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अंग्रेजी मीडियम ने तोड़ा हौसला तो छात्र ने मौत को लगाया गले, पढ़ें दर्द बयां करता सुसाइड नोट

Sun, 01 Sep 2019 10:03 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sun, 01 Sep 2019 10:03 AM IST
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hindi medium did not understood english commit suicide
सांकेतिक तस्वीर

हल्द्वानी की भट्ट कॉलोनी फेस-2 स्थित प्राइवेट हॉस्टल में प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) की तैयारी कर रहे एक छात्र ने शुक्रवार सुबह फांसी लगाकर जान दे दी। तलाशी के दौरान पुलिस को उसके हॉस्टल के कमरे से सुसाइड नोट मिला, जिसमें छात्र नेे लिखा था कि माता-पिता उसे जो बनाना चाहते हैं, वह उनके सपनों पर खरा नहीं उतर सका। इसलिए परिवार के लोग उसे माफ कर दें।

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शाहजहांपुर जिले के सैजना सिधौली निवासी दिनेश कुमार का पुत्र अभिषेक कुमार (22) भट्ट कॉलोनी स्थित हाईक्लास पीजी में रहता था और एक कोचिंग से पीएमटी की तैयारी कर रहा था। एक माह पहले हुए टेस्ट में अभिषेक के नंबर काफी कम आए थे। इसी कारण वह काफी परेशान रहने लगा था। शुक्रवार सुबह अभिषेक के साथ रहने वाले तीन अन्य छात्र बेड़ीनाग (पिथौरागढ़) निवासी अंकित चंदोला, अल्मोड़ा के हितेश भट्ट, जसपुर निवासी रजत चौहान कोचिंग चले गए।

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रजत और अंकित टेस्ट देने लगे, जबकि हितेश कमरे पर आया। अंदर से कमरा बंद देखकर उसने रोशनदान में हाथ डालकर सिटकनी खोली। अंदर देखा तो अभिषेक खिड़की के ग्रिल पर पतली तौलिया का फंदा बनाकर फांसी पर लटका था। हितेश के शोर करने पर हॉस्टल संचालक राजेश फुलारा कमरे में आए और फिर अभिषेक को बेस अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने अभिषेक को मृत घोषित कर दिया।

सूचना पर मुखानी थानाध्यक्ष नंदन सिंह रावत मौके पर पहुंचे। उन्होंने अभिषेक के कमरे की तलाशी ली। उस समय अभिषेक के बिस्तर पर उसका एक मोबाइल और बेल्ट पड़े थे। पुलिस ने उसके दीवान से किताबें निकाली तो उनमें एक पेज का सुसाइड नोट मिला। इसमें अभिषेक ने अपने माता-पिता, चाचा और भाई को संबोधित पत्र लिखा था। पुलिस ने सुसाइड नोट को कब्जे में ले लिया।

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अंग्रेजी मीडियम ने तोड़ दिया हौसला

अभिषेक ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि वह हिंदी मीडियम से पढ़ा था, लेकिन उसे यहां अंग्रेजी मीडियम की पढ़ाई करनी पड़ रही है। इसी कारण वह डॉक्टर नहीं बन सकता है।

विश्वास नहीं था कि अभिषेक ऐसा करेगा : फुलारा

हॉस्टल संचालक राजेश फुलारा ने बताया कि अभिषेक ने सुबह अपने सहपाठियों के साथ नाश्ता किया था। किसी को विश्वास नहीं था कि वह अचानक ऐसा कदम उठा लेगा। मौत के बाद हॉस्टल संचालक ने उसके चाचा को फोन कर घटना से अवगत कराया।

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ज्यादा बात नहीं करता था अभिषेक

अभिषेक के साथ रहने वाले अंकित चंदोला ने बताया कि वह ज्यादा बात नहीं करता था। पूछने पर अपनी निराशा का कारण नहीं बताता था। दूसरे दोस्त रजत चौहान ने बताया कि कम नंबर आने पर उसने अभिषेक से कहा था कि हौसला रखो सब कुछ ठीक हो जाएगा।

डॉक्टर बनाना चाहते थे माता

अभिषेक के माता-पिता उसे डॉक्टर बनाना चाहते थे। इसी कारण उन्होंने घर से करीब 200 किलोमीटर दूर हल्द्वानी में अभिषेक को पढ़ाने का फैसला लिया। अभिषेक के हॉस्टल में रहने का खर्च साढ़े छह हजार रुपये प्रतिमाह और कोचिंग की सालभर की पूरी फीस 85 हजार रुपये थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद माता-पिता और चाचा सकते में आ गए।
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