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पुलिस में होते हुए रहे अपराधियों के सिपहसालार
अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 26 Dec 2013 01:24 PM IST
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ईडी के सहायक निदेशक परीक्षित कुमार उत्तराखंड पुलिस में रहते हुए भी विवादों से जुड़े रहे।
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उन पर संपत्ति कब्जाने, प्रॉपर्टी डीलरों को फायदा पहुंचाने के आरोप लगते रहे हैं। दून में तैनाती के दौरान सांसद फूलनदेवी की हत्या के आरोपी शेर सिंह राणा की प्रेस कांफ्रेस कराने में भी तत्कालीन इंस्पेक्टर परीक्षित कुमार का नाम सामने आया था।
आरोपी को फायदा पहुंचाने का आरोप
डालनवाला क्षेत्र के चर्चित जजेज क्वार्टर भूमि घोटाले में भी परीक्षित पर एक आरोपी को फायदा पहुंचाने का आरोप था।
विजिलेंस ने भी इस मामले की जांच की थी। दून में तैनाती के दौरान हवालात से लूटे गए हथियारों की कारगी चौक से बरामदगी में तब इंस्पेक्टर परीक्षित कुमार की भूमिका पर सवाल उठे थे।
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ऊधमसिंह नगर में तैनाती के दौरान हिरासत में हुई एक शख्स की मौत मामले भी उन पर लापरवाही का आरोप है। उधर, छापे के दौरान परीक्षित कुमार ने सभी आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि परीक्षित कुमार को साजिशन फंसाने की कोशिश की जा रही है।
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मॉल, बार में किया निवेश!
सूत्रों के मुताबिक, सीबीआई को इस बात का भी पता लगा है कि सहायक निदेशक परीक्षित कुमार ने राजपुर रोड स्थित एक रेस्टोरेंट बार और मॉल में भी मोटी रकम लगाई है। सूचना पर सीबीआई ने मॉल और बार से भी महत्वपूर्ण दस्तावेज जुटाए हैं।
विदेशी टीवी की भी जांच
सीबीआई सूत्रों ने बताया कि परीक्षित कुमार के पास मौजूद विदेशी एलसीडी टीवी की खरीद की भी जांच की जा रही है। आरोप है कि इस टीवी की खरीद में कस्टम नियमों का उल्लंघन किया गया है।
नियुक्ति पर भी सवाल
उत्तराखंड पुलिस के इंस्पेक्टर परीक्षित कुमार की प्रवर्तन निदेशालय में नियुक्ति पर भी सवाल उठ रहे हैं। भ्रष्ट छवि वाले पुलिस अफसर को भ्रष्टाचार के मामलों की जांच करने वाले प्रवर्तन निदेशालय जैसे महत्वपूर्ण महकमे ने कैसे प्रतिनियुक्ति दी गई, यह मुद्दा एक बार फिर गरम हो गया है।