फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   ima pop 2020 : story of young army officers, want posting on china border

IMA POP : वतन पर जान न्यौछावर करने को तैयार ये युवा अफसर, चीन से लोहा लेने के लिए लद्दाख में पोस्टिंग की तमन्ना

Sat, 12 Dec 2020 11:50 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 12 Dec 2020 11:50 PM IST
विज्ञापन
ima pop 2020 : story of young army officers, want posting on china border
- फोटो : अमर उजाला

भारतीय सैन्य अकादमी के 147वें नियमित कोर्स के सर्वश्रेष्ठ कैडेट के तौर पर वतनदीप सिंह सिद्धू को स्वॉर्ड ऑफ ऑनर से सम्मानित किया गया। मूल रूप से पंजाब के लुधियाना शहर के सिद्धू ने स्कूली शिक्षा दून के ही सैनिक स्कूल से हासिल की है। कड़ी मेहनत के बाद सेना में अफसर बनने और स्वॉर्ड ऑफ ऑनर के खिताब से सम्मानित होने वाले सिद्धू ने कहा कि वे देश के दुश्मनों खासकर चीन की सेना को धूल चटाना चाहते हैं।

विज्ञापन


बचपन से ही देश सेवा की सोच रखने वाले सिद्धू का सपना शनिवार को सेना में अफसर बनने के साथ पूरा हो गया। सिद्धू ने कहा कि लक्ष्य तय करने के बाद कड़ी मेहनत करने से सफलता मिलती है। अच्छा सैनिक बनने के लिए जमकर मेहनत करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि सीमा पर लगातार भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच झड़प हो रही है।
विज्ञापन


वे चीन की सेना से लोहा लेना चाहते हैं, इसीलिए उनकी तमन्ना है कि उनकी पोस्टिंग लद्दाख में हो। सिद्धू के पिता बलजिंदर सिंह पेशे से इंजीनियर हैं। जबकि मां लुधियाना के एक कॉलेज में प्रधानाचार्य हैं। शनिवार को सैन्य अफसर बनने का श्रेय सिद्धू ने अपने माता-पिता को दिया। वहीं सिद्धू के माता-पिता ने कहा कि बेटे ने लुधियाना और परिवार का नाम रोशन किया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

दून के शिखर और सुमित के कंधे पर सजे सितारे 

दून के शिखर थापा और सुमित राज कंडवाल के कंधों पर सितारे सजे तो परिवार के लिए खुशियों का ठिकाना न रहा। दोनों युवा सैन्य अधिकारियों के परिजन भी इस ऐतिहासिक लम्हे के गवाह बने।

गढ़ी कैंट निवासी शिखर थापा के पिता देव बहादुर थापा भी सेना से रिटायर्ड हैं। बताया कि शिखर का कक्षा छह से सेना में अधिकारी बनने का सपना था। सैनिक स्कूल से शिक्षा पूरी करने के बाद शिखर ने सेना में जाने का रास्ता चुना। दूसरी कोशिश में शिखर एनडीए में चयनित हो गए।

शिखर की माता ममता थापा ने कहा कि बेटे ने परिवार के साथ-साथ प्रदेश का नाम रोशन किया है। वहीं, दून के हरिपुरकलां निवासी सुमित राज कंडवाल सेना में अफसर बने तो दादी की आंखें खुशी से नम हो गईं।

सुमित ने कहा कि बचपन से सेना के बारे में कई किताबें पढ़ी और फिल्में भी देखीं। तब से ही सेना में जाकर देश की सेवा करने का इरादा था। सुमित के पिता राज कंडवाल और मां सुनीता कंडवाल ने कहा कि बेटे के कंधे पर स्टार सजे तो ऐसा लगा जैसे सारी मनोकामनाएं पूरी हो गईं।

सेना में अधिकारी बने कमेड़ा के अखिलेश सिंह राणा

अगस्त्यमुनि विकासखंड के कमेड़ा गांव निवासी अखिलेश सिंह राणा भारतीय सेना में अधिकारी बन गए हैं। भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) देहरादून में 18 महीने के प्रशिक्षण के बाद उन्हें शनिवार 12 दिसंबर कमीशन प्राप्त हुआ है। इस मौके पर उनके माता-पिता व परिवार के अन्य सदस्य मौजूद थे।

 कमेड़ा गांव के पान सिंह राणा व कुसुम देवी की तीन संतानों में सबसे छोटे अखिलेश सिंह राणा की प्राथमिक शिक्षा सरस्वती शिशु मंदिर जाखधार से हुई। जबकि हाईस्कूल की पढ़ाई उन्होंने माई गोविंद गिरी सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज रुद्रप्रयाग से की। इसके बाद इंटरमीडिएट की पढ़ाई देहरादून व स्नातक व राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई द हिंदू कॉलेज दिल्ली विवि से पूरी की।

इसके बाद जुलाई 2019 में अखिलेश का सीडीएस में चयन हुआ। शनिवार को 18 महीने के प्रशिक्षण के बाद अखिलेश भारतीय सेना में अधिकारी बन गए हैं। इस मौके पर देहरादून आईएएम में मौजूद अखिलेश के ताऊ व गढ़वाल मंडल विकास निगम में सहायक अभियंता दयाल सिंह राणा ने बताया कि उनके भतीजे ने पढ़ाई के दौरान ही सेना में करियर बनाने की ठान ली थी।

उनका भतीजा परिवार का पहला सैन्य अधिकारी है, जो उनके लिए गौरव की बात है। इधर, रुद्रप्रयाग के विधायक भरत सिंह चौधरी, केदारनाथ के विधायक मनोज रावत, जिपं अध्यक्ष अमरदेई शाह समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने अखिलेश के सैन्य अधिकारी बनने पर उन्हें व परिजनों को बधाई दी है। 

भारतीय सेना का हिस्सा बने खाती के देवेश

आईएमए में आयोजित पासिंग आउट परेड पास करने के साथ ही जौनसार बावर के खाती गांव का युवक देवेश सिंह राठौड़ भारतीय सेना का अभिन्न अंग बन गया। बेटे के कंधे पर सितारे लगाते हुए पिता अर्जुन सिंह राठौर और मां सुमित्रा सिंह की आंखों से खुशी के आंसू छलक उठे।

खाती गांव में जन्मे देवेश की प्रारंभिक शिक्षा आरआईएमसी स्कूल देहरादून से हुई, जिसके बाद उनका चयन आईएमए के लिए हो गया। आईएमए में आखिरी पग करने के साथ ही देवेश बतौर लेफ्टिनेंट भारतीय सेना का अंग बन गए। 22 वर्षीय देवेश के सेना में शामिल होने से परिवार के साथ ही क्षेत्र के लोगों में भी खुशी की लहर है।

उनके अधिकारी बनने पर यंग माउंटेन क्लब के अध्यक्ष अमित जोशी, जौनसारी जन जागृति समिति के प्रताप चौहान, व्यापार मंडल अध्यक्ष चकराता केशर चौहान, व्यापार मंडल अध्यक्ष क्वांसी सूर्यपाल चौहान समेत कई संगठनों और लोगों ने हर्ष व्यक्त किया है।

लेफ्टिनेंट देवेश के बड़े भाई डॉ. अभिमन्यु ने बताया कि उन्हें बचपन से ही सेना में जाकर देश सेवा करने का जुनून था। देवेश ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने पिता और गुरुजनों को दिया है। कहा कि यदि वे प्रोत्साहित न करते तो वह शायद इस मुकाम पर नहीं पहुंच पाते।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed