फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   human right commission stand for UPNL employees.

आयोग ने चेताया, घर के नौकर नहीं उपनल कर्मचारी

Fri, 19 Feb 2016 01:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 19 Feb 2016 01:05 AM IST
विज्ञापन
human right commission stand for UPNL employees.

उपनल के माध्यम से सरकारी महकमों में तैनात आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को निजी कामों में लगाने पर मानवाधिकार आयोग ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। आयोग ने संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति द्वारा एक कर्मचारी को आईएएस अफसर के घर पर नौकर बनाने के मामले को एक नागरिक के साथ उसकी मजबूरियों का शोषण मानवाधिकार का घोर उल्लंघन माना है।

विज्ञापन


इतना ही नहीं आयोग ने इस मामले को नजीर बनाते हुए उपनल में कर्मचारियों के उत्पीड़न और कम पारिश्रमिक पर सरकार के खिलाफ जांच बैठाने तक के लिए चेता दिया। आयोग ने कार्रवाई से पहले प्रमुख सचिव श्रम को चार हफ्ते के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत कर सरकार को एक मौका दिया है।
विज्ञापन


गांव परकंडी रुद्रप्रयाग निवासी आपदा पीड़ित सुशांत त्रिवेदी ने पिछले साल एक दिसंबर को आयोग में शिकायत की थी। आयोग ने पूर्व में सुनवाई करते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था। बृहस्पतिवार को आयोग में फिर मामले में सुनवाई हुई।
विज्ञापन
विज्ञापन


शिकायतकर्ता के अधिवक्ता आलोक घिल्डियाल ने आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. मृत्युंजय मिश्रा और उपनल द्वारा आयोग में दी रिपोर्ट में विरोधाभासी तथ्यों पर ध्यान आकर्षित किया। विश्वविद्यालय ने जवाब दिया है कि सुशांत द्विवेदी की सेवाएं उनकी तरफ से समाप्त नहीं की गई। बल्कि उपनल द्वारा उनके कार्य को संतुष्ट न पाए जाने पर उपनल को वापस किया गया। जबकि उपनल के सीनियर जीएम कर्नल वीपी नौटियाल ने जवाब दिया है कि उपकुलसचिव द्वारा शिकायत पर उपनल ने उनकी सेवा समाप्त की है।

26 अप्रैल को अगली सुनवाई
आयोग ने टिप्पणी की, कि विश्वविद्यालय द्वारा किसी कर्मचारी को दिल्ली भेजने और उससे दूसरे कार्य कराने से एक नागरिक की मजबूरियों का शोषण करना बुनियादी तौर पर मानवाधिकार का उल्लंघन है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि इस परिवाद के साथ ही आयोग उपनल के माध्यम से कार्यरत सभी कर्मचारियों के जीवन यापन, वेतन भत्ते और उनकी गरिमामय जीवन मानवाधिकार के लिए कृत संकल्प है।

मामले में अगली सुनवाई 26 अप्रैल को नियत की गई है। आयोग के चेयरमैन जस्टिस विजेंद्र जैन, सदस्य जस्टिस राजेश टंडन और डा. हेमलता ढौंढियाल की बैंच मामले की सुनवाई कर रही है।

सर्विस मैटर बताने पर भी दिया संदेश
सरकार के उपनल कर्मियों के मसले को सर्विस का मसला बताने के विचार पर भी आयोग ने स्पष्ट संदेश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संस्था, उसके अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय ट्रिब्यूनल और संयुक्त राष्ट्र की सार्वभौमिक घोषणा मानवाधिकार 1948 के अंतर्गत हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम, श्रमिक वेतनमान समेत कई समझौतों पर भारत के हस्ताक्षर हैं। ऐसी स्थिति में यह एक सेवा का विषय नहीं है बल्कि भारतीय नागरिक, उसके मूलभूत अधिकारों और उनके मानवाधिकारों से संबंधित है।


यह थी शिकायत
सुशांत ने आयोग में बताया कि वर्ष 2013 में उपनल के माध्यम उनकी नियुक्ति आयुर्वेद विश्वविद्यालय में चतुर्थ श्रेणी पर हुई थी। अप्रैल 2015 में उन्हें प्रमुख सचिव ओमप्रकाश के दिल्ली स्थित आवास पर निजी कार्य के लिए भेज दिया। प्रमुख सचिव के आवास पर सुशांत को दस दिन तक झाड़ू, पोंछा, बर्तन और कपड़े धोने जैसे कार्य कराए गए। खाना बनाने और दूसरे कई निजी कार्य करने में असमर्थता जताने पर सुशांत को एक मई 2015 को दिल्ली से दून भेज दिया गया। नौ मई को आयुर्वेद विश्वविद्यालय के कुलसचिव द्वारा सुशांत को सेवा समाप्ति की जानकारी दी गई।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed