मोक्ष की तलाश में हरिद्वार में आए थे हिप्पी और ऋषिकेश में बीटल्स
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उत्तराखंड की धरती प्राचीन काल से मोक्ष की तलाश में भटके लोगों को आकर्षित करती रही है। युद्ध जीतकर पांडव सब कुछ छोड़कर मोक्ष की तलाश में इसी धरती पर आए थे। ऋषि-मुनियों का प्राचीन योग और ध्यान पूरी दुनिया को बार-बार यहां खींच लाया। आधी शताब्दी बीती जब दुनिया का वैभव छोड़कर इसी पुण्य भूमि पर विश्वभर से लाखों हिप्पी और बीटल चले आए। बाद में वे पूरे भारत में फैल गए। सारी दुनिया की फैशन और म्यूजिक इंडस्ट्री को इस हिप्पीवाद ने इतना आकर्षित किया कि विश्वभर के नामी संगीतकार हिप्पी और बीटल बनकर इसी हरिद्वार और ऋषिकेश में आ गए।
वह 1960 का दशक था। इस दशक के उत्तरार्द्ध में सन 1968 में पहले हिप्पी ब्रिटेन से हरिद्वार पहुंचे। आधुनिकता और वैभव की होड़ से ऊबे इन लोगों को बाल योगेश्वर सबसे पहले हरिद्वार लेकर आए थे। उन्हीं के साथ महेश योगी ऊबे यूरोपियंस के दल को इस धरती पर ले आए। पहले दल में ही जाने-माने पश्चिमी संगीतकार जार्ज हैरीसन, पाल मैक्रेटने, रिकी क्रेज, रिंगोस्टार आदि कई हरिद्वार और ऋषिकेश पहुंच गए। गंगा के घाटों पर मेडिटेशन की तलाश में आए इन युवाओं में अनेक युुवतियों भी शामिल थी। संयोग से उन्हीं दिनों गंगा में बाढ़ आने से हरिद्वार और ऋषिकेश के तटों पर दूर-दूर तक रेत फैल गई थी।
हिप्पी और बीटल्स ने इसी रेत को अपने संगीत और नृत्य का आशियाना बना दिया। खुले आकाश के नीचे गर्मियों के दिन रात बिताने वाले हिप्पियों ने ऐसे संगीत को जन्म दिया जिसने आगे चलकर विश्व प्रसिद्ध गायक एल्विन प्रिसले और माइकल जैक्सन जैसे गायकों को गायक बना दिया। हरिद्वार को पंतद्वीप, रोडी मैदान बेलवाला, चंडी घाट, गुरुकुल घाट आदि हिप्पियों की गतिविधियों का केंद्र बन गए। हरिद्वार और ऋषिकेश के इन घाटों पर विश्वभर में प्रसिद्ध हुआ हिप्पी फैशन, हिप्पी संगीत और हिप्पी बैंड मशहूर हो गए। बाद में हिप्पी हरिद्वार से निकलकर पुष्कर, वाराणसी, गोवा आदि क्षेत्रों में भी गए।
इन हिप्पियों और बीटल्स ने इस धर्म क्षेत्र की पूरी अर्थ व्यवस्था बदल डाली। इस क्षेत्र में लाखों डालर आने शुरू हुए जो बाद में करोड़ों में बदल गए। संयोग से उन्हीं दिनों देश में आपातकाल लगा जिससे छिपाने के लिए देश भर से धन हरिद्वार के संत जगत में आया। तभी से इस समूचे धर्मक्षेत्र की काया पलट गई। देश में इतना प्रभाव पड़ा कि विख्यात सितारवादक पंड़ित रविशंकर, प्रख्यात सरोदवादक उस्ताद अमजद अली खां, जाने माने बांसुरीवादक पंडित हरि प्रसाद चौरासिया और उनके भतीजे राकेश चौरासिया ने हिप्पियों के साथ फ्यूजन ग्रुप बना डाले। फ्यूजन संगीत ने पूरी दुनिया को पूरी तरह प्रभावित किया। पूरी दुनिया में हिप्पीवाद पर फिल्में बनी। भारत में भी हरे रामा हरे कृष्णा जैसी कई सुपरहिट फिल्में हिप्पियों पर बनी। आज दुनिया में भले ही हिप्पीवाद समाप्त हो रहा हो, लेकिन बीटल्स संगीत और हिप्पी फैशन आज भी कायम है। विश्वभर के युवाओं में प्रचलित जींस हिप्पियों की ही देन है।
रिंगो स्टार के नेतृत्व में आया था पहला दल
भारत में पहला हिप्पी-बीटल दल रिंगो स्टार के नेतृत्व में आया था। इस दल में आने वाले मौरीन, जैन ऐशर, मैक कार्टनी, जार्ज हैरिशन, जोन लेनन, रोडे माल इवेंस, प्रूडेन्स फैरो, जेनी बायड आदि इंग्लैंड से आए हिप्पी शमिल थे।
आज बाल योगेश्वर को जानने वाले कम
दुनिया भर से हिप्पियों को गंगा की इस भूमि पर लाने वाले बाल योगेश्वर को जानने वाले भी इस धर्म नगरी में बहुत कम बचे हैं। यद्यपि यहां संतों की भरमार हैं। बाल योगेश्वर हरिद्वार के प्रसिद्ध संत प्रेमनगर आश्रम के संस्थापक हंस महाराज के पुत्र और सतपाल महाराज के भाई थे। हिप्पियों के साथ वे भी अमेरिका लौट गए और फिर कभी भी भारत नहीं आए। महेश योगी ब्रह्मलीन हो चुके हैं।