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चिकित्साधिकारी कार्यमुक्त न हुए तो नहीं मिलेगा वेतन
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देहरादून। उत्तराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय में कार्यरत 20 आयुर्वेद चिकित्साधिकारियों को तत्काल कार्यमुक्त न होने पर वेतन रोकने का आदेश जारी हो गया है। इससे पहले आयुर्वेद विवि के कुलपति ने उनकी कार्यमुक्ति के आदेश निरस्त कर दिए थे।
चिकित्साधिकारियों को लेकर विवि और शासन के बीच बड़ा टकराव पैदा हो गया है। शासन ने आयुर्वेद विवि में सेवाएं दे रहे 20 चिकित्साधिकारियों को तत्काल उनके मूल कार्यस्थल के लिए मुक्त करने का आदेश जारी किया। इस पर आयुर्वेद विवि के कुलपति ने यह कहते हुए रोक लगा दी कि जल्द ही सीसीआईएम का मान्यता के लिए निरीक्षण होना है। इसमें चिकित्साधिकारियों का होना अनिवार्य है। अब आयुष निदेशक आनंद स्वरूप ने आदेश जारी किया है कि अगर जल्द ही चिकित्साधिकारी मूल पद पर तैनात नहीं होते हैं तो उनका अगले माह का वेतन आहरित नहीं किया जाएगा। विवि और शासन के बीच चल रहे इस टकराव की वजह से चिकित्साधिकार पसोपेश में हैं। उन्हें समझ ही नहीं आ रहा है कि मूल तैनाती स्थल पर जाएं या विवि में रहें।
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चिकित्साधिकारियों को लेकर विवि और शासन के बीच बड़ा टकराव पैदा हो गया है। शासन ने आयुर्वेद विवि में सेवाएं दे रहे 20 चिकित्साधिकारियों को तत्काल उनके मूल कार्यस्थल के लिए मुक्त करने का आदेश जारी किया। इस पर आयुर्वेद विवि के कुलपति ने यह कहते हुए रोक लगा दी कि जल्द ही सीसीआईएम का मान्यता के लिए निरीक्षण होना है। इसमें चिकित्साधिकारियों का होना अनिवार्य है। अब आयुष निदेशक आनंद स्वरूप ने आदेश जारी किया है कि अगर जल्द ही चिकित्साधिकारी मूल पद पर तैनात नहीं होते हैं तो उनका अगले माह का वेतन आहरित नहीं किया जाएगा। विवि और शासन के बीच चल रहे इस टकराव की वजह से चिकित्साधिकार पसोपेश में हैं। उन्हें समझ ही नहीं आ रहा है कि मूल तैनाती स्थल पर जाएं या विवि में रहें।
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