सह नहीं पाया पत्नी का गम, साथ उठी अर्थियां, चिताएं भी साथ जलीं
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सात जन्मों तक एक-दूसरे का साथ निभाने का वादा हर जोड़ा शादी के सात फेरे लेने के दौरान करता है। अब सात जन्मों तक वो साथ निभाते हैं, यह तो शायद किसी ने न देखा हो लेकिन एक साथ दुनिया से विदा होने का एक और उदाहरण फिर सामने है।
उत्तराखंड के चंपावत जिले में बिंडा तिवारी गांव में पत्नी के गम में महज 14 घंटे बाद ही पति ने भी दम तोड़ दिया। सोमवार को दंपति की अर्थियां साथ-साथ उठीं और दोनों का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार भी किया गया।
लोहाघाट ब्लॉक के सीमांत बिंडा तिवारी गांव निवासी जगदीश चंद्र पांडेय (75) की पत्नी चंचला देवी (70) का रविवार शाम सात बजे निधन हो गया था। सूर्यास्त होने के कारण अगले दिन सोमवार सुबह चंचला देवी के अंतिम संस्कार की तैयारियां की जा रही थी।
पत्नी की जुदाई के सदमे में तोड़ा दम
अपने हमसफर की जुदाई का गम शायद जगदीश चंद्र पांडेय बर्दाश्त नहीं कर सके और सुबह करीब नौ बजे बुजुर्ग जगदीश ने भी चंचला की जुदाई के सदमे में दम तोड़ दिया।
दंपति के एक साथ दुनियां को यूं छोड़ जाने से गांव का हर शख्स दुखी नजर आया, लेकिन जनम-जनम के इन साथियों ने लोगों को प्रेम की मिसाल भी दी। आखिर में जगदीश और चंचला की शवयात्रा एक साथ निकाली गई, जिसमें गांव का हर शख्स शामिल रहा।
नम आंखों और दिलों में विदा होते दंपति के प्रेम को सलामी देते हुए पंचेश्वर श्मशान घाट में एक ही चिता में दोनों का अंतिम संस्कार किया गया। जगदीश और चंचला का विवाह करीब 55 वर्ष पूर्व हुआ था। उनकी चार बेटियां हैं।
दोनों की चिताओं को छोटे भाई रवि दत्त पांडेय और भतीजे घनश्याम पांडेय ने मुखाग्नि दी। दंपति के दुनियां से एक साथ जाने की चर्चा आसपास के गांव में भी दिनभर होती रही।