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Dehradun News: तीन साल तक बिना शिक्षकों के पढ़ाई की, कहीं लग न जाए बैक
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Iएमकेपी पीजी कॉलेज में खाली पड़े हैं शिक्षिकाओं के 76 फीसदी पदI
राजधानी दून के अशासकीय महाविद्यालय एमकेपी पीजी कॉलेज की छात्राओं को चिंता सता रही कि बिना शिक्षिकाओं के पढ़ाई तो पूरी कर ली है लेकिन अब कहीं बैक न आ जाए। करीब 2500 छात्राओं वाले इस महाविद्यालय में लंबे समय से शिक्षिकाओं के लगभग 76 फीसदी पद खाली हैं। जबकि स्टाफ की कमी के चलते कार्यालय के काम भी प्रभावित हो रहे हैं। इस संबंध में छात्राओं के साथ कई बार शिक्षिकाएं भी आवाज उठा चुकी हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
कॉलेज प्रबंधन से चलने वाले इस महाविद्यालय में शासन की अनुमति के बाद ही शिक्षिकाओं की नियुक्ति की जाती है। लेकिन शासन से अनुमति न मिलने के चलने लंबे समय से शिक्षिकाओं व कर्मचारियों के पद खाली पड़े हैं। कॉलेज में शिक्षिकाओं के 63 पद है। जबकि वर्तमान में सिर्फ 11 शिक्षिकाएं हैं। उधर कार्यालय में भी सिर्फ पांच कर्मचारी हैं। ऐसे में छात्राओं की पढ़ाई के साथ महाविद्यालय के अन्य काम भी प्रभावित होते हैं। प्राचार्य डॉ. सरिता ने बताया कि समय-समय पर प्रबंधन की ओर से आउटसोर्स शिक्षकों की व्यवस्था की जाती है। वर्तमान में भी शिक्षकों की कमी के संबंध में प्रबंधन से वार्ता कर समाधान किया जाएगा।
Iमैंने हाल ही में बीए फाइनल की परीक्षा दी है। इन तीन सालों में हमने बिना शिक्षिकाओं के पढ़ाई की। ऐसे में चिंता सता रही है कि कहीं कुछ विषयों में बैक न आ जाए। शिक्षिकाओं के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए कई बार मांग की गई। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। - अनुभूति शर्मा, छात्रा
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Iकॉलेज में बिना शिक्षिकाओं के हमने पढ़ाई की। शिक्षिकाओं की कमी के चलते हमें सिर्फ सिलेबस बता दिया जाता था। जिसके चलते कई बार छात्राओं की बैक भी आ जाती थी। बिना शिक्षिकाओं के कॉलेज चलाना छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। - रितिका पैन्यूली, छात्राI
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राजधानी दून के अशासकीय महाविद्यालय एमकेपी पीजी कॉलेज की छात्राओं को चिंता सता रही कि बिना शिक्षिकाओं के पढ़ाई तो पूरी कर ली है लेकिन अब कहीं बैक न आ जाए। करीब 2500 छात्राओं वाले इस महाविद्यालय में लंबे समय से शिक्षिकाओं के लगभग 76 फीसदी पद खाली हैं। जबकि स्टाफ की कमी के चलते कार्यालय के काम भी प्रभावित हो रहे हैं। इस संबंध में छात्राओं के साथ कई बार शिक्षिकाएं भी आवाज उठा चुकी हैं लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो रहा है।
कॉलेज प्रबंधन से चलने वाले इस महाविद्यालय में शासन की अनुमति के बाद ही शिक्षिकाओं की नियुक्ति की जाती है। लेकिन शासन से अनुमति न मिलने के चलने लंबे समय से शिक्षिकाओं व कर्मचारियों के पद खाली पड़े हैं। कॉलेज में शिक्षिकाओं के 63 पद है। जबकि वर्तमान में सिर्फ 11 शिक्षिकाएं हैं। उधर कार्यालय में भी सिर्फ पांच कर्मचारी हैं। ऐसे में छात्राओं की पढ़ाई के साथ महाविद्यालय के अन्य काम भी प्रभावित होते हैं। प्राचार्य डॉ. सरिता ने बताया कि समय-समय पर प्रबंधन की ओर से आउटसोर्स शिक्षकों की व्यवस्था की जाती है। वर्तमान में भी शिक्षकों की कमी के संबंध में प्रबंधन से वार्ता कर समाधान किया जाएगा।
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Iमैंने हाल ही में बीए फाइनल की परीक्षा दी है। इन तीन सालों में हमने बिना शिक्षिकाओं के पढ़ाई की। ऐसे में चिंता सता रही है कि कहीं कुछ विषयों में बैक न आ जाए। शिक्षिकाओं के रिक्त पदों पर भर्ती के लिए कई बार मांग की गई। लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। - अनुभूति शर्मा, छात्रा
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Iकॉलेज में बिना शिक्षिकाओं के हमने पढ़ाई की। शिक्षिकाओं की कमी के चलते हमें सिर्फ सिलेबस बता दिया जाता था। जिसके चलते कई बार छात्राओं की बैक भी आ जाती थी। बिना शिक्षिकाओं के कॉलेज चलाना छात्राओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। - रितिका पैन्यूली, छात्राI