{"_id":"5daf657b8ebc3e017553c48c","slug":"icoll-will-prove-to-be-a-milestone-in-defense-technology-dehradun-news-drn32375586","type":"story","status":"publish","title_hn":"रक्षा तकनीक में मील का पत्थर साबित होगा आईकॉल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रक्षा तकनीक में मील का पत्थर साबित होगा आईकॉल
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
देहरादून। इंटरनेशनल कांफ्रेंस ऑन ऑप्टिक्स एंड इलेक्ट्रो-ऑप्टिक्स (आईकॉल 2019) को समापन मंगलवार को हो गया। चार दिवसीय सम्मेलन में विश्वभर से लगभग से लगभग पांच सौ शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। इस मौके पर रक्षा विशेषज्ञों ने कहा कि आईकॉल 2019 देश की रक्षा तकनीक के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के कारगर सिद्ध होगी। आईकॉल के समन्वयक सुधीर खरे में सम्मेलन में प्रतिभाग करने वाले सभी आमंत्रित अतिथियों का आभार व्यक्त किया।
ऑप्टिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया की ओर से आईआरडीई में चार दिवसीय आईकॉल-2019 का आयोजन किया गया था। मंगलवार को समापन अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि यह सम्मेलन प्रकाशिकी एवं विद्युत प्रकाशिकी के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। इस दौरान सबसे बेहतरीन शोध पत्र प्रस्तुत करने वालों को सम्मानित भी किया गया। अंतिम दिन 15 वक्ताओं बीडी गुप्ता,आरके सिन्हा, पीपी शाहू, अरनब पांडे, गगनदीप कौर, राजेश गांधी, मनीष पंवार, कमल पी सिंह, मोहम्मद नाइजस, आसिमा प्रधान सहित करीब 15 विशेषज्ञों ने फाइबर ऑप्टिक कैमिकल एवं वायो सेंसर, टू सरफेस प्लाजमोनिक पोलेरिशन, फोटोनिक क्रिस्टल, ईयरबोर्न पॉल्यूशन सर्विलांस, हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजर, फैबिरिके टिंग सिल्क बेस्ड सेंसर, लाइन स्कैन ओटीसी सहित विभिन्न विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
सैटेलाइट के जरिए मिलेगी सटीक जानक ारी
देहरादून। दुश्मनों के ठिकानों का पता करना हो या आपदाग्रस्त क्षेत्रों की अब सैटेलाइट के जरिए इसकी सटीक जानकारी मिल पाएगी। इसके लिए आईआरडीई में हाईपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग पेलोड पर काम चल रहा है। एक-दो साल में इस पर काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद इसे अंतरिक्ष में स्थापित कर दिया जाएगा। इसके अंतरिक्ष में स्थापित होते ही भारत को सैटेलाइट के जरिए सटीक डाटा जुटाने के लिए अन्य देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
विज्ञापन
आईआरडीई में आयोजित आइकॉल 2019 सम्मेलन के दौरान आयोजित प्रदर्शनी में यह यंत्र दिखाया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि यह यंत्र दुश्मनों के ठिकानों पर अचूक निशाना लगाने में सहायक तो सिद्ध होगा ही, इसके माध्यम से अब बाढ़, आपदा, आग आदि क ी भी सटीक जानकारी मिल पाएगी। भविष्य में उत्तराखंड जैसे राज्य क लिए भी यह काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।
विज्ञापन
ऑप्टिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया की ओर से आईआरडीई में चार दिवसीय आईकॉल-2019 का आयोजन किया गया था। मंगलवार को समापन अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि यह सम्मेलन प्रकाशिकी एवं विद्युत प्रकाशिकी के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। इस दौरान सबसे बेहतरीन शोध पत्र प्रस्तुत करने वालों को सम्मानित भी किया गया। अंतिम दिन 15 वक्ताओं बीडी गुप्ता,आरके सिन्हा, पीपी शाहू, अरनब पांडे, गगनदीप कौर, राजेश गांधी, मनीष पंवार, कमल पी सिंह, मोहम्मद नाइजस, आसिमा प्रधान सहित करीब 15 विशेषज्ञों ने फाइबर ऑप्टिक कैमिकल एवं वायो सेंसर, टू सरफेस प्लाजमोनिक पोलेरिशन, फोटोनिक क्रिस्टल, ईयरबोर्न पॉल्यूशन सर्विलांस, हाइपर स्पेक्ट्रल इमेजर, फैबिरिके टिंग सिल्क बेस्ड सेंसर, लाइन स्कैन ओटीसी सहित विभिन्न विषयों पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए।
विज्ञापन
सैटेलाइट के जरिए मिलेगी सटीक जानक ारी
देहरादून। दुश्मनों के ठिकानों का पता करना हो या आपदाग्रस्त क्षेत्रों की अब सैटेलाइट के जरिए इसकी सटीक जानकारी मिल पाएगी। इसके लिए आईआरडीई में हाईपर स्पेक्ट्रल इमेजिंग पेलोड पर काम चल रहा है। एक-दो साल में इस पर काम पूरा हो जाएगा। इसके बाद इसे अंतरिक्ष में स्थापित कर दिया जाएगा। इसके अंतरिक्ष में स्थापित होते ही भारत को सैटेलाइट के जरिए सटीक डाटा जुटाने के लिए अन्य देशों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
विज्ञापन
आईआरडीई में आयोजित आइकॉल 2019 सम्मेलन के दौरान आयोजित प्रदर्शनी में यह यंत्र दिखाया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि यह यंत्र दुश्मनों के ठिकानों पर अचूक निशाना लगाने में सहायक तो सिद्ध होगा ही, इसके माध्यम से अब बाढ़, आपदा, आग आदि क ी भी सटीक जानकारी मिल पाएगी। भविष्य में उत्तराखंड जैसे राज्य क लिए भी यह काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।