इसके महिलाओं की सेना में स्थायी कमीशन की मांग जारी रही। महिलाएं इसके लिए निचली अदालतों से होते हुए सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची। वर्ष 2020 में सर्वोच्च अदालत का ऐतिहासिक फैसला आया जिसमें महिलाओं को पूर्ण कालिक अफसर बनने की अनुमति दी गई।

देश की जांबाज लड़कियों ने भी पूर्व के इन संघर्षों को याद किया और वर्ष 2022 में महिलाओं का पहला बैच एनडीए में दाखिल हो गया। वहां तीन साल ग्रेजुएशन करने के बाद नौ महिला कैडेट्स का चयन देहरादून की प्रतिष्ठित भारतीय सैन्य अकादमी में हुआ। एक साल के कठिन प्रशिक्षण के बाद इन नौ महिलाओं ने अब शनिवार को पूर्णकालिक अफसर बन देश की सरहदों की रक्षा की शपथ के साथ आईएमए से थल सेना की सेवा की ओर पहला कदम बढ़ा दिया।

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