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नियमों को ताक पर रख जंगल में बनेगी दीवार
अमर उजाला, देहरादून
Updated Wed, 26 Mar 2014 07:15 PM IST
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राजाजी राष्ट्रीय पार्क की मोतीचूर रेंज के गोहरी माफी गांव को बाढ़ और जंगली जानवरों से बचाने के लिए बन रही विवादित दीवार को वन विभाग ने नियमों को ताक पर रखकर मंजूरी दे दी है।
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इसके लिए न तो वाइल्ड लाइफ बोर्ड से अनुमति ली गई है और न ही किसी तकनीकी विभाग का सहयोग। मंजूरी को विभाग अपना अधिकार बता रहा है तो वन्य जीव प्रेमी सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना। बताया जा रहा है कि चुनावी मौसम में राजनीतिक दबाव के चलते यह मंजूरी दी गई है।
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प्लान में नहीं थी यहां पर दीवार
राजाजी पार्क के वाइल्ड लाइफ मैनेजमेंट प्लान के मुताबिक नदी से हटकर दीवार का निर्माण कार्य होना था। लेकिन, दीवार का निर्माण नदी किनारे शुरू कर दिया गया।
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इस पर विवाद हुआ तो प्रमुख वन संरक्षक एसएस शर्मा ने पार्क के पूर्व निदेशक एसएस रसैली को जांच सौंपी थी। रिपोर्ट में दीवार को क्लीन चिट मिलने के बाद दोबारा उसी जगह निर्माण कार्य शुरू करा दिया गया है।
आदेश का नहीं हो रहा पालन
वर्ष 2000 में सुप्रीम कोर्ट अपने आदेश में साफ कर चुका है कि राष्ट्रीय पार्क में निर्माण कार्य के लिए वाइल्ड लाइफ बोर्ड की अनुमति अनिवार्य होगी तो वन विभाग ने इसकी जरूरत क्यों नहीं समझी। करीब दो किलोमीटर लंबी इस दीवार का निर्माण सिंचाई विभाग से कराया जा रहा है जबकि इसके लिए वन विभाग ही अधिकृत है।
जांच अधिकारी एसएस रसैली का कहना है कि हाथी और बाघ के कॉरीडोर को ध्यान में रखा गया है। जानवरों के आवागमन के लिए रैंप बनाए जाएंगे।
यह है प्रकरण
गोहरी माफी में नदी का पानी हर साल गांव में घुस जाता है। इसके अलावा जंगलों से सटा होने की वजह से हाथियों और बाघ का खतरा बना रहता है। लंबे समय से यहां दीवार बनवाने की मांग की जा रही थी। वन विभाग ने निर्माण शुरू तो करा दिया लेकिन नियमों की अवहेलना के चलते यह विवादों में रही है।
इनका है कहना
इस दीवार के लिए वाइल्ड लाइफ बोर्ड की अनुमति नहीं ली गई। जबकि सुप्रीम कोर्ट अपने आदेश में साफ कर चुका है कि पार्क के भीतर निर्माण के लिए बोर्ड की अनुमति अनिवार्य है। हमारी मांग है कि दीवार का निर्माण सीबीआरआई रुड़की के विशेषज्ञों की देखरेख में कराया जाए।
-राजेंद्र कुमार, पूर्व सदस्य, राज्य वन्य जीव बोर्ड, उत्तराखंड
दीवार का निर्माण वन विभाग के अधिकार के तहत कराया जा रहा है। प्रमुख वन संरक्षक को यह अधिकार है कि वह निर्माण करा सके। इसके लिए बोर्ड की अनुमति अनिवार्य नहीं है। मजबूत निर्माण के मद्देनजर सिंचाई विभाग से कार्य कराया जा रहा है।
-एसएस रसैली, पूर्व निदेशक, राजाजी एवं जांच अधिकारी