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Dehradun News: राष्ट्र को आवश्यकता पड़ी तो प्राणों की आहुति देने से नहीं हटेंगे पीछे
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- चकराता रोड पर आयोजित 12 कुमाऊं बटालियन के दाऊद कंडी डे समारोह में बोले पूर्व सैनिक
संवाद न्यूज एजेंसी
देहरादून। चकराता रोड स्थित क्लब में 12 कुमाऊं रेजिमेंट का दाऊद कंडी डे समारोह धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में पूर्व सैनिकों ने संदेश दिया कि भले ही उन्होंने सेना की वर्दी उतार दी हो लेकिन एक सैनिक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता। उन्होंने शपथ ली कि यदि राष्ट्र को आवश्यकता पड़ी तो प्राणों की आहुति देने से पीछे नहीं हटेंगे। समारोह का शुभारंभ बटालियन के वरिष्ठ अधिकारी 1971 के युद्ध में सहभागी रहे ब्रिगेडियर एए एस सिन्हा (सेना मेडल) ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद कुमाऊं का प्रसिद्ध लोक संगीत चांचरी– खोल दे माता, खोल भवानी धरम केवाड़ की प्रस्तुति दी गई। एए एस सिन्हा ने कहा कि 12 कुमाऊं बटालियन का भारतीय सेना में एक गौरवशाली इतिहास रहा है। इस बटालियन की स्थापना लगभग 60 साल पहले हुई थी। छह साल की अल्पावधि में ही इस बटालियन को 1971 के भारत-पाक युद्ध में भाग लेने का अवसर मिला। बटालियन ने पूर्वी कमान का हिस्सा बनते हुए तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान के निकट स्थित दाऊदकंडी नामक द्वीप को फतह किया और बांग्लादेश को स्वतंत्र कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस वीरता के लिए बटालियन को दाऊदकंडी युद्ध सम्मान से नवाजा गया। इस मौके पर कैप्टन डॉ. एस एल गुप्ता, कर्नल जेएम, सूबेदार हरी सिंह बिष्ट, हवलदार हुकुम सिंह, नारायण सिंह आदि मौजूद रहे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
देहरादून। चकराता रोड स्थित क्लब में 12 कुमाऊं रेजिमेंट का दाऊद कंडी डे समारोह धूमधाम से मनाया गया। कार्यक्रम में पूर्व सैनिकों ने संदेश दिया कि भले ही उन्होंने सेना की वर्दी उतार दी हो लेकिन एक सैनिक कभी सेवानिवृत्त नहीं होता। उन्होंने शपथ ली कि यदि राष्ट्र को आवश्यकता पड़ी तो प्राणों की आहुति देने से पीछे नहीं हटेंगे। समारोह का शुभारंभ बटालियन के वरिष्ठ अधिकारी 1971 के युद्ध में सहभागी रहे ब्रिगेडियर एए एस सिन्हा (सेना मेडल) ने दीप प्रज्वलित कर किया। इसके बाद कुमाऊं का प्रसिद्ध लोक संगीत चांचरी– खोल दे माता, खोल भवानी धरम केवाड़ की प्रस्तुति दी गई। एए एस सिन्हा ने कहा कि 12 कुमाऊं बटालियन का भारतीय सेना में एक गौरवशाली इतिहास रहा है। इस बटालियन की स्थापना लगभग 60 साल पहले हुई थी। छह साल की अल्पावधि में ही इस बटालियन को 1971 के भारत-पाक युद्ध में भाग लेने का अवसर मिला। बटालियन ने पूर्वी कमान का हिस्सा बनते हुए तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान के निकट स्थित दाऊदकंडी नामक द्वीप को फतह किया और बांग्लादेश को स्वतंत्र कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस वीरता के लिए बटालियन को दाऊदकंडी युद्ध सम्मान से नवाजा गया। इस मौके पर कैप्टन डॉ. एस एल गुप्ता, कर्नल जेएम, सूबेदार हरी सिंह बिष्ट, हवलदार हुकुम सिंह, नारायण सिंह आदि मौजूद रहे।