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आईएएस स्टिंग केस: पढ़िए कैसे 79 दिन के होमवर्क के बाद स्टिंग मास्टर पर कसा शिकंजा

Tue, 30 Oct 2018 08:51 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 30 Oct 2018 08:51 AM IST
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ias sting case how police arrested sting master umesh kumar sharma
उमेश जयकुमार

स्टिंग के मास्टर माने जाने वाले निजी चैनल के सीईओ उमेश कुमार शर्मा आखिरकार स्टिंग के अपने मोहरे से ही मात खा गए।

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रविवार को हुई उमेश कुमार की गिरफ्तारी की कार्रवाई की नींव दस अगस्त को मुकदमे के साथ रख दी गई थी। 79 दिन तक मुकदमे को छिपाने में कामयाब रही पुलिस ने कानूनी शिकंजा कसने से पहले पूरा होमवर्क किया।

अदालत से पहले ही वारंट और सर्च वारंट लेकर उमेश कुमार को बचाव का एक मौका भी नहीं दिया। 

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत और अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश समेत कई अन्य के स्टिंग ऑपरेशन के प्रयास का सनसनीखेज खुलासा रविवार को निजी चैनल उमेश कुमार शर्मा की गिरफ्तारी के साथ हुआ।

इससे पहले पुलिस ने स्टिंग के पूरे खेल और कार्रवाई की भनक किसी को नहीं लगने दी।

मुख्यमंत्री और बड़े नौकरशाहों से जुड़ा मामला होने के कारण पूरी कार्रवाई अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था अशोक कुमार की देख-रेख में अंजाम दी गई।
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दरअसल, 12 जनवरी से लेकर पांच मई तक मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत और अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश का दिल्ली और देहरादून में स्टिंग करने का प्रयास हुआ, मगर कामयाबी नहीं मिली।

स्टिंग की पोल खुली तो स्टिंग मास्टर के खिलाफ सरकार की त्योरी चढ़ गई। नतीजा यह हुआ कि स्टिंग मास्टर उमेश कुमार को उसके मोहरे से मात देने का चक्रव्यूह रचा गया।

स्टिंग का प्रयास करने वाले चैनल के एडिटर इन्वेस्टिगेशन आयुष गौड़ निवासी ग्रेटर नोएडा के कंधे पर बंदूक रखकर कार्रवाई का ताना-बाना बुन लिया गया।

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दस अगस्त को साढे़ तीन बजे के करीब आयुष गौड़ की तरफ से चैनल सीईओ उमेश कुमार, मृत्युंजय मिश्रा समेत पांच के खिलाफ धारा 386, 388 और 120 बी के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया।

इसके बाद गोपनीय ढंग से मजबूत साक्ष्य जुटाकर कोर्ट से पहले उमेश कुमार की गिरफ्तारी को गैर जमानती वारंट, घर और आफिस तलाशी के लिए सर्च वारंट जारी कराया गया।

उत्तराखंड पुलिस ने 79 दिन के लंबे होमवर्क के बाद यूपी पुलिस की मदद से रविवार को सीईओ उमेश कुमार की गिरफ्तारी की कार्रवाई को अंजाम दे दिया।
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