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Uttarakhand: सेना के साजो-सामान के निर्माण की तकनीक उपलब्ध कराएगा आईआईटी रुड़की, 10 करोड़ का मिलेगा फंड

Sun, 03 Jul 2022 12:10 PM IST
रेनू सकलानी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: रेनू सकलानी Updated Sun, 03 Jul 2022 12:10 PM IST
सार

आईआईटी रुड़की को रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में तकनीकी सहयोग प्रदान करने के लिए उत्कृष्टता सेंटर बनाया जाएगा। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। प्रौद्योगिकी विकास निधि की निदेशक निधि बंसल ने कहा कि रक्षा निर्माण में आधुनिक प्रौद्योगिकी क्षमता बढ़ाने के लिए डीआरडीओ के माध्यम से योजना शुरू की गई। जिससे उद्योग और स्टार्टअप मौजूदा व भविष्य की हथियार प्रणाली के लिए नई तकनीक को विकसित कर सकेंगे।

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IIT Roorkee will provide technology for manufacturing military equipment
आईआईटी, रुड़की - फोटो : source

विस्तार

उत्तराखंड में सेना के साजो-सामान को तैयार करने के लिए आईआईटी रुड़की स्थानीय उद्योगों को तकनीक उपलब्ध कराएगा। आईआईटी रुड़की को रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में स्थापित होने वाले उद्योगों को तकनीक प्रदान करने के लिए उत्कृष्टता केंद्र बनाने की तैयारी है।
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रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए रक्षा मंत्रालय के रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के माध्यम से प्रौद्योगिकी विकास निधि योजना चलाई गई। इस योजना के तहत रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में स्थापित होने वाले उद्योगों को तकनीकी विकास के लिए केंद्र की ओर से 10 करोड़ तक वित्तीय सहायता दी जा रही है।
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शनिवार को उद्योग निदेशालय में डीआरडीओ, उद्योग विभाग और इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड की ओर से एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। जिसमें प्रदेश के उद्यमियों और स्टार्टअप को प्रौद्योगिकी विकास निधि योजना में दिए जाने वाले प्रोत्साहन के बारे में जानकारी दी जाएगी।
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कार्यशाला में मुख्य अतिथि डीआरडीओ के महानिदेशक तकनीकी प्रबंधन हरि बाबू श्रीवास्तव ने कहा कि रक्षा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए उद्यमियों और स्टार्टअप को रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में उद्योग लगाने के लिए आने आना चाहिए। रक्षा मंत्रालय की ओर से प्रौद्योगिकी विकास निधि योजना के तहत उद्योगों को वित्तीय और अन्य प्रोत्साहन दिए जा रहे हैं। जिससे देश रक्षा प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भर बन सके।

रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में नए उत्पाद बनाने के लिए केंद्र की ओर से 10 करोड़ की वित्तीय सहायता दी जा रही है। आईआईटी रुड़की को रक्षा विनिर्माण क्षेत्र में तकनीकी सहयोग प्रदान करने के लिए उत्कृष्टता सेंटर बनाया जाएगा। इसके लिए प्रक्रिया चल रही है। 
 

योजना में 56 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई

प्रौद्योगिकी विकास निधि की निदेशक निधि बंसल ने कहा कि रक्षा निर्माण में आधुनिक प्रौद्योगिकी क्षमता बढ़ाने के लिए डीआरडीओ के माध्यम से योजना शुरू की गई। जिससे उद्योग और स्टार्टअप मौजूदा व भविष्य की हथियार प्रणाली के लिए नई तकनीक को विकसित कर सकेंगे।
 
अब तक योजना में 56 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। 135 प्रौद्योगिकी का स्वदेशीकरण किया जा रहा है। इसके लिए 147 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई। इस योजना में डीआरडीओ के 1236 विशेषज्ञ जुड़े हैं। जो 3563 कंपनियों को सहयोग दे रहे हैं। इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने प्रदेश में रक्षा विनिर्माण के लिए उद्यमियों के कई मुद्दों को उठाया। 

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उद्योग महानिदेशक एवं अपर सचिव रणवीर सिंह चौहान ने कहा कि उत्तराखंड के युवाओं के लिए अच्छे आइडिया लेकर स्टार्टअप क्षेत्र में आगे बढ़ रहे हैं। रक्षा विनिर्माण क्षेत्र के स्टार्टअप केंद्र की इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। उद्योग निदेशक सुधीर चंद्र नौटियाल ने प्रदेश की रक्षा विनिर्माण नीति के बारे में जानकारी दी। इंजीनियरिंग एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल इंडिया के क्षेत्रीय निदेशक राकेश सूरज ने रक्षा विनिर्माण के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार की संभावनाओं के बारे में जानकारी दी। 

प्रदेश में स्थापित हो उच्च स्तरीय टेस्टिंग लैब

इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने कहा कि रक्षा विनिर्माण उद्योगों के लिए प्रदेश में एक उच्च स्तरीय टेस्टिंग लैब स्थापित होनी चाहिए। डीआरडीओ लैब की सुविधा उद्योगों को उपलब्ध कराई जाए। रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए डिफेंस पार्क स्थापित किया जाए। डीआरडीओ, आईआईटी रुड़की और उद्यमियों के बीच तकनीकी का आदान प्रदान करने के लिए प्रदेश में कान्क्लेव का आयोजन किया जाए। 

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