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सीएम के फरमान ने बेघरों की निकाली 'जान'
अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 03 Jan 2014 12:32 PM IST
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राजधानी देहरादून में गुरुवार की सर्द रात के सन्नाटे में बेघर और असहाय बदहवास भागते-फिरते नजर आए।
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जो जहां हत्थे चढ़ा वहीं लाद लिया
सीएम साहब का फरमान था तो पुलिस और प्रशासनिक अमला आदेश पर अमल की फॉर्मेलिटी पूरी करने निकल पड़ा। नजारा भी गजब था, ठिठुरते लाचारों के पीछे लठ्ठ लिए पुलिस वाले थे और हूटर बजातीं सरकारी गाड़ियां। जो जहां हत्थे चढ़ा वहीं लाद लिया गया।
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असल में यह था सीएम का रैनबसेरा चलो अभियान। यहां भी मुसीबतों ने इनका पीछा नहीं छोड़ा। तीस की क्षमता वाले रैनबसेरे में सत्तर-अस्सी लोगों को जबरन ठूंस दिया गया। बाकी जो बचे उनकी रात बाहर ही कटी। फर्क इतना था कि इनके इर्द-गिर्द सरकारी गहमागहमी थी और रैनबसेरे की गर्मी।
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रात भर प्रशासनिक अमला हरकत में रहा
मुख्यमंत्री के आदेश पर चले अभियान को लेकर रात भर प्रशासनिक अमला हरकत में रहा। शहर में वे ठिकाने टटोले जा रहे थे जहां खुले आसमान के नीचे लाचार लोगों की रातें कटती हैं।
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छापामार अभियान की तर्ज पर बेघरों को खोजा-खंगाला गया और फिर उन्हें विक्रम में लादकर घंटाघर में बने रैनबसेरे में ठूंस दिया गया। बेघर बूढ़े-बच्चे और महिलाएं हैरान-परेशान थी कि आखिर यह कैसी आफत आ गई।
लेकिन इन सवालों का जवाब उन्हें देता भी कौन। पुलिस से लेकर अफसर तक बस इसी मिशन पर थे कि फुटपाथ और पार्को के आसपास अब कोई असहाय और लाचार दिखाई न पड़े। सीएम के इस फरमान की औपचारिकता भी अटपटे ढंग से निभाई गई।
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तीस लोगों की क्षमता वाले रैनबसेरे में सत्तर-अस्सी लोगों को जबरन ठूंसने की कोशिश हुई तो अफरातफरी मच गई। आनन-फानन वहां बसेरे के बाहर बाकी बचे लोगों के बिछौने लगा दिए गए। अफसरों के चेहरों पर मिशन की कामयाबी की चमक थी और बेघरों को फिर वैसा ही ठिकाना नसीब हुआ पहले जैसे उनकी गुजर-बसर हो रही थी।
प्रॉपर्टी डीलर और व्यापारी भी बेघर
रैन बसेरा में प्रॉपर्टी डीलर और व्यापारी भी सोते हैं। ये वे व्यापारी हैं, जिनके दून में घर हैं और उनकी माली हालत भी ठीक। लेकिन शराब की लत इन्हें घर नहीं पहुंचने देती।
गुरुवार को रैन बसेरे में आए एक व्यक्ति ने बताया कि वह प्रॉपर्टी डीलर है। शराब का लती होने के कारण उसके घर में अक्सर क्लेश होता है। इससे बचने के लिए वह रात बिताने रैन बसेरे में आ जाता है। कुछ यही कहानी एक व्यापारी की भी थी।
कहां, कब, किसे बांटे कंबल
पूरे शहर में शोर है कि गरीबों को कंबल बंटवा दिए। लेकिन कब, कहां, किसे? हमें तो मिला नहीं।’ गुरुवार रात दस बजे घंटाघर स्थित रैन बसेरे में रात बिताने पहुंचे अधिकतर बेघरों ने कुछ इन लफ्जों में सिस्टम की शिकायत की।
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बुधवार रात सीएम विजय बहुगुणा जिला प्रशासन की टीम के साथ शहर में गरीबों का हाल जानने निकले थे। रैन बसेरा के बाद अफसरों ने सीएम को कनक चौक पर सड़क किनारे सोने वाले कुछ लोग दिखाकर विदा कर दिया। इस दौरान कुछ गरीबों को कंबल भी बांटे गए।
फोटो खिंचवा दी और निकल गए सीएम
गुरुवार को रात नौ बजे अमर उजाला संवाददाता ने रैन बसेरा में रात बिताने पहुंचे लोगों का हाल जानने की कोशिश की। एक से बात शुरू हुई तो एक-एक कर सभी लोग उठ खड़े हुए। बोले, अफसरों ने सिर्फ तीन लोगों को सीएम से कंबल दिलवा दिया, फोटो खिंचवा दी और निकल गए। बाकी को तो कंबल देखने के लिए भी नहीं मिला।
उधर, रैन बसेरा संचालित कर रही एनजीओ दून शेल्टर्स सोसायटी फार द होमलेस के प्रबंधक दीपक कुकरती ने भी बताया कि केवल तीन से चार लोगों को कंबल दिए गए। कहा कि और लोगों को भी वितरण किया जाना चाहिए था। सभी बेघर लोग मायूस है।
बेघरों का दर्द
हमें कंबल नहीं मिला। गरीबों की इतनी परवाह थी तो सबको कंबल बांटे जाने चाहिए थे। यह तो हमारे साथ मजाक हुआ है।
- राम सिंह
कुछ लोगों को कंबल बांटकर वाहवाही लूटी जा रही है। यह तो सरासर गलत है। हम लोग इसका विरोध करेंगे।
- जीत सिंह
हमारी भावनाओं से खिलवाड़ हुआ है। कुछ ही लोगों को कंबल बांटे गए, जबकि हमारी तरफ तो किसी ने नजर डालना तक जरूरी नहीं समझा।
- प्रभुदयाल
मैंने कंबल लेने की कोशिश की थी। आगे बढ़ा भी, लेकिन जब तक पहुंच पाता अफसर मुख्यमंत्री को लेकर निकल गए थे।
- ज्ञान सिंह